2 दिन पहलेलेखक: अदिति ओझा
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गर्मी और उमस के मौसम में ऑफिस का AC राहत की सांस देता है। लेकिन यही ठंडा माहौल डीहाइड्रेशन की वजह भी बन सकता है। दरअसल एसी की ठंडक में प्यास का एहसास कम होता है, जबकि शरीर लगातार नमी खोता रहता है।
अगर ऐसे में बार-बार चाय-कॉफी पी रहे हैं तो डीहाइड्रेशन का रिस्क और बढ़ जाता है। इसका नतीजा ये होता है कि दिन खत्म होते-होते सिरदर्द, थकान और सुस्ती महसूस होने लगती है। इसलिए डीहाइड्रेशन के शुरुआती संकेतों को पहचानना और समय रहते सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि-
- एसी का शरीर पर क्या असर पड़ता है?
- एसी से होने वाले डीहाइड्रेशन के क्या संकेत हैं?
- एसी में रहते हुए कितना पानी पीना जरूरी है?
एक्सपर्ट: डॉ. संचयन रॉय, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली
सवाल- क्या बिना पसीना आए भी शरीर में पानी की कमी हो सकती है?
जवाब- हां, यह काफी कॉमन है। दरअसल एयर कंडीशंड वातावरण में शरीर पसीना नहीं बनाता है। इसके बावजूद शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- किडनी हर समय ब्लड को फिल्टर करके यूरिन बनाती रहती है।
- कम पानी पीने पर भी यूरिन बनता है। हालांकि, इसकी मात्रा कम और रंग गहरा हो जाता है।
- सांस छोड़ने पर हवा में कार्बन डाइऑक्साइड के साथ नमी भी जाती है। AC या डाई एयर में यह लॉस ज्यादा हो सकता है।
- स्किन से हल्का पसीना हर समय निकलता रहता है, लेकिन यह मात्रा इतनी कम होती है कि दिखता नहीं है। इसे इनसेंसिबल वॉटर लॉस कहते हैं।
- डाइजेशन प्रोसेस में भी थोड़ा पानी खर्च होता है।
इन सभी कारणों से बिना पसीना निकले भी डीहाइड्रेशन हो सकता है।
सवाल- ऑफिस में AC की हवा शरीर पर क्या असर डालती है?
जवाब- एयर कंडीशंड कमरे की हवा ड्राई होती है। इसलिए स्किन और रेस्पिरेटरी सिस्टम से इवैपोरेशन बढ़ जाता है। इसे ट्रांसएपिडर्मल वॉटर लॉस कहते हैं।
- यही कारण है कि बिना पसीना आए भी डीहाइड्रेशन हो सकता है। पॉइंटर्स से इसे और डिटेल में समझिए-
- ठंडी हवा शरीर की ब्लड वेसल्स को सिकोड़ती (वेसोकॉस्ट्रिक्शन) है। इससे मसल्स में स्टिफनेस और सिरदर्द हो सकता है।
- लगातार ठंडी, ड्राई एयर में सांस लेने से नाक और गले की म्यूकस लाइनिंग सूखती है। इससे इरिटेशन या इन्फेक्शन का रिस्क बढ़ता है।
- तापमान में बार-बार बदलाव (AC से बाहर गर्मी में जाना) से शरीर की थर्मोरेगुलेशन क्षमता पर प्रेशर पड़ता है, जिससे थकान और असहजता महसूस होती है।
सवाल- AC में रहने से प्यास कम क्यों लगती है?
जवाब- सामान्य तौर पर प्यास का एहसास तब बढ़ता है, जब शरीर का तापमान और पसीना बढ़ता है, लेकिन AC के ठंडे माहौल में यह ट्रिगर कमजोर पड़ जाता है। इसलिए ब्रेन को यह संकेत ही नहीं मिलता कि शरीर पानी खो रहा है, उसे पानी की जरूरत है।

सवाल- कैसे पहचानें कि आप AC की वजह से डिहाइड्रेट हो रहे हैं?
जवाब- कुछ कॉमन संकेतों से पहचान सकते हैं कि AC की वजह से डीहाइड्रेशन हो रहा है। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या कम यूरिन या डार्क कलर यूरिन भी डीहाइड्रेशन का संकेत है?
जवाब- हां, जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो किडनी पानी बचाने के लिए यूरिन को ज्यादा कॉन्सन्ट्रेटेड कर देती है। इसे विस्तार से समझिए-
- इस प्रक्रिया में एंटीडाययूरेटिक हॉर्मोन (ADH) की भूमिका होती है। यह किडनी को पानी रीएब्जॉर्ब करने का सिग्नल देता है।
- इससे यूरिन का कलर डार्क हो जाता है और उसकी फ्रीक्वेंसी भी कम हो सकती है।
सवाल- किन लोगों के लिए लंबे समय तक ऑफिस एसी में बैठना ज्यादा रिस्की है?
जवाब- कुछ लोगों के लिए एसी की ठंडी और ड्राई हवा शरीर पर ज्यादा नुकसानदायक हो सकती है। इन्हें डीहाइड्रेशन, एलर्जी और सांस से जुड़ी दिक्कतों का रिस्क रहता है। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या ज्यादा कॉफी-चाय पीने से भी डीहाइड्रेशन का रिस्क बढ़ता है?
जवाब- हां, ज्यादा मात्रा में कॉफी-चाय पीने से डीहाइड्रेशन का रिस्क बढ़ सकता है।
- इन ड्रिंक्स में मौजूद कैफीन डाययूरेटिक इफेक्ट पैदा करता है।
- आमतौर पर दिन में 2-3 कप सेफ है। कॉफी-चाय डीहाइड्रेशन की अकेली वजह नहीं होती है। अगर AC में लगातार कैफीन ले रहे हैं और पानी भी कम पी रहे हैं तो शरीर में फ्लूइड बैलेंस बिगड़ सकता है। इससे डीहाइड्रेशन हो सकता है।
सवाल- AC में कितनी मात्रा में पानी पिएं?
जवाब- AC में रहने पर प्यास कम लगती है। इसलिए पानी ‘प्यास के हिसाब से’ नहीं बल्कि प्लान करके पीना चाहिए।
- सामान्य तौर पर एक वयस्क को रोज 2-2.5 लीटर पानी पीना चाहिए। अगर लंबे समय तक AC में हैं तो सांस और स्किन के जरिए हो रहे वॉटर लॉस के लिए 300-500 ml ज्यादा पानी पीना चाहिए।
- एक बार में ज्यादा पानी पीने की बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पीना चाहिए। इससे शरीर का फ्लूइड बैलेंस बना रहता है और डीहाइड्रेशन का रिस्क कम होता है।
सवाल- पानी काफी है या इलेक्ट्रोलाइट्स भी लेने चाहिए?
जवाब- ज्यादातर मामलों में सिर्फ पानी पर्याप्त होता है। इसे ऐसे समझें-
- एसी के ठंडे माहौल में मिनरल लॉस नहीं, फ्लूइड लॉस होता है। ऐसे में सामान्य हाइड्रेशन के लिए पानी ही काफी है।
- अगर कमजोरी, चक्कर या थकान महसूस हो रही है तो इलेक्ट्रोलाइट्स लेना फायदेमंद है।
सवाल- क्या बीच-बीच में एसी हॉल से बाहर निकलना जरूरी है?
जवाब- हां, छोटे-छोटे ब्रेक (5-10 मिनट) लेकर थोड़ी वॉक करना ब्लड सर्कुलेशन, आंखों और मानसिक ताजगी के लिए अच्छा है। लेकिन ये ध्यान रखें कि इससे शरीर को टेम्परेचर शॉक न लगे।
- लगातार ठंडे माहौल में रहने से शरीर का थर्मोरेगुलेशन सिस्टम एक ही तापमान पर ‘सेट’ हो जाता है। इसलिए अचानक बहुत गर्म माहौल में जाने से शरीर को झटका लग सकता है।
- बाहर-भीतर के तापमान में बहुत अंतर न हो यानी धीरे-धीरे एक्सपोजर लें, ताकि शरीर आराम से एडजस्ट कर सके।
सवाल- एसी के नुकसान को कम करने के लिए क्या सावधानियां बरतें?
जवाब- कुछ आसान उपाय अपनाकर एसी से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ग्राफिक में देखिए-

एसी में डीहाइड्रेशन से जुड़े मिथ और फैक्ट
मिथ- डीहाइड्रेशन सिर्फ गर्मी में ही होता है।
फैक्ट- डीहाइड्रेशन ठंडे, AC वाले माहौल में भी हो सकता है।
मिथ- पसीना न आना मतलब शरीर में पानी की कमी नहीं है।
फैक्ट- पसीना न आना यह साबित नहीं करता कि शरीर पूरी तरह हाइड्रेटेड है। खासकर AC में पसीना कम होता है, लेकिन शरीर से पानी स्किन और सांस के जरिए लगातार निकलता रहता है।
मिथ- ठंडे माहौल में ज्यादा पानी पीने की जरूरत नहीं है।
फैक्ट- ठंडे या AC वाले माहौल में प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर से वाटर लॉस नहीं रुकता है, बस ‘दिखता’ कम है। इसलिए नियमित अंतराल पर पानी पीना जरूरी है।
मिथ- AC में शरीर की पानी की जरूरत कम हो जाती है।
फैक्ट- AC में प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर की पानी की जरूरत कम नहीं होती कई मामलों में थोड़ी बढ़ भी सकती है।
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गर्मियों में पसीना ज्यादा आता है। इसलिए शरीर की पानी की जरूरत बढ़ जाती है। अगर पानी की ये अतिरिक्त जरूरत पूरी न की जाए तो डिहाइड्रेशन हो सकता है।
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