जरूरत की खबर– कहीं आप मानसून-ब्लूज का शिकार तो नहीं:  इन 6 कारणों से बढ़ता रिस्क, बचाव के लिए इन 8 बातों का रखें ध्यान ध्यान
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जरूरत की खबर– कहीं आप मानसून-ब्लूज का शिकार तो नहीं: इन 6 कारणों से बढ़ता रिस्क, बचाव के लिए इन 8 बातों का रखें ध्यान ध्यान

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9 घंटे पहले

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जुलाई की शुरुआत के साथ ही देश के कई हिस्सों में झमाझम बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट भी जारी किया है। ऐसे में जब लगातार कई दिन घर में बंद रहना पड़े, बाहर की दुनिया धीमी और सुस्त लगने लगे तो इसका असर सिर्फ मौसम पर नहीं, हमारे मूड पर भी दिखाई देने लगता है।

बारिश के इसी लंबे और बंद माहौल में कई लोग थकान, चिड़चिड़ापन, बेवजह की उदासी या अकेलेपन जैसी भावनाओं का अनुभव करने लगते हैं। इस मानसिक स्थिति को ‘मानसून ब्लूज’ कहा जाता है।

यह मौसम से जुड़ी एक मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रिया है, जो हर साल हजारों लोगों की भावनाओं और व्यवहार को प्रभावित करती है। मानसून ब्लूज कई बार डिप्रेशन की शुरुआती चेतावनी भी हो सकता है। खासकर उनके लिए जो पहले से तनाव, अकेलेपन या सामाजिक दूरी से जूझ रहे हैं।

तो चलिए, ‘जरूरत की खबर’ में आज समझते कि मानसून ब्लूज के पीछे का साइंस क्या है? साथ ही जानेंगे कि-

  • इस मौसम में खुद को कैसे बचाएं?

एक्सपर्ट: डॉ. अखिलेंद्र कुमार सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, मनोविज्ञान विभाग, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी

सवाल- मानसून ब्लूज के पीछे का साइंस क्या है?

जवाब- हेल्थलाइन में पब्लिश एक रिपोर्ट के मुताबिक, रिसर्चर्स ने पाया कि लगातार बारिश, बादल और कम धूप वाला मौसम इंसानी मूड और व्यवहार पर नेगेटिव प्रभाव डाल सकता है।

दरअसल कई दिनों तक सूरज नहीं निकलने से शरीर में सेरोटोनिन (हैप्पी हार्मोन) का लेवल गिरने लगता है। यह हार्मोन हमारे मूड को स्थिर और पॉजिटिव बनाए रखने में मदद करता है। इसके स्तर में गिरावट आने से लोग खुद को उदास, थका हुआ या चिड़चिड़ा महसूस करते हैं।

वहीं धूप की कमी के कारण शरीर में विटामिन D का लेवल भी कम होने लगता है, जिससे थकान, लो एनर्जी और इम्यूनिटी कमजोर जैसी समस्याएं सामने आती हैं। लगातार खराब मौसम सिर्फ मूड पर ही नहीं, बल्कि व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता, सामाजिक जुड़ाव और यहां तक कि निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

सवाल- मानसून ब्लूज और डिप्रेशन में क्या अंतर है?

जवाब- मानसून ब्लूज एक अस्थायी मानसिक स्थिति है, जो खासतौर पर बारिश और कम धूप वाले मौसम में होती है। इसमें व्यक्ति थोड़े समय के लिए थकान, उदासी, चिड़चिड़ापन या अकेलापन महसूस कर सकता है। ये लक्षण आमतौर पर कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं। वहीं डिप्रेशन एक क्लिनिकल मानसिक बीमारी है, जो लंबे समय तक चलती है।

सवाल- किन लोगों में मानसून ब्लूज होने की आशंका ज्यादा होती है?

जवाब- मानसून ब्लूज हर किसी को हो सकता है, लेकिन कुछ लोग इसके प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल-मानसून ब्लूज से बचने के लिए डेली रूटीन में क्या बदलाव कर सकते हैं?

जवाब- एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अखिलेंद्र कुमार सिंह बताते हैं कि मानसून ब्लूज से बचने के लिए जरूरी है कि आप अपने दिन की शुरुआत पॉजिटिव और एक्टिव तरीके से करें। इस मौसम में शरीर को रोशनी, मूवमेंट और सोशल कनेक्शन की ज्यादा जरूरत होती है। हल्का व्यायाम, पौष्टिक खाना और अपनों से बातचीत मूड को स्थिर और बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। साथ ही डिजिटल ओवरलोड से बचें और खुद को शांत और संतुलित रखने वाली एक्टिविटीज में समय बिताएं। नीचे ग्राफिक में कुछ पॉइंट्स दिए गए हैं, इन्हें आप फॉलो कर सकते हैं।

सवाल- बच्चों और टीनएजर्स में मानसून ब्लूज कैसे दिखता है?

जवाब- बच्चों और किशोरों (टीनएजर्स) में मानसून ब्लूज के लक्षण एडल्ट से थोड़े अलग हो सकते हैं। ये थकान, जरूरत से ज्यादा सोना, अचानक चिड़चिड़ापन या उदासी, पढ़ाई या पसंदीदा एक्टिविटीज में रुचि कम होना या बार-बार अकेला रहना चाहने जैसे बदलावों के रूप में दिख सकता है। टीनएजर्स में यह बदलाव ज्यादा स्क्रीन टाइम, सोशल मीडिया से दूरी या ज्यादा संवेदनशीलता के रूप में भी सामने आ सकता है।

पेरेंट्स को चाहिए कि वे उनके व्यवहार, नींद, भोजन और संवाद के तरीके में आने वाले छोटे-छोटे बदलावों पर ध्यान दें। समय रहते प्यार, बात और समझदारी से सहयोग करने से बच्चों को भावनात्मक स्थिरता मिलती है और वे इस मौसम को ज्यादा सहजता से पार कर पाते हैं।

सवाल- मानसून ब्लूज से बचाव के लिए डाइट का क्या रोल है?

जवाब- सही खानपान शरीर में सेरोटोनिन जैसे मूड-बूस्टिंग हार्मोन के लेवल को बनाए रखने में मदद करता है। इस मौसम में ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन D और ट्रिप्टोफैन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर चीजें खाना फायदेमंद होता है। ये दिमाग को शांत रखते हैं और मूड को बेहतर बनाते हैं। इसके लिए आप अपनी डाइट में मूंगफली, अंडा, दही, केला जैसी चीजें शामिल कर सकते हैं। साथ ही फ्रेश फल और हर्बल चाय भी खाना फायदेमंद है। ध्यान रहे कि प्रोसेस्ड, शुगर वाली और बहुत ऑयली चीजों से बचना चाहिए क्योंकि ये सुस्ती और लो एनर्जी को बढ़ा सकती हैं।

सवाल- अगर यह स्थिति दो हफ्तों से ज्यादा रहे तो क्या करें?

जवाब- अगर दो हफ्तों से ज्यादा समय से लगातार उदासी, थकान, मन का खालीपन या किसी भी काम में रुचि न लेने जैसी भावनाएं बनी हुई हैं तो इसे नजरअंदाज न करें। यह सिर्फ मानसून ब्लूज नहीं, बल्कि क्लिनिकल डिप्रेशन का संकेत भी हो सकता है। खासतौर पर जब नींद, भूख, व्यवहार या सोचने के तरीके में बड़ा बदलाव दिखाई देने लगे।

ऐसी स्थिति में तुरंत किसी मनोचिकित्सक या काउंसलर से संपर्क करना जरूरी है। समय रहते मदद लेना न सिर्फ सही फैसला होता है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक सेहत के लिए सबसे जरूरी कदम है।

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