15 घंटे पहलेलेखक: संदीप सिंह
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हममें से ज्यादातर लोग दांतों की सफेदी को ही उनकी सेहत और सफाई का पैमाना मानते हैं। जब कोई मुस्कुराते हुए चमकते सफेद दांत दिखाता है तो हमें लगता है कि उसके दांत बिल्कुल हेल्दी होंगे। लेकिन दांतों का रंग सच में उनकी मजबूती और साफ-सफाई को नहीं दर्शाता है। हल्के पीले दांत भी पूरी तरह स्वस्थ और मजबूत हो सकते हैं।
तो चलिए, जरूरत की खबर में आज बात करेंगे कि सफेद और पीले दांतों में क्या फर्क होता है? साथ ही जानेंगे कि-
- दांतों के पीले पड़ने का मुख्य कारण क्या है?
- क्या सफेद दांत ज्यादा हेल्दी होते हैं?
एक्सपर्ट: डॉ. पुनीत आहूजा, डेंटल-ओरल और मैक्सिलोफेशियल सर्जन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली
सवाल- दांत पीले या बदरंग क्यों हो जाते हैं?
जवाब- हमारे दांतों की सबसे बाहरी परत को इनैमल (Enamel) कहा जाता है। यह बहुत मजबूत होती है, लेकिन इसमें सूक्ष्म छिद्र (microscopic pores) होते हैं। जब हम चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक या शुगरी ड्रिंक्स पीते हैं तो इनके रंग और दाग इन छिद्रों में धीरे-धीरे जमा होने लगते हैं। यही कारण है कि समय के साथ दांतों का रंग फीका पड़ने लगता है और वे पीले या बदरंग दिखने लगते हैं। इसके अलावा कुछ अन्य वजहें भी हैं, इसे नीचे दिए ग्राफिक में देखिए-

आइए, इन पॉइंट्स को विस्तार से समझते हैं।
ठीक से ब्रश न करना
अगर आप दिन में दो बार सही तरीके से ब्रश और फ्लॉस नहीं करते हैं तो दांतों पर एक चिपचिपी परत (प्लाक) जम जाती है। समय के साथ यह परत सख्त होकर टार्टर बन जाती है। ये टार्टर खाने के रंग और बैक्टीरिया को पकड़ लेता है, जिससे दांत पीले हो जाते हैं।
चाय-कॉफी और शुगरी ड्रिंक्स
चाय, कॉफी, कोक, वाइन और कुछ स्पोर्ट्स ड्रिंक्स में आर्टिफिशियल कलर और एसिड होते हैं। ये धीरे-धीरे दांतों की ऊपरी परत में जमा हो जाते हैं और दांतों को पीला कर देते हैं। अगर लंबे समय तक इनका सेवन किया जाए और सफाई सही से न हो तो दाग पक्के हो जाते हैं।
धूम्रपान (स्मोकिंग)
सिगरेट और तंबाकू में निकोटीन होता है, जो दांतों पर पीले या भूरे दाग छोड़ता है। लंबे समय तक स्मोकिंग करने से ये दाग गहरे होते जाते हैं और दांतों की ऊपरी परत (इनैमल) के अंदर तक पहुंच सकते हैं।
उम्र और जेनेटिक्स कारण
कई बार दांतों का पीला रंग जेनेटिक होता है। अगर माता-पिता के दांत पीले हैं तो बच्चों के भी हो सकते हैं। इसके अलावा उम्र बढ़ने पर इनैमल घिसता है और नीचे की पीली परत (डेंटिन) ज्यादा दिखने लगती है।
कुछ दवाइयों का असर
कुछ एंटीबायोटिक दवाएं, जैसे टेट्रासाइक्लिन या ऑक्सिटेट्रासाइक्लिन बच्चों के दांत बनने के समय दी जाएं तो उनका रंग बदल सकता है। दांत ग्रे या पीले दिखाई देने लगते हैं।
चोट या एक्सीडेंट
अगर दांत या मुंह पर चोट लग जाए तो दांत की सतह टूट सकती है या अंदरूनी हिस्सा डैमेज हो सकता है। इससे दांत का रंग बदल सकता है।
सवाल- क्या पीले दांत, सफेद दांतों से ज्यादा हेल्दी होते हैं?
जवाब- डॉ. पुनीत आहूजा कहते हैं कि दांतों का रंग देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि दांत हेल्दी हैं या नहीं। असली बात ये है कि दांत मजबूत हैं या नहीं और आप मुंह की सफाई यानी ओरल हाइजीन का कितना ध्यान रखते हैं। इसे इन पॉइंटर्स से समझिए-
दांतों की मजबूती
अगर दांतों की ऊपर की परत यानी इनैमल सुरक्षित है तो हल्के पीले दांत भी उतने ही मजबूत होते हैं जितने सफेद दांत। कई बार बहुत सफेद दांत सिर्फ दिखने में अच्छे होते हैं, लेकिन उनके अंदर कैविटी या बैक्टीरिया हो सकते हैं।
सेंसिटिविटी (झनझनाहट)
हल्के पीले दांतों में आमतौर पर सेंसिटिविटी कम होती है। जब तक इनैमल घिसा न हो। दूसरी ओर बहुत सफेद दांत (खासतौर पर ब्लीच किए गए) का इनैमल पतला हो सकता है, जिससे ठंडा-गर्म लगना शुरू हो सकता है।
दाग-धब्बों की संभावना
अगर ओरल हाइजीन ठीक नहीं है तो पीले दांतों पर दाग जल्दी दिखने लगते हैं। हालांकि सफेद दांतों पर भी दाग हो सकते हैं, लेकिन शुरू में वे कम नजर आते हैं और बाद में साफ दिखने लगते हैं।
ट्रीटमेंट से सफेदी
ज्यादातर लोगों के दांत नेचुरली हल्के पीले होते हैं और यह सामान्य है। बहुत सफेद दांत आमतौर पर ब्लीचिंग या अन्य ट्रीटमेंट से सफेद किए जाते हैं, जो नेचुरल नहीं होते हैं। यह समय के साथ इनैमल को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

सवाल- क्या होम रेमेडीज से दांत सफेद करना सही है?
जवाब- घरेलू नुस्खे जैसे बेकिंग सोडा, नींबू का रस या एक्टिवेटेड चारकोल से दांतों को साफ और सफेद दिखाने की कोशिश की जाती है, लेकिन यह तरीका हमेशा सुरक्षित नहीं होता है। इन चीजों में तेज एसिड या खुरदुरे कण होते हैं, जो दांतों की ऊपरी परत यानी इनैमल को धीरे-धीरे घिस सकते हैं। ऐसे उपाय करते समय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
सवाल- क्या दांतों को हमेशा सफेद बनाए रखना संभव है?
जवाब- दांतों को बिल्कुल सफेद बनाए रखना नेचुरल रूप से हमेशा संभव नहीं होता है क्योंकि समय के साथ हमारा खान-पान, उम्र, लाइफस्टाइल और आदतें दांतों के रंग को प्रभावित करती हैं।
हालांकि अगर आप रोजाना अच्छी ओरल हाइजीन अपनाते हैं, जैसे सही तरीके से ब्रश करना, फ्लॉस करना, शुगरी ड्रिंक्स से बचना और समय-समय पर डेंटल क्लीनिंग करवाते हैं तो दांतों को लंबे समय तक साफ, स्वस्थ और चमकदार जरूर बनाए रखा जा सकता है।

सवाल- क्या दांत जितने ज्यादा सफेद होंगे, उतने ही साफ और हेल्दी माने जाएंगे?
जवाब- यह एक आम मिथक है। सफेद दांत हमेशा हेल्दी या साफ हों, यह जरूरी नहीं है। असल में, दांतों की स्वस्थता का पैमाना उनकी सफाई, मजबूती और मुंह की कुल हाइजीन से तय होता है, न कि सिर्फ रंग से। इसलिए जरूरी है कि हम केवल सफेदी के पीछे न भागें, बल्कि दांतों की सही देखभाल और सफाई पर ध्यान दें।

सवाल- क्या रेगुलर डेंटल क्लीनिंग जरूरी है?
जवाब- हां, रेगुलर डेंटल क्लीनिंग यानी समय-समय पर प्रोफेशनल तरीके से दांतों की सफाई कराना बहुत जरूरी है। इससे कई फायदे हैं। जैसेकि-
- दांतों और मसूड़ों की बीमारियों का खतरा कम होता है।
- सांस की बदबू से राहत मिलती है।
- दांत लंबे समय तक हेल्दी बने रहते हैं।
आमतौर पर हर 6 महीने में एक बार डेंटल क्लीनिंग कराना काफी होता है। अगर मसूड़ों की समस्या है या ओरल हेल्थ पहले से कमजोर है तो डॉक्टर की सलाह अनुसार यह अंतराल कम भी किया जा सकता है।
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