8 घंटे पहलेलेखक: संदीप सिंह
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देश में इन दिनों आवारा कुत्तों को लेकर बहस तेज है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि दिल्ली-NCR के सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर स्थायी रूप से शेल्टर होम में रखा जाए और उन्हें दोबारा सड़कों पर न छोड़ा जाए। यह आदेश रेबीज और कुत्तों के काटने की गंभीर स्थिति को देखते हुए दिया गया।
हालांकि कुत्ते काटने की घटनाएं सिर्फ सड़कों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि अपार्टमेंट्स और हाउसिंग सोसाइटीज के भीतर भी पालतू कुत्तों को लेकर अक्सर टकराव देखने को मिलते हैं। लिफ्ट, पार्क या बच्चों के प्ले एरिया में कुत्तों के काटने या डराने जैसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। कई बार इसी वजह से पालतू जानवर के मालिक और पड़ोसियों के बीच बहस या विवाद हो जाता है। ऐसे में अगर आप अपार्टमेंट या सोसाइटी में पालतू जानवर रखते हैं तो आपके और आपके पालतू जानवर के अधिकारों की जानकारी होना जरूरी है।
तो चलिए, जरूरत की खबर में बात करेंगे कि पालतू जानवरों को लेकर क्या नियम हैं? साथ ही जानेंगे कि-
- क्या सोसाइटी पालतू जानवर रखने से रोक सकती है?
- पालतू जानवर से हुई चोट या नुकसान की जिम्मेदारी किसकी होगी?
- पालतू जानवर रखने वालों के क्या-क्या कानूनी दायित्व हैं?
सवाल- क्या सोसाइटी पालतू जानवर रखने पर रोक लगा सकती है?
जवाब- कोई भी सोसाइटी आपको पालतू जानवर रखने से नहीं रोक सकती है। प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स एक्ट, 1960 और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) की गाइडलाइंस साफ कहती हैं कि पालतू रखना आपका अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने भी 2020 और 2022 के मामलों में (जैसे AWBI बनाम पीपल फॉर एलिमिनेशन ऑफ स्ट्रे ट्रबल्स) यह स्पष्ट किया है कि पालतू जानवर रखना संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के अंतर्गत आता है।
सवाल- क्या सोसाइटी पालतू कुत्ते को लिफ्ट, पार्क या बच्चों के प्ले एरिया में ले जाने से रोक सकती है?
जवाब- इस पर एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) की गाइडलाइंस और कोर्ट के फैसले बिल्कुल साफ हैं। सोसाइटी पालतू कुत्ते को लिफ्ट, पार्क या कॉमन एरिया में ले जाने से नहीं रोक सकती। हां, साफ-सफाई और सुरक्षा को लेकर सोसाइटी कुछ संगत नियम बना सकती है, जिनका पालन करना पालतू मालिक की जिम्मेदारी है। इसे नीचे दिए ग्राफिक में आसान भाषा में समझिए-

सवाल- पालतू जानवर के काटने या नुकसान पहुंचाने पर भरपाई कौन करेगा?
जवाब- अगर आपका पालतू कुत्ता किसी को काट ले, चोट पहुंचा दे या किसी की संपत्ति को नुकसान पहुंचाए तो उसकी कानूनी और आर्थिक जिम्मेदारी सीधे मालिक पर ही आती है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 291 के तहत, अगर मालिक अपने पालतू को नियंत्रित रखने या दूसरों की सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानी नहीं बरतता तो यह अपराध माना जाएगा।
इस स्थिति में अधिकतम 6 महीने की कैद, 5000 रुपए तक जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। इसके अलावा घायल व्यक्ति के इलाज का खर्च, मुआवजा और संपत्ति के नुकसान की भरपाई भी मालिक को ही करनी होती है, जिसे पीड़ित व्यक्ति सिविल केस के जरिए वसूल सकता है।

सवाल- क्या सोसाइटी पालतू जानवरों की संख्या या नस्ल पर प्रतिबंध लगा सकती है?
जवाब- सोसाइटी सीधे पालतू रखने पर पूरी तरह रोक नहीं लगा सकती है, लेकिन सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ सीमाएं तय कर सकती है। जैसेकि एक फ्लैट में कितने पालतू रखे जा सकते हैं या बहुत बड़ी और आक्रामक नस्लों को लेकर विशेष नियम बनाए जा सकते हैं। हालांकि ये नियम मनमाने नहीं होने चाहिए, बल्कि सभी निवासियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखकर बनाए जाने चाहिए।
सवाल- अगर सोसाइटी में पालतू कुत्ते पालते हैं तो मालिक को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
जवाब- पालतू कुत्ता पालना सिर्फ प्यार और शौक की बात नहीं है, बल्कि इसके साथ बड़ी जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। खासकर अगर आप अपार्टमेंट या हाउसिंग सोसाइटी में रहते हैं तो आपको अपने पालतू की देखभाल के साथ-साथ पड़ोसियों की सुरक्षा, साफ-सफाई और सुविधा का भी पूरा ध्यान रखना पड़ता है। यही जिम्मेदारी तय करती है कि आपके पालतू से किसी को परेशानी न हो और सोसाइटी में अच्छा माहौल बना रहे।

सवाल- पालतू कुत्ते का वैक्सिनेशन और हेल्थ रिकॉर्ड जरूरी क्यों है?
जवाब- ऐसा करना सिर्फ कुत्ते की सेहत के लिए ही नहीं, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए भी बेहद जरूरी है। रेबीज जैसी खतरनाक बीमारियों से बचाव के लिए हर साल वैक्सिनेशन कराना अनिवार्य है। इसके साथ ही नियमित हेल्थ चेकअप से कुत्ता स्वस्थ रहता है और दूसरों के लिए खतरा नहीं बनता। सोसाइटी के नियम और कानून भी यही कहते हैं कि पालतू कुत्ते का वैक्सिनेशन और मेडिकल रिकॉर्ड अपडेट रखना मालिक की जिम्मेदारी है।
सवाल- अगर सोसाइटी के किसी कुत्ते की वजह से आपको परेशानी होती है तो क्या करें?
जवाब- अगर किसी पालतू कुत्ते से आपको डर, चोट या असुविधा हो रही है तो सबसे पहले उसके मालिक से शांत तरीके से बात करें। अगर समस्या बनी रहती है तो सोसाइटी कमेटी को बताएं, ताकि वे नियम और सुरक्षा के उपाय कर सकें। अगर इसके बाद भी परेशानी दूर न हो तो आप कानूनी मदद ले सकते हैं।
सवाल- पालतू कुत्ते के लिए विशेष ट्रेनिंग की जरूरत क्यों है?
जवाब- पालतू कुत्ते को बेसिक ट्रेनिंग देना बहुत जरूरी है। इससे वह सोसाइटी में लोगों को डराता नहीं, बच्चों और दूसरे पालतू जानवरों के साथ सुरक्षित रहता है और अनचाही हरकतें नहीं करता है। सही ट्रेनिंग से कुत्ता आदेश मानना सीखता है, पट्टे पर चलना आसान होता है और मालिक को भी उसे संभालने में दिक्कत नहीं आती है।
सवाल- क्या पालतू कुत्ते के बीमार होने पर सोसाइटी में कोई रोक या नियम हैं?
जवाब- अगर पालतू कुत्ता बीमार या संक्रमित है तो नैतिक जिम्मेदारी यही कहती है कि उसे सोसाइटी के कॉमन एरिया जैसे लिफ्ट, पार्क या बच्चों के प्ले एरिया में न ले जाया जाए। ऐसा करना न सिर्फ पड़ोसियों और बच्चों की सेहत की सुरक्षा है, बल्कि अन्य पालतू जानवरों को भी बीमारी से बचाने का तरीका है।
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