9 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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बारिश का मौसम हमें गर्मी से राहत तो दिलाता है। लेकिन यह अपने साथ कई स्वास्थ्य समस्याएं भी लेकर आता है। इस मौसम में बढ़ी हुई नमी, गंदगी और तापमान में उतार-चढ़ाव की वजह से स्किन इन्फेक्शन, एलर्जी और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। सिर्फ इंसान ही नहीं, पालतू जानवरों में भी इन प्रॉब्लम्स का खतरा बढ़ जाता है।
यही नहीं, बारिश के दौरान गरजती आकाशीय बिजली और तेज हवाएं पालतू जानवरों में डर व बेचैनी भी पैदा कर सकती हैं। ऐसे में इस मौसम में उनके स्वास्थ्य और साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखना जरूरी हो जाता है।
हालांकि थोड़ी-सी सतर्कता और सही देखभाल से हम अपने पेट्स (पालतू जानवरों) को मानसून से जुड़ी समस्याओं से आसानी से बचा सकते हैं।
तो चलिए, आज ‘जरूरत की खबर’ में मानसून में पेट्स की देखभाल से जुड़ी जरूरी टिप्स के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- इस दौरान पेट्स को किस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है?
- बारिश में पेट्स के खाने-पीने को लेकर क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
एक्सपर्ट: डॉ. सरस्वती शुक्ला, पशु चिकित्साधिकारी, कैनाइन रेबीज कंट्रोल यूनिट, लखनऊ
आइए, सबसे पहले भारत में पालतू डॉग्स और कैट्स के आंकड़ों पर एक नजर डाल लेते हैं।

सवाल- मानसून में पेट्स में किस तरह की प्रॉब्लम्स का खतरा बढ़ जाता है?
जवाब- बारिश में बढ़ी हुई नमी और गंदगी के कारण पेट्स में स्किन इन्फेक्शन, एलर्जी, फंगल इन्फेक्शन और पाचन संबंधी समस्याएं आम हैं। इस दौरान वातावरण में मौजूद नमी टिक्स (Ticks) और पिस्सू (Fleas) के लिए अनुकूल माहौल बना देते हैं, जिससे ये तेजी से पनपने लगते हैं।
टिक्स पेट्स की स्किन से चिपककर उनका खून चूसते हैं और शरीर में खतरनाक बैक्टीरिया फैला सकते हैं। इससे उन्हें बुखार, सुस्ती और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं पिस्सू के काटने से पालतू जानवरों को तेज खुजली, स्किन रैशेज और गंभीर एलर्जिक रिएक्शन हो सकते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- बारिश के समय पेट्स में कौन से लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
जवाब- इस दौरान पेट्स की इम्यूनिटी कमजोर और स्किन की संवेदनशीलता बढ़ जाती है, जिससे वे बीमारियों की चपेट में जल्दी आ सकते हैं। इसलिए बारिश में पेट्स में कुछ लक्षणों को बिल्कुल भी हल्के में न लें। जैसेकि-
- लगातार सुस्ती या थकावट महसूस करना।
- स्किन पर लाल चकत्ते, फंगल पैच या बाल झड़ना।
- लगातार खुजली या खुद को चाटते रहना।
- बुखार या शरीर का असामान्य रूप से गर्म लगना।
- कानों से दुर्गंध आना या सिर बार-बार हिलाना।
- आंखों में पानी आना या आंखें लाल होना।
- भूख कम हो जाना या खाना-पीना पूरी तरह छोड़ देना।
- पाचन संबंधी समस्याएं जैसे उल्टी या दस्त होना।
- पंजों या शरीर के किसी हिस्से में सूजन या दर्द होना।
- सांस लेने में परेशानी या लगातार खांसी आना।
अगर पेट्स में ये लक्षण दिखें तो बिना देर किए वेटरनरी डॉक्टर से संपर्क करें।
सवाल- बारिश के मौसम में पेट्स की सेहत का कैसे ध्यान रखें?
जवाब- कुछ आसान, लेकिन जरूरी सावधानियां अपनाकर आप अपने पेट्स को सुरक्षित और स्वस्थ रख सकते हैं। इसके लिए नीचे ग्राफिक में दिए गए टिप्स को फॉलो करें।

आइए, अब ऊपर दिए कुछ पॉइंट्स के बारे में विस्तार से बात करते हैं।
सूखी और साफ जगह पर सुलाएं
मानसून में पेट्स की सोने की जगह रोजाना साफ करें। गीला बिस्तर या गद्दा तुरंत बदलें। कोशिश करें कि उनका आराम करने का स्थान हवादार और सूखा हो।
टिक्स और पिस्सू से बचाव करें
टिक्स, पिस्सू से बचने के लिए पेट्स की स्किन और बालों में रोजाना ब्रश करें। अगर खुजली, सूजन या चकत्ते दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
कानों की सफाई न भूलें
खासकर लॉन्ग ईयर्ड डॉग्स में बरसात में कानों में नमी जमने से बैक्टीरियल या फंगल इन्फेक्शन का खतरा रहता है। ऐसे में हर 7-10 दिन में डॉक्टर द्वारा बताए गए सॉफ्ट ईयर क्लीनर से सफाई करें। अगर दुर्गंध, खुजली या पपड़ी नजर आए तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
पैरों की सफाई जरूरी
बारिश के बाद कीचड़ और गंदा पानी पेट्स के पंजों में फंस सकता है, जिससे इन्फेक्शन हो सकता है। इसलिए हर वॉक के बाद गुनगुने पानी से पैरों को धोकर सूखे तौलिए से अच्छे से सुखाएं। पैड्स और पंजों के बीच की जगह को भी ध्यान से साफ करें।
भीगने पर तुरंत सुखाएं
अगर पेट बारिश में भीग जाए तो उसे तुरंत तौलिए से पोंछें। उसके बाद ड्रायर (लो हीट मोड पर) से सुखाएं या गर्म सूखे कंबल में लपेटें। नमी में लंबे समय तक रहने से ठंड लग सकती है, जिससे उन्हें जुकाम या स्किन प्रॉब्लम हो सकती है।
फर्श को सूखा और सुरक्षित रखें
गीले फर्श पर पेट्स फिसल सकते हैं, जिससे उन्हें चोट लग सकती है। इसलिए फर्श को सूखा रखें। अगर जरूरी हो तो मैट या कारपेट बिछाएं।
समय-समय पर वैक्सीनेशन और डिवॉर्मिंग कराएं
मानसून में वायरस और बैक्टीरिया ज्यादा एक्टिव होते हैं। पेट्स को सामान्य बीमारियों से बचाने के लिए समय पर टीकाकरण कराएं। साथ ही पेट्स को हर 3 महीने में डिवॉर्मिंग कराना भी जरूरी है, जिससे उनके पेट में कीड़े न पनपें।
इनडोर गेम्स से उन्हें एक्टिव रखें
बारिश के कारण पेट्स बाहर खेलने नहीं जा पाते, जिससे उनका मूड डाउन हो सकता है। उन्हें घर में इंटरैक्टिव टॉयज, फूड पजल्स या हल्की दौड़ जैसी एक्टिविटीज में व्यस्त रखें। इससे न सिर्फ उनका शरीर एक्टिव रहेगा, बल्कि बोरियत भी नहीं होगी।

सवाल- बारिश में पेट्स के खाने-पीने को लेकर क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
जवाब- सही डाइट और साफ पानी न मिलने पर पेट्स जल्दी बीमार पड़ सकते हैं। ऐसे में बारिश के मौसम में पालतू जानवरों के खाने-पीने को लेकर खास सतर्कता जरूरी है। जैसेकि-
- मानसून में हल्का, आसानी से पचने वाला और पोषणयुक्त खाना दें। बासी या खुले में रखा खाना बिल्कुल न दें।
- खाने-पानी के बर्तन रोज गर्म पानी से धोकर अच्छी तरह सुखाएं। गंदे बर्तनों से बैक्टीरिया फैल सकते हैं।
- फिल्टर्ड या उबला हुआ पानी ही पिलाएं और दिन में 2–3 बार पानी बदलें।
- डाइट में ओमेगा-3, फाइबर और जरूरी पोषक तत्व शामिल करें ताकि उसकी स्किन हेल्दी और इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग रहे।
- हर पेट की जरूरत अलग होती है, इसलिए डॉक्टर की सलाह से मानसून स्पेशल डाइट तय करें।
सवाल- क्या मानसून में पेट्स को रोज नहलाना चाहिए?
जवाब- डॉ. सरस्वती शुक्ला बताती हैं कि रोज नहलाना तो जरूरी नहीं है। लेकिन हफ्ते में कम-से-कम एक या दो बार एंटी-फंगल शैम्पू से नहलाएं और बाकी दिन वाइप्स या ड्राई बाथ से सफाई करें।
सवाल- क्या मानसून में पेट्स को हेयरकट करवाना चाहिए?
जवाब- हां, लॉन्ग हेयर पेट्स के लिए ट्रिमिंग फायदेमंद होती है ताकि नमी जमा न हो और टिक्स-पिस्सू से बचाव हो।
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