12 घंटे पहले
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बीते दिनों सोशल मीडिया पर एक हैरान करने वाला वीडियो वायरल हुआ। इस वीडियो में पुणे की रहने वाली एक महिला, जो खुद को ‘मेडिसिन फ्री लाइफ कोच’ बताती हैं, वह अपनी आंखों को अपने ही यूरिन से धोती नजर आ रही हैं। उनका दावा है कि यह प्रक्रिया आंखों के ड्राइनेस, जलन और रेडनेस जैसी समस्याओं से राहत दिलाती है।
आंखें शरीर का सबसे नाजुक और सेंसिटिव अंग हैं। सोशल मीडिया पर फैले इस तरह के मिथकों के चलते कई लोग बिना सोचे-समझे एक्सपेरिमेंट करने लगते हैं, जो भविष्य में उनकी आंखों की रोशनी तक छीन सकता है। मेडिकल एक्सपर्ट्स इस तरह के सोशल मीडिया ट्रेंड को न केवल बेबुनियाद, बल्कि आंखों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक मानते हैं।
इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में हम बात करेंगे आंखों की देखभाल से जुड़े कुछ आम मिथकों की। साथ ही जानेंगे कि-
- आंखों की सुरक्षा के लिए किन बातों का ध्यान रखें?
- आंखों को लेकर किस तरह के एक्सपेरिमेंट नहीं करने चाहिए?
एक्सपर्ट:
डॉ. नीरज मनचंदा, सीनियर कंसल्टेंट, ऑफ्थल्मोलॉजी, सर गंगाराम अस्पताल, दिल्ली
सवाल- यूरिन से आंखें धोना कितना सही है?
जवाब- यूरिन में बैक्टीरिया, गंदगी और शरीर के अपशिष्ट पदार्थ होते हैं। ये आंखों जैसे नाजुक अंग के लिए बेहद खतरनाक हो सकते हैं।
आंखों को धोने के लिए जो पानी या दवा इस्तेमाल होती है, उसका pH संतुलित (7.4 के आसपास) होता है, ताकि आंखों को कोई नुकसान न हो। लेकिन यूरिन अम्लीय होता है, जो आंखों में जलन, सूजन और यहां तक कि नजर कमजोर करने का कारण बन सकता है। यूरिन बिल्कुल भी साफ नहीं होता, इसलिए इसे आंखों में डालना खतरनाक और पूरी तरह गलत है।

सवाल- लोग सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले घरेलू नुस्खों पर जल्दी भरोसा क्यों कर लेते हैं? जवाब- लोग अक्सर बिना खर्च और बिना दवा के जल्दी ठीक होने के तरीके ढूंढ़ते हैं। जब कोई नुस्खा नेचुरल, घरेलू या फौरन असरदार बताया जाता है, तो वे उसे आजमाने में देर नहीं लगाते हैं। साथ ही किसी वीडियो में आत्मविश्वास से बोले गए शब्द, शांत बैकग्राउंड, देसी लहजा और ‘before-after’ का दावा लोगों को यकीन दिला देता है कि यह सच होगा। इसके अलावा जब कोई स्वास्थ्य समस्या होती है और जानकारी कम होती है तो लोग जल्दी प्रभावित हो जाते हैं। खासकर जब दावा करने वाला खुद को ‘लाइफ कोच’, ‘एक्सपर्ट’ होने का दावा करता है।

सवाल- आंखों की देखभाल को लेकर किस तरह की गलतियां नहीं करनी चाहिए?
जवाब- आंखों को लेकर एक छोटी सी लापरवाही भी सेहत पर गहरा असर डाल सकती है। इससे कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। कई बार फर्जी एक्सपर्ट के बताए नुस्खों के कारण आंखों को स्थायी नुकसान भी हो सकता है। इसलिए आंखों की देखभाल को लेकर कुछ विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए। इसे नीचे दिए ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या आंखों में शहद या नींबू डालना सही है?
जवाब- डॉ. नीरज मनचंदा बताते हैं कि शहद और नींबू में एसिड और शुगर कंटेंट होता है, जो आंखों की नाजुक सतह को जला सकता है और इन्फेक्शन का कारण बन सकता है। नींबू का रस आंखों में जाने से तेज जलन, रेडनेस और कॉर्निया डैमेज हो सकता है। यह दावा कि इससे आंखों की रोशनी बढ़ती है, पूरी तरह से झूठ है।
सवाल- क्या गुलाब जल को आंखों में रोजाना डालना सेफ है?
जवाब- बाजार में मिलने वाला ज्यादातर गुलाब जल चेहरे और स्किन के लिए तैयार किए जाते हैं। इसमें प्रिजर्वेटिव्स, खुशबू और केमिकल मिले होते हैं, जो आंखों के लिए हानिकारक हो सकते हैं। ऐसा गुलाब जल आंखों में डालने से जलन, खुजली, एलर्जी या इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है।
सवाल- क्या मोबाइल स्क्रीन को ब्लू लाइट सेफ्टी ग्लास से देखने से आंखें पूरी तरह सुरक्षित रहती हैं?
जवाब- ब्लू लाइट फिल्टर या ग्लास कुछ हद तक आंखों की थकान कम कर सकते हैं, लेकिन स्क्रीन का लगातार इस्तेमाल आंखों में ड्राइनेस और तनाव पैदा करता है। मोबाइल, लैपटॉप या टीवी स्क्रीन को लगातार देखने से आंखों में ड्राइनेस (सूखापन), तनाव और कभी-कभी धुंधला दिखाई देना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इससे बचने के लिए 20-20-20 रूल अपनाना बहुत जरूरी है। यानी हर 20 मिनट में कम से कम 20 फीट दूर किसी चीज को 20 सेकेंड तक देखें। साथ ही स्क्रीन ब्राइटनेस कम रखना, आंखों को समय-समय पर झपकाना और पर्याप्त नींद लेना भी आंखों की सेहत के लिए जरूरी है।
सवाल- आंखों में चाय की पत्ती या ग्रीन टी लगाना फायदेमंद है?
जवाब- आंखों में चाय की पत्ती या ग्रीन टी लगाना एक आम घरेलू नुस्खा माना जाता है, लेकिन यह एक खतरनाक मिथक है। चाय या ग्रीन टी में मौजूद कैफीन और टैनिन जैसे तत्व आंखों की नाजुक स्किन और सतह के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। इसलिए आंखों की किसी भी समस्या के लिए नेत्र विशेषज्ञ की राय लेना सबसे सुरक्षित उपाय है।
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