जानें अपने अधिकार- डॉक्टर इलाज में करे लापरवाही:  तो क्या हैं आपके कानूनी अधिकार, जानें जरूरी नियम, कहां और कैसे करें शिकायत
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जानें अपने अधिकार- डॉक्टर इलाज में करे लापरवाही: तो क्या हैं आपके कानूनी अधिकार, जानें जरूरी नियम, कहां और कैसे करें शिकायत

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10 घंटे पहलेलेखक: संदीप सिंह

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समाज में मेडिकल क्षेत्र से जुडे लोगों को बेहद सम्मान से देखा जाता है। अस्पताल जाने वाले हर शख्स को भरोसा होता है कि उसे सही इलाज मिलेगा, सही दवा दी जाएगी और उसकी सेहत की पूरी जिम्मेदारी ली जाएगी।

लेकिन जब यही भरोसा टूटता है तो नतीजे खतरनाक हो सकते हैं। कई बार गलत इलाज, ऑपरेशन में चूक, समय पर सही टेस्ट न होना या जरूरी ध्यान न देने की वजह से मरीजों की जान तक चली जाती है। भारत में हर साल हजारों लोग इसका शिकार होते हैं। ये लापरवाही सिर्फ एक गलती नहीं, बल्कि एक गंभीर अपराध है।

ऐसे मामलों में सिर्फ अफसोस करना काफी नहीं है। भारतीय कानून आपके साथ है। इलाज में लापरवाही को ‘मेडिकल नेग्लिजेंस’ कहा जाता है। इसके लिए मरीजों को इंसाफ मांगने, मुआवजा पाने और गलती करने वाले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का अधिकार है।

तो चलिए, आज जानें अपने अधिकार कॉलम में हम बात करेंगे कि मेडिकल नेग्लिजेंस क्या है? साथ ही जानेंगे कि-

  • इसका शिकार होने पर क्या अधिकार हैं?
  • इसके लिए कहां और कैसे शिकायत करें?
  • कौन से सबूत केस मजबूत कर सकते हैं?

एक्सपर्ट: सरोज कुमार सिंह, एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट

सवाल- मेडिकल नेग्लिजेंस क्या है?

जवाब- भारतीय कानून के मुताबिक, डॉक्टर की ये जिम्मेदारी है कि वो मरीज का इलाज पूरी समझदारी और ईमानदारी से करें। इसे ‘ड्यूटी ऑफ केयर’ कहते हैं। अगर डॉक्टर इस जिम्मेदारी को ठीक से नहीं निभाता है तो वह कानूनी रूप से गलत माना जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने ‘जैकब मैथ्यू बनाम पंजाब राज्य (2005)’ के केस में साफ कहा है कि अगर कोई डॉक्टर ऐसा कुछ करता है, जो कोई जिम्मेदार डॉक्टर कभी न करता या कोई जरूरी इलाज का कदम उठाने से चूक जाता है तो इसे इलाज में लापरवाही माना जाएगा।

सवाल- मेडिकल नेग्लिजेंस के मामले में मरीज के क्या अधिकार हैं?

जवाब- इस मामले में मरीज के पास कई कानूनी अधिकार हैं, जिनका उल्लंघन होने पर वह न्याय और मुआवजे के लिए कदम उठा सकता है। ये अधिकार मरीज को ‘कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट’, ‘इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट’ और ‘लीगल सर्विसेज अथॉरिटी एक्ट’ जैसे कानूनों के तहत मिले हैं। इन अधिकारों के माध्यम से मरीज इलाज में हुई लापरवाही के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। इन्हें नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- मेडिकल नेग्लिजेंस का शिकार होने पर कहां और कैसे शिकायत कर सकते हैं?

जवाब- अगर आपको लगता है कि आपके या आपके परिजन के इलाज में डॉक्टर या अस्पताल की ओर से लापरवाही हुई है तो सबसे पहले अस्पताल प्रबंधन से संपर्क करें। आप अस्पताल के शिकायत निवारण प्राधिकरण के पास अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं, जिससे वे मामले की जांच कर सकें और समाधान की कोशिश कर सकें। इसके अलावा यह उपाय भी अपना सकते हैं।

ग्राफिक में दिए इन पॉइंट्स को विस्तार से समझते हैं।

स्थानीय मेडिकल काउंसिल में शिकायत करें

हर राज्य में एक मेडिकल काउंसिल होती है, जैसे दिल्ली मेडिकल काउंसिल या मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल। आप यहां अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। ये काउंसिल डॉक्टरों और अस्पतालों की लापरवाही की जांच करती हैं।

न्याय न मिलने पर NMC मे शिकायत करें

अगर राज्य स्तर पर आपकी शिकायत का समाधान नहीं होता तो आप राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) में शिकायत कर सकते हैं। NMC डॉक्टरों और अस्पतालों की निगरानी करती है। साथ ही जरूरत पड़ने पर मामले की जांच भी करती है।

कोर्ट से न्याय की अपील का अधिकार

अगर आपको लगता है कि मेडिकल सर्विस में लापरवाही के कारण आपको नुकसान हुआ है तो आप कंज्यूमर कोर्ट या कंज्यूमर फोरम में शिकायत कर सकते हैं। यह कोर्ट उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करती है। साथ ही मेडिकल नेग्लिजेंस के मामलों में मुआवजा भी दे सकती है।

पुलिस से शिकायत करें

अगर मेडिकल नेग्लिजेंस के कारण जान का खतरा हुआ है, सेहत बिगड़ी है या मरीज की मौत हो गई है तो आप पुलिस में शिकायत कर सकते हैं। पुलिस ऐसे मामलों की जांच कर सकती है।

सवाल- इलाज में लापरवाही की शिकायत के लिए कौन-कौन से सबूत जरूरी हैं?

जवाब- इलाज में लापरवाही की शिकायत के लिए सबूत महत्वपूर्ण होते हैं। जैसेकि-

  • मेडिकल रिकॉर्ड्स जैसे कि अस्पताल के बिल, पर्चे, ऑपरेशन रिपोर्ट्स, डिस्चार्ज सर्टिफिकेट आदि।
  • डॉक्टरों की लापरवाही के साक्ष्य जैसे कि ऑपरेशन के दौरान कोई वस्तु शरीर में छोड़ देना या इलाज में देरी।
  • वैकल्पिक डॉक्टरों की राय अगर संभव हो तो अन्य डॉक्टरों से प्राप्त राय, जो लापरवाही की पुष्टि करती हो।
  • गवाहों के बयान, जिन्होंने घटना को देखा या सुना हो।
  • अगर पुलिस ने मामला दर्ज किया है तो उसकी रिपोर्ट।
  • आर्थिक और मानसिक नुकसान के प्रमाण जैसे कि अतिरिक्त इलाज के खर्चे और मेंटल स्ट्रेस के साक्ष्य।

सवाल- मुफ्त कानूनी सहायता कब और कैसे मिल सकती है?

जवाब- भारत में कई तरीके से मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त की जा सकती है। जैसेकि-

  • राष्ट्रीय और राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA/SLSA) इन संस्थाओं के माध्यम से मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त की जा सकती है।
  • ऑनलाइन आवेदन राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।
  • स्थानीय कानूनी सेवा प्राधिकरण अपने जिले के कानूनी सेवा प्राधिकरण कार्यालय में जाकर भी आवेदन किया जा सकता है।
  • आर्थिक स्थिति से कमजोर, महिला, अनुसूचित जाति/जनजाति, मानसिक रूप से पीड़ित व्यक्ति आदि मुफ्त कानूनी सहायता के पात्र होते हैं।

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