7 घंटे पहलेलेखक: संदीप सिंह
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2011 की जनगणना के मुताबिक भारत में करीब 2.68 करोड़ लोग दिव्यांगता के साथ जीवन जी रहे हैं। यह संख्या ऑस्ट्रेलिया की कुल जनसंख्या से भी अधिक है। लेकिन इतनी बड़ी आबादी को अक्सर समाज में उपेक्षित या सहानुभूति की नजरों से देखा जाता है, जबकि इनका असल हक है समान अवसर, कानूनी अधिकार और गरिमामय जीवन।
दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा और सशक्तिकरण के लिए भारत सरकार ने कई कानून, योजनाएं और रियायतें तय की हैं, जिनके बारे में जानना हर दिव्यांग और उनके परिवार के लिए अहम है।
तो चलिए, ‘जानें अपने अधिकार’ कॉलम में आज बात दिव्यांगजनों और उनके कानूनी अधिकारों के बारे में। साथ ही जानेंगे कि-
- दिव्यांगजन सरकारी योजनाओं का लाभ कैसे लें?
- भेदभाव की शिकायत कहां करें?
एक्सपर्ट: सरोज कुमार सिंह, अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट
सवाल- भारत में दिव्यांगता की कानूनी परिभाषा क्या है?
जवाब- दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act, 2016) के मुताबिक, कोई व्यक्ति जो किसी शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक या इंद्रिय संबंधी अक्षमता से प्रभावित है और जिसका असर उसकी रोजमर्रा की गतिविधियों या समाज में भागीदारी पर पड़ता हो, उसे दिव्यांग (PwD) माना जाता है।

सवाल- सरकार कितने प्रकार की दिव्यांगता को मान्यता देती है?
जवाब- पहले दिव्यांगता का मतलब सिर्फ शरीर की किसी कमजोरी या कमी से जोड़ा जाता था। जैसे कोई ठीक से चल नहीं सकता है, सुन या देख नहीं सकता है, लेकिन अब सोच बदली है। जैसे-जैसे लोगों को मानसिक, बौद्धिक और अंदरूनी बीमारियों की जानकारी बढ़ी, भारत सरकार ने भी दिव्यांगता की परिभाषा को बड़ा किया है। 1995 के कानून में केवल 7 तरह की दिव्यांगता मानी जाती थी। लेकिन 2016 में बने नए कानून दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPwD Act, 2016) के तहत अब कुल 21 तरह की दिव्यांगता को मान्यता दी जाती है। इसमें मानसिक, न्यूरोलॉजिकल (नसों से जुड़ी), खून की बीमारियां और ऑटिज्म जैसी स्थितियां भी शामिल हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से देखिए-

सवाल- दिव्यांगजन सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का फायदा कैसे ले सकते हैं?
जवाब- इसके लिए सबसे जरूरी है कि दिव्यांग व्यक्ति के पास यूनीक डिजेबिलिटी आइडेंटिफिकेशन (UDID) होना चाहिए। यह एक सरकारी पहचान पत्र है, जो यह साबित करता है कि व्यक्ति दिव्यांग है। इस कार्ड के बिना सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ मिलना मुश्किल होता है। UDID कार्ड बनवाने के लिए अपने जिले के सरकारी दफ्तर या ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

सवाल- दिव्यांगजनों को कौन-कौन सी योजनाओं और रियायतों का लाभ मिलता है?
जवाब- दिव्यांगजनों के लिए सरकार ने अनेक योजनाएं और रियायतें बनायी हैं ताकि वे सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकें और समाज के मुख्यधारा में पूरी तरह शामिल हो सकें। इन योजनाओं का मकसद दिव्यांगजनों को समान अवसर देना, उनकी जीवन गुणवत्ता बेहतर बनाना और उन्हें विशेष सहायता प्रदान करना है।
इन योजनाओं में वित्तीय सहायता, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा में छात्रवृत्ति, रोजगार में आरक्षण, पेंशन, आवासीय सुविधा, यात्रा में छूट, और पुनर्वास जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

सवाल- दिव्यांगों को शिक्षा और नौकरी में क्या अधिकार मिलते हैं?
जवाब- 6 से 18 साल के दिव्यांग बच्चों को नि:शुल्क अनिवार्य शिक्षा का अधिकार है। सरकारी नौकरियों में 4% आरक्षण, उच्च शिक्षा संस्थानों में भी आरक्षित सीटों का प्रावधान है। बेंचमार्क दिव्यांगता (40% या उससे अधिक) वाले व्यक्तियों को ही आरक्षण और सुविधाएं मिलती हैं।
सवाल- क्या दिव्यांग व्यक्तियों को सामान्य नागरिक अधिकार मिलते हैं?
जवाब- हां, दिव्यांग व्यक्तियों को संविधान के तहत सामान्य नागरिकों के समान सभी अधिकार प्राप्त हैं। उन्हें वोट देने, चुनाव लड़ने, संपत्ति रखने, शादी करने और न्याय पाने का पूरा अधिकार है। इसके अलावा दिव्यांगजनों को भेदभाव से बचाने के लिए कानून में सख्त प्रावधान भी हैं ताकि वे बिना किसी रोक-टोक के अपने जीवन के हर क्षेत्र में सक्रिय और सम्मानित भागीदार बन सकें। इसलिए दिव्यांगजन सिर्फ सहानुभूति के पात्र नहीं हैं, बल्कि वे समाज के पूर्ण सदस्य हैं, जिनके अधिकार और स्वतंत्रता समान रूप से सुरक्षित हैं।
सवाल- अगर किसी दिव्यांग के साथ भेदभाव हो तो शिकायत कहां करें?
जवाब- अगर किसी दिव्यांग के साथ स्कूल में, ऑफिस में या किसी सरकारी सेवा में भेदभाव होता है। तो वह इसकी शिकायत कर सकता है। शिकायत करने के लिए ये रास्ते हैं:
अगर किसी दिव्यांग व्यक्ति के साथ भेदभाव या अन्याय होता है तो वे हिम्मत करें और तुरंत शिकायत करें। शिकायत करने के कई रास्ते हैंः

इन्हें इन पॉइंट्स से समझिए-
राष्ट्रीय और राज्य दिव्यांगजन आयोग
देश में दिव्यांगों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर आयोग बनाए गए हैं। ये आयोग भेदभाव के मामलों की जांच करते हैं और जरूरी कदम उठाते हैं। आप सीधे इन आयोगों से संपर्क कर सकते हैं।
जिला स्तर के अधिकारी
हर जिले में दिव्यांग कल्याण अधिकारी या समन्वयक होते हैं, जिनसे शिकायत की जा सकती है। ये अधिकारी स्थानीय स्तर पर आपकी मदद करेंगे।
विशेष अदालतें
Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 के तहत हर जिले में विशेष अदालतें बनी हैं, जहां दिव्यांगता से जुड़े मामले जल्दी निपटाए जाते हैं। भेदभाव की शिकायत यहां भी दर्ज की जा सकती है।
पुलिस और न्यायालय
अगर भेदभाव गंभीर हो तो पुलिस में शिकायत करें या सामान्य अदालत में कानूनी कार्रवाई कराएं।
NGO और सामाजिक संस्थाएं
कुछ गैर-सरकारी संगठन भी दिव्यांगों को मदद देते हैं, शिकायत दर्ज करने में सहयोग करते हैं और कानूनी सलाह देते हैं।
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