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जियो पंप पर 50 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं मिलेगा: तेल कंपनियों को पेट्रोल पर ₹8 और डीजल पर ₹9 का घाटा, कच्चा तेल 100 डॉलर पार

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8 घंटे पहले

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जियो और नायरा ने अपने पंपों पर डीजल की लिमिट तय की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जियो के पंप पर 50 लीटर और नायरा के पंप पर 70 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं दिया जा रहा है।

मिडिल ईस्ट में एक बार फिर जंग और तनाव के चलते कच्चा तेल 110 डॉलर के पार पहुंच गया है। इससे पेट्रोलियम कंपनियों को पेट्रोल पर 8 रुपए और डीजल पर 9 रुपए का घाटा हो रहा है।

हालांकि, देश के 90% से ज्यादा पेट्रोल पंप चलाने वाली सरकारी कंपनियों- इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के पंपों पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं है।

सवाल-जवाब में पूरा मामला समझें…

सवाल 1: जियो-बीपी और नयारा पंपों पर कितनी लिमिट लगी?

  • जियो-बीपी: कई पंपों पर एक बार में एक गाड़ी को सिर्फ 50 लीटर तक ही डीजल दिया जा रहा है। कुछ पंपों पर पूरे दिन में 6000 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं बेचने का नियम बना दिया गया है।
  • नयारा एनर्जी: इस कंपनी के पेट्रोल पंपों पर एक बार में 70 से 200 लीटर तक ही डीजल दिया जा रहा है।

सवाल 2: लंबी दूरी के ट्रकों और लॉजिस्टिक्स पर कितना असर पड़ेगा?

सरकारी पंपों पर पूरा तेल मिलने के बावजूद लंबी दूरी तय करने वाले बड़े ट्रकों और माल ढोने वाली गाड़ियों को दिक्कत हो सकती है।

खासकर गांव-देहात या हाईवे के ऐसे इलाकों में जहां पेट्रोल पंप दूर-दूर होते हैं, वहां चालकों को एक साथ ज्यादा डीजल नहीं मिल पाएगा, जिससे उनकी यात्रा अटक सकती है।

सवाल 3: क्रूड ऑयल कितना महंगा हुआ?

ब्रेंट क्रूड की कीमत 21 सितंबर को 117.4 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। जबकि इस साल इसकी एवरेज कीमत करीब 66 डॉलर प्रति बैरल थी। यानी कच्चे तेल के दाम लगभग दोगुने हो चुके हैं।

सवाल 4: पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे?

भले ही कंपनियों को कच्चा तेल बहुत महंगा मिल रहा है, लेकिन देश में आम जनता के लिए पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं।

यदि इसकी कीमतें लंबे समय तक 110-120 डॉलर के बीच बनी रहती हैं, तो सरकारी तेल कंपनियों के घाटे की भरपाई के लिए रिटेल कीमतों में बदलाव किया जा सकता है।

सवाल 5: कंपनियों को कितना नुकसान?

दाम न बढ़ाने की वजह से तेल कंपनियां खुद यह घाटा उठा रही हैं। रेटिंग एजेंसी इक्रा के मुताबिक, कंपनियों को डीजल बेचने पर करीब 9 रुपए लीटर और पेट्रोल बेचने पर 8 रुपए लीटर का सीधा घाटा हो रहा है। इसी घाटे से बचने के लिए प्राइवेट कंपनियां डीजल कम बेच रही हैं।

एजेंसी के अनुसार, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल को रोजाना कुल 530 करोड़ रुपए का नुकसान झेलना पड़ रहा है।

सवाल 6: डीजल की किल्लत क्यों बढ़ी?

डीजल की किल्लत सिर्फ कच्चे तेल के दाम बढ़ने की वजह से नहीं, बल्कि सऊदी अरब से आने वाले तेल टेंकरों के रास्ते में रुकने से हुई है।

सऊदी अरब की कंपनी ‘साउदी अरामको’ की पाइपलाइन पर हमले के बाद उसने भारत को कच्चा तेल भेजना भी बंद कर दिया है। इससे भारतीय तेल कंपनियों को दूसरी जगहों से महंगा तेल खरीदना पड़ रहा है।

हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि देश में डीजल खत्म नहीं हुआ है। घाटे से बचने के लिए सिर्फ कुछ प्राइवेट कंपनियों ने थोड़े समय के लिए कम डीजल बेचने का यह फैसला लिया है।

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