ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा 30 और 31 मई को:  व्रत की पूर्णिमा 30 को और स्नान-दान की पूर्णिमा 31 को, भगवान विष्णु के साथ करें चंद्र देव की पूजा
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ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा 30 और 31 मई को: व्रत की पूर्णिमा 30 को और स्नान-दान की पूर्णिमा 31 को, भगवान विष्णु के साथ करें चंद्र देव की पूजा

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5 घंटे पहले

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अभी ज्येष्ठ अधिक मास चल रहा है, इस महीने की पूर्णिमा 30 और 31 मई, दो दिन है। अधिक मास करीब 3 साल में एक बार आता है, इसलिए इस पूर्णिमा का महत्व काफी अधिक है। 30 तारीख की दोपहर करीब 12 बजे ये तिथि शुरू होगी, इस दिन व्रत किया जा सकता है और अगले दिन 31 की दोपहर करीब 2.15 बजे तक रहेगी, इस दिन सुबह-सुबह नदी स्नान कर सकते हैं।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, ज्येष्ठ पूर्णिमा पर स्नान-दान, व्रत, भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। भक्त को मानसिक शांति मिलती है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं।

भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की करें पूजा

  • घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। कलश स्थापित करें।
  • रोली, चावल, हार-फूल, तुलसी, पंचामृत अर्पित करें।
  • घी का दीपक और धूप जलाएं।
  • विष्णु मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करें। आरती करें।
  • प्रसाद बांटें और खुद भी लें। पूजा के बाद दान-पुण्य करें।

सूर्य पूजा से करें दिन की शुरुआत

पूर्णिमा की सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य चढ़ाएं। तांबे के लोटे में जल भरें, जल में कुमकुम, चावल, फूल डालें और फिर सूर्य को जल चढ़ाएं। ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करें।

पूर्णिमा पर करें ये शुभ काम

  • अधिक मास और पूर्णिमा तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा खासतौर पर की जाती है। इस महीने की पूर्णिमा पर किए गए जप, तप, दान और पूजा का कई गुना बढ़कर मिलता है। ऐसी मान्यता है।
  • पूर्णिमा पर गंगा, यमुना, शिप्रा, नर्मदा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। अगर नदी स्नान करना संभव न हो, तो घर पर ही पानी गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। स्नान कर सकते समय सभी तीर्थों का और नदियों का ध्यान करना चाहिए।
  • पूर्णिमा तिथि पर भगवान सत्यनारायण की कथा पढ़ने-सुनने की परंपरा है। इस दिन किसी कथावाचक से अपने घर में कथा करवा सकते हैं या आप खुद ही कथा पढ़ सकते हैं।
  • चंद्र देव पूर्णिमा तिथि पर अपनी सभी कलाओं के साथ दर्शन देते हैं। इसलिए इस तिथि पर शाम को चंद्र उदय के बाद चंद्र देव को अर्घ्य देना चाहिए। इसके लिए चांदी या मिट्टी के कलश में जल-दूध भरें और ऊँ सों सोमाय नम: मंत्र का जप करते हुए अर्घ्य अर्पित करें।
  • जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं। खाना, अनाज, जूते-चप्पल, कपड़े, छाता, धन का दान करें। किसी गौ शाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें, गायों को हरी घास खिलाएं।

पितरों के लिए करें धूप-ध्यान

मान्यता है कि इस तिथि पर घर-परिवार के पितरों के लिए श्रद्धा से धूप-ध्यान और तर्पण आदि शुभ कर्म करना चाहिए। दोपहर करीब 12 बजे गाय के गोबर से बने कंडे जलाएं और जब कंडों से धुआं निकलना बंद हो जाए, तब अंगारों पर गुड़-घी डालें, पितरों का ध्यान करें और ऊँ पितृदेवेभ्यो नम: मंत्र का जप करें। हथेली में जल लें, अंगूठे की ओर से पितरों को चढ़ाएं।

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