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- Top 10 Indian Companies Lose ₹88,635 Crore In Market Value | Airtel & TCS Lead Decline | LIC Gains ₹18,469 Crore
मुंबई10 घंटे पहले
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मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है।
मार्केट वैल्यूएशन के हिसाब से देश की 10 सबसे बड़ी कंपनियों में से 7 की वैल्यू इस हफ्ते के कारोबार में ₹88,635करोड़ कम हुई है। इस दौरान टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर भारती एयरटेल टॉप लूजर रही। कंपनी की वैल्यू ₹30,506 करोड़ कम होकर ₹11.41 लाख करोड़ रुपए पर आ गई है।
इसके अलावा, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की वैल्यू भी ₹23,680 करोड़ गिरकर ₹10.83 लाख करोड़ पर आ गया है। वहीं, 3 अन्य कंपनियों की वैल्यू ₹50,926 करोड़ बढ़ी है। इस दौरान बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी LIC की वैल्यू ₹18,469 करोड़ बढ़कर ₹5.84 लाख करोड़ पर पहुंच गया है।


शुक्रवार को 95 अंक गिरा था बाजार
हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार, 7 नवंबर को सेंसेक्स 95 गिरकर 83,216 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 17 अंक की गिरावट रही, ये 25,492 के स्तर पर बंद हुआ। कल बाजार में 600 अंक तक गिरावट रही थी।
एयरटेल के शेयर में 4.4% की गिरावट रही। टेक महिंद्रा, ट्रेंट और रिलायंस भी नीचे बंद हुए। बजाज फाइनेंस, टाटा स्टील और बजाज फिनसर्व 2% से ज्यादा चढ़कर बंद हुए।
निफ्टी के 50 में से 30 शेयर्स में तेजी रही। मेटल, बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज के शेयरों में 2% से ज्यादा की तेजी रही। वहीं, FMCG, IT, मीडिया और फार्मा गिरकर बंद हुए।

मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है?
मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है।
इसे एक उदाहरण से समझें…
मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी।
कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं…
| बढ़ने का क्या मतलब | घटने का क्या मतलब |
| शेयर की कीमत में बढ़ोतरी | शेयर प्राइस में गिरावट |
| मजबूत वित्तीय प्रदर्शन | खराब नतीजे |
| पॉजिटीव न्यूज या इवेंट | नेगेटिव न्यूज या इवेंट |
| पॉजिटीव मार्केट सेंटिमेंट | इकोनॉमी या मार्केट में गिरावट |
| हाई प्राइस पर शेयर जारी करना | शेयर बायबैक या डीलिस्टिंग |
मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है।
निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं।
उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ से बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन अगर मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है।

मार्केट कैप के लिहाज से देश की टॉप-10 कंपनियां
| कंपनी | मार्केट कैप (₹ लाख करोड़ में) |
| रिलायंस | ₹20.00 |
| HDFC | ₹15.11 |
| एयरटेल | ₹11.41 |
| TCS | ₹10.83 |
| ICICI | ₹9.60 |
| SBI | ₹8.82 |
| बजाज फाइनेंस | ₹6.64 |
| इंफोसिस | ₹6.14 |
| LIC | ₹5.84 |
| HUL | ₹5.67 |
सोर्स: BSE (7 नवंबर, 2025)
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