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दिल्ली सरकार में अब कागजी फाइलों का दौर तेजी से खत्म हो रहा है। सरकार की ‘ई-ऑफिस’ (e-Office) व्यवस्था को 1 जुलाई को एक साल पूरा होने जा रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि इस डिजिटल बदलाव से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पूरी तरह बदल गई है। अब फाइलों का मूवमेंट, पत्राचार और उनकी मंजूरी सब कुछ ऑनलाइन हो रहा है। इससे न सिर्फ भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है, बल्कि जनता के काम भी समय पर हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “ई-ऑफिस का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब कोई भी फाइल छिपाई नहीं जा सकती। यह आसानी से ट्रैक हो जाता है कि कौन सी फाइल किस अधिकारी की टेबल पर कितने दिनों से लंबित (Pending) है।” सिर्फ 15 महीनों में 3 गुना बढ़े डिजिटल कर्मचारी दिल्ली सरकार के दफ्तरों में डिजिटलाइजेशन की रफ्तार का अंदाजा इन आंकड़ों से लगाया जा सकता है। 8 मार्च 2025 तक: सिर्फ 198 विभागों के 5,005 कर्मचारी ऑनलाइन काम कर रहे थे। 27 जून 2026 तक: यह संख्या बढ़कर 235 विभागों के 15,748 अधिकारी और कर्मचारी हो गई है। फाइलों के निपटारे का ‘सुपरफास्ट’ ट्रैक रिकॉर्ड एक साल के भीतर दिल्ली सरकार के डिजिटल पोर्टल पर लाखों फाइलों का निपटारा किया गया। 1 जुलाई 2025 से 12 अप्रैल 2026: इस अवधि में 1,14 हजार 603 ई-फाइलें और 7 लाख 14 हजार 91 ई-रसीदें क्लियर की गईं। 13 अप्रैल 2026 से 27 जून 2026 (सिर्फ ढाई महीने): नई व्यवस्था के अपग्रेड होने के बाद महज ढाई महीने में ही 23 हजार 767 ई-फाइलें और 1.53 लाख ई-रसीदें निपटा दी गईं। विभागों के काम के हिसाब से बनाई गईं 3 श्रेणियां मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि सभी सरकारी संस्थानों की कार्यप्रणाली एक जैसी नहीं होती, इसलिए ई-ऑफिस को 3 अलग-अलग कैटेगिरी में बांटा गया है। कैटेगिरी 1: पूर्ण रूप से सरकारी विभागों के लिए (132 विभाग पूरी तरह एक्टिव)। कैटेगिरी 2: PSU, बोर्ड, निगम, आयोग और स्वायत्त निकायों के लिए। कैटेगिरी 3: यूनिवर्सिटी, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए। दिल्ली सरकार का 75% से ज्यादा काम अब डिजिटल कुल रिपोर्ट कार्ड: दिल्ली सरकार के कुल 235 विभागों में से 177 विभाग (करीब 75.3%) अब पूरी तरह नियमित रूप से ई-ऑफिस का इस्तेमाल कर रहे हैं। सरकारी विभाग: 132 शुद्ध सरकारी विभागों में से 120 विभाग (91%) पूरी तरह पेपरलेस हो चुके हैं। बोर्ड और निगम: 55 में से 36 संस्थाएं (65.5%) ऑनलाइन काम कर रही हैं। यूनिवर्सिटी और कॉलेज: 48 में से 21 शैक्षणिक संस्थान (43.8%) इस सिस्टम से जुड़ चुके हैं।
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