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लोक निर्माण विभाग मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने बुधवार को दिल्ली सचिवालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बारापुला फेज-III परियोजना में सामने आ रही ट्रैफिक समस्या के लिए पिछली आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल की प्लानिंग को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि परियोजना में गलत डिजाइन और ट्रैफिक इंटीग्रेशन की अनदेखी के कारण कुछ हिस्सों में बोतलनेक की स्थिति बन रही है। वर्मा ने बताया कि 2014 में मंजूर परियोजना को 2017 तक पूरा होना था, लेकिन भूमि अधिग्रहण, पेड़ों की कटाई और यूटिलिटी शिफ्टिंग जैसे मुद्दों के कारण इसमें देरी हुई। इसके चलते लागत बढ़ी और आर्बिट्रेशन के जरिए ठेकेदार को करीब 640 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया गया, जिसकी समीक्षा जारी है। वर्तमान सरकार ने लंबित काम पूरे कराकर परियोजना को शुरू किया। मंत्री के मुताबिक डीएनडी फ्लाईवे, एनएच-24, सराय काले खां, रिंग रोड और आरआरटीएस से आने वाले ट्रैफिक को ध्यान में रखकर कॉरिडोर का एकीकृत डिजाइन नहीं किया गया। अलग-अलग दिशाओं का ट्रैफिक आगे कम लेन में मर्ज होने से पीक आवर्स में जाम लगता है। यू-टर्न और लेन चैनलाइजेशन से राहत की तैयारी पीडब्ल्यूडी और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस उपलब्ध सड़क स्थान के बेहतर इस्तेमाल, लेन चैनलाइजेशन और ट्रैफिक मैनेजमेंट पर काम कर रहे हैं। गूगल मैप्स पर रूट अपडेट करने के कदम भी उठाए जा रहे हैं। सिद्धार्थ एक्सटेंशन के पास रिंग रोड पर गुरुद्वारे के सामने डेडिकेटेड यू-टर्न/कट का प्रस्ताव है। इससे स्थानीय लोगों को ओल्ड बारापुला होते हुए लाजपत नगर और एम्स की ओर जाने में सुविधा होगी तथा रॉन्ग-साइड ड्राइविंग पर भी रोक लगेगी। सरकार जल्द विशेषज्ञ कंसल्टेंट नियुक्त करेगी, जो पूरे कॉरिडोर का मूल्यांकन कर अल्पकालिक और दीर्घकालिक समाधान सुझाएगा।
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