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अधिकारियों के साथ मीटिंग करते हुए एलजी टीएस संधू
दिल्ली के सुनियोजित विकास को लेकर दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने कई अहम फैसले किए हैं। उपराज्यपाल एवं डीडीए चेयरमैन सरदार तरनजीत सिंह संधू की अध्यक्षता में हुई बैठक में मास्टर प्लान-2041 को मंजूरी दी गई।
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अब इसे केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के पास भेजा जाएगा। मंत्रालय से अधिसूचना जारी होने के बाद इसके प्रावधान लागू होंगे। मास्टर प्लान में यूईआर-2 के दोनों ओर 250 मीटर के दायरे में हाईराइज इमारतों और आवासीय परियोजनाओं को बढ़ावा देने का प्रावधान है। इससे राजधानी के बाहरी इलाकों में नियोजित विकास और आवासीय विकल्प बढ़ने की उम्मीद है।
टीओडी नीति का दायरा बढ़ेगा मेट्रो, आरआरटीएस और रेलवे कॉरिडोर के आसपास विकास के लिए ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) नीति का विस्तार किया जाएगा। डीडीए ने इसके तहत 207 वर्ग किमी क्षेत्र को शामिल किया है। इसमें करीब 80 वर्ग किमी क्षेत्र पहली बार टीओडी के दायरे में आएगा।
लैंड पूलिंग की जगह टाउन प्लानिंग लैंड पूलिंग नीति के तहत दिल्ली के 105 गांवों को विकसित किया जा रहा है। अब इस व्यवस्था को टाउन प्लानिंग मॉडल में बदलने की तैयारी है। मौजूदा व्यवस्था में जमीन मालिकों को डीडीए की निगरानी में कंसोर्टियम बनाना पड़ता था। इसमें डीडीए की 40% और जमीन मालिकों की 60% हिस्सेदारी तय थी।
कंसोर्टियम की अनिवार्यता खत्म करने का फैसला किया गया है। डीडीए के अनुसार, इससे अगले 10 वर्षों में इन जोन में करीब 20 लाख अतिरिक्त फ्लैटों के निर्माण का रास्ता साफ होगा।
पुरानी डीडीए कॉलोनियों का होगा पुनर्विकास नारायणा विहार जैसी 50 साल से अधिक पुरानी और कमजोर दो मंजिला डीडीए आवासीय इकाइयों के पुनर्विकास की नीति को भी मंजूरी दी गई है। पुनर्विकास प्लॉट के आकार, मास्टर प्लान, संरचनात्मक सुरक्षा और फायर सेफ्टी नियमों के अनुसार होगा।







