दिल्ली में झुग्गियों में रहने वाले करीब 4 से 5 लाख परिवारों के लिए राहत की खबर है। रेखा गुप्ता सरकार ने ‘दिल्ली झुग्गी एवं झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति-2026’ अधिसूचित कर दी है। इसके तहत पात्र परिवारों को एक बेडरूम, हॉल और किचन (1-BHK)
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नई नीति में 1 जनवरी 2025 तक स्थापित झुग्गी बस्तियों की उन झुग्गियों को शामिल किया गया है, जो इस तारीख से पहले अस्तित्व में थीं। निर्धारित पात्रता शर्तें पूरी करने वाले परिवारों को वैकल्पिक आवास दिए बिना उनकी झुग्गियां नहीं हटाई जाएंगी। सरकार ने यथास्थान पुनर्वास को प्राथमिकता दी है। प्रयास होगा कि पात्र परिवारों को मौजूदा बस्ती में ही या उसके तीन किलोमीटर के दायरे में मकान मिलें।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल झुग्गियां हटाना नहीं, बल्कि वहां रहने वाले परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन देना है। पुनर्वास के दौरान लोगों के रोजगार, बच्चों की पढ़ाई और सामाजिक जीवन का भी ध्यान रखा जाएगा।

जहां झुग्गी, वहीं मकान को प्राथमिकता
नई नीति के तहत झुग्गीवासियों को उनकी मौजूदा बस्ती में ही पक्के मकान देने को प्राथमिकता मिलेगी। ऐसा संभव नहीं होने पर तीन किलोमीटर के दायरे में पुनर्वास का प्रयास होगा। इससे परिवारों को रोजगार, स्कूल और अन्य जरूरी सुविधाओं से दूर नहीं जाना पड़ेगा।
1-BHK मकान के साथ स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाएं
पुनर्वास के तहत विकसित आवासीय परिसरों में स्कूल, आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य सुविधाएं और बच्चों के लिए खेल मैदान भी होंगे। इनका विकास संबंधित क्षेत्र के नियोजन नियमों के अनुसार किया जाएगा।
एक झुग्गी में अलग-अलग परिवारों को भी मिल सकता है मकान
एक ही झुग्गी की अलग-अलग मंजिलों पर स्वतंत्र रूप से रहने वाले परिवार भी अलग मकान के पात्र हो सकते हैं। इसके लिए प्रत्येक परिवार को निर्धारित पात्रता और दस्तावेज संबंधी शर्तें पूरी करनी होंगी। ऐसे परिवारों के अलग आवंटन पर विचार किया जाएगा।
दिव्यांगों को भूतल पर मकान में प्राथमिकता
दिव्यांग सदस्य वाले पात्र परिवारों को प्रमाणपत्र संबंधी शर्तें पूरी करने पर उपलब्धता के आधार पर भूतल पर मकान देने में प्राथमिकता मिलेगी। पति-पत्नी के नाम संयुक्त रूप से आवास आवंटित किया जाएगा।
कंप्यूटराइज्ड लॉटरी से मकानों का आवंटन
मकानों का आवंटन कंप्यूटर आधारित लॉटरी से होगा। पारदर्शिता के लिए केंद्रीकृत जीआईएस आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा। इससे लाभार्थियों का रिकॉर्ड रखने, परियोजनाओं की निगरानी और दोहरे आवंटन को रोकने में मदद मिलेगी। शिकायत निवारण और अपील की व्यवस्था भी होगी।
पुनर्विकास के दौरान किराये के मकान की व्यवस्था
पीपीपी मॉडल के तहत झुग्गियों के यथास्थान पुनर्विकास के दौरान प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी आवास की व्यवस्था होगी। संबंधित डेवलपर को किराये का मकान उपलब्ध कराना होगा या किराये के लिए आर्थिक सहायता देनी होगी। इस दौरान बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी डेवलपर की होगी।






