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नई दिल्ली1 घंटे पहले
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डब्ल्यूएचओ सहित कई संस्थानों के शोध मानते हैं कि युवा पीढ़ी के साथ रहने से बुजुर्गों का तनाव घटता है। दिमाग सक्रिय रहता है और डिमेंशिया का खतरा कम होता है।- प्रतीकात्मक फोटो
दिल्ली के रहने वाले रिटायर्ड प्रोफेसर मेहरा अब अकेले नहीं हैं। उनके घर में 23 साल का आईटी स्टूडेंट रोहित रहता है। वह किराया नहीं देता, लेकिन बदले में उनका मोबाइल संभालता है, ऑनलाइन कामों में मदद करता है। साथ में खाना खाता है और जरूरत पड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाता है।
दरअसल जापान-यूके की तरह देश के बड़े शहरों में इंटरजेनरेशनल को-लिविंग कल्चर विकसित हो रहा है। इसमें अकेले रहने वाले बुजुर्ग अपने घर का एक हिस्सा कॉलेज के छात्रों या प्रोफेशनल युवाओं को देते हैं। बदले में छात्र रोजमर्रा के कामों में बुजुर्गों की मदद करते हैं। डब्ल्यूएचओ सहित कई संस्थानों के शोध मानते हैं कि युवा पीढ़ी के साथ रहने से बुजुर्गों का तनाव घटता है। दिमाग सक्रिय रहता है और डिमेंशिया का खतरा कम होता है।
इन देशों में को-लिविंग कल्चर बुजुर्गों का सहारा

छात्रों के साथ रहने से बुजुर्गों की मानसिक स्थिति अच्छी रहती है।- प्रतीकात्मक फोटो
जापान: बुजुर्गों के साथ रहते
– यहां तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी के कारण ‘इंटरजेनरेशनल हाउसिंग’ को काफी बढ़ावा दिया गया।
– यहां शेयर हाउस में युवा और बुजुर्ग साथ रहते हैं। सरकार सपोर्ट करती है।
नतीजा: इससे बुजुर्गों को सहारा और युवाओं को अनुभव मिलता है।
नीदरलैंड: साथ में गेम खेलते
– यहां नर्सिंग होम में छात्रों को फ्री में रहने की जगह दी जाती है।
– शर्त सिर्फ इतनी कि वे हर महीने बुजुर्गों के साथ समय बिताएं। बातचीत करें, साथ में गेम खेलें या टहलें।
नतीजा: बुजुर्गों में अकेलापन कम, स्टूडेंट्स में समझ बेहतर होती है।
अब देश के कई बड़े शहरों में भी तेजी से ट्रेंड बन रहा है यह कल्चर
इन शहरों में शुरुआत
– दिल्ली-गुरुग्राम: कई बुजुर्ग छात्रों को कम किराए पर कमरा देते हैं। बदले में मोबाइल से जुड़े डिजिटल कामकाज में मदद मिलती है।
– मुंबई: महंगे किराए के कारण युवा ‘पेइंग गेस्ट’ की जगह सीनियर होम चुनते हैं। इससे बुजुर्गों को साथ और सुरक्षा तो स्टूडेंट/युवाओं को 30-50% तक सस्ता घर मिलता है।
– बेंगलुरु/पुणे : स्टार्टअप व आईटी प्रोफेशनल्स के कारण को-लिविंग मॉडल उभर रहा।
लेकिन सतर्कता भी रखें, वेरिफिकेशन कराएं
– जिस भी स्टूडेंट को रखें उसका थाने में पुलिस वेरिफिकेशन कराएं।
– संबंधित छात्र/युवा की पहचान की पुष्टि कॉलेज/ऑफिस से करें।
– 15 दिन का ट्रायल पीरियड रखें।
– संबंधित स्टूडेंट का लिखित में रेंट एग्रीमेंट भी जरूर कराएं।
– जिसे भी घर में रख रहे हैं उसके बारे अपने परिवार को भी बताएं।
इसलिए साथ जरूरी
– पारिवारिक-सामाजिक दूरी को डब्ल्यूएचओ ने बड़ा हेल्थ रिस्क माना है।
– शोध कहते हैं अकेलापन डिप्रेशन और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ाता है।
एक्सपर्ट्स पैनल
डॉ. बलभद्रसिंह जड़ेजा (सीनियर साइकेट्रिस्ट)
डॉ. शैलेंद्र भदौरिया ( एमडी, जेरियाट्रिक मेडिसिन)
प्रो. दिवाकर राजपूत ( एचओडी, समाजशास्त्र, डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर)









