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देश के 48 टीचर्स को नेशनल अवॉर्ड: महाराष्ट्र के वैभव ने वीडियो बनाकर मैथ्स आसान की; राजस्थान के दिव्येंदु ने पेड़ों पर QR कोड लगाकर पढ़ाया

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नई दिल्ली15 घंटे पहले

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राष्ट्रपति मुर्मू ने दिल्ली के विज्ञान भवन में शिक्षकों को नेशनल टीचर अवॉर्ड दिया। - Dainik Bhaskar

राष्ट्रपति मुर्मू ने दिल्ली के विज्ञान भवन में शिक्षकों को नेशनल टीचर अवॉर्ड दिया।

शिक्षक दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में देशभर के 48 स्कूल शिक्षकों को नेशनल टीचर अवॉर्ड से सम्मानित किया। इनमें केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूल, आदर्श जनजातीय स्कूल और पीएम श्री स्कूलों के शिक्षक शामिल हैं।

इन शिक्षकों ने पढ़ाई को आसान और दिलचस्प बनाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए। महाराष्ट्र के वैभव वसंतराव कुलकर्णी ने गणित के मुश्किल टॉपिक समझाने के लिए 700 से ज्यादा वीडियो बनाए। वहीं राजस्थान के दिव्येंदु सेन ने 500 पेड़ों पर QR कोड लगाकर बच्चों को पेड़ों की जानकारी देने का नया तरीका अपनाया।

इसके अलावा पंजाब के दिनेश कुमार ने वर्चुअल फिजिक्स लैब और 100 से ज्यादा कम खर्च वाले मॉडल तैयार किए। 48 स्कूल शिक्षकों के अलावा उच्च शिक्षा संस्थानों और पॉलिटेक्निक के 21 शिक्षक व फैकल्टी सदस्य और कौशल विकास मंत्रालय के 13 कौशल प्रशिक्षकों को भी नेशनल टीचर अवॉर्ड मिला है।

पंजाब के शिक्षक दिनेश कुमार को नेशनल टीचर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उन्होंने वर्चुअल फिजिक्स लैब और 100 से ज्यादा जीरो-कॉस्ट मॉडल बनाकर छात्रों के लिए फिजिक्स को आसान और दिलचस्प बनाया।

पंजाब के शिक्षक दिनेश कुमार को नेशनल टीचर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उन्होंने वर्चुअल फिजिक्स लैब और 100 से ज्यादा जीरो-कॉस्ट मॉडल बनाकर छात्रों के लिए फिजिक्स को आसान और दिलचस्प बनाया।

शिक्षकों की अलग-अलग पहल ने दिलाया सम्मान

मंजरी महाजन, हिमाचल प्रदेश: स्कूल में बच्चों की पढ़ाई के साथ पर्यावरण बचाने पर काम किया। कचरा अलग करना, प्लास्टिक जमा करना और कैंपस को प्लास्टिक से मुक्त रखने की व्यवस्था की।

दिव्येंदु सेन, राजस्थान: बच्चों को अंतरिक्ष से जुड़ी पढ़ाई कराई और उनके साथ 12 नए क्षुद्र ग्रह खोजे। स्कूल के 500 पेड़ों पर क्यूआर कोड लगाकर उनके बारे में जानकारी दी।

डॉ. वर्तिका गुलाटी, राजस्थान: बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने के लिए गूगल मीट और गूगल फॉर्म का इस्तेमाल किया। कोविड के दौरान ऑनलाइन कक्षाएं लेकर बच्चों की पढ़ाई जारी रखी।

दिनेश कुमार, पंजाब: वर्चुअल फिजिक्स लैब बनाई और 100 से ज्यादा कम खर्च वाले मॉडल तैयार किए। इससे बच्चों को फिजिक्स आसानी से समझने में मदद मिली और उनका डर कम हुआ।

रवि जयसवाल, चंडीगढ़: स्कूल में 3D गुंबद थिएटर और मौसम केंद्र बनाया। बच्चों को अंतरिक्ष और मौसम के बारे में सीधे प्रयोग और अनुभव के जरिए समझाया।

वैभव वसंतराव कुलकर्णी, महाराष्ट्र: गणित को आसान तरीके से पढ़ाने के लिए नए तरीके और कम खर्च वाले मॉडल बनाए। छात्रों की मदद के लिए 700 से ज्यादा वीडियो भी तैयार किए।

शालिनी कुशवाहा, यूपी: बच्चों को पढ़ाने के लिए खेल और अलग-अलग गतिविधियों का इस्तेमाल करती हैं। उनकी पहल के कारण स्कूल में बच्चों का एडमिशन बढ़ा है।

देशभर में 3 चरणों में हुआ टीचर्स का चयन

शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, नेशनल अवॉर्ड के लिए 27 राज्यों, 7 केंद्र शासित प्रदेशों से 48 टीचर्स चुने गए हैं। इनका चयन स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने तीन चरणों में किया। यह प्रक्रिया जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पूरी हुई।

नेशनल अवॉर्ड का मकसद शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले टीचर्स को सम्मानित करना है। इसमें ऐसे टीचर्स को चुना जाता है, जिन्होंने पढ़ाई के नए तरीके अपनाकर छात्रों के सीखने और विकास में योगदान दिया हो।

अवॉर्ड पाने वाले टीचर्स से मिले PM, पूछा- पब्लिक से बात करने के टिप्स दें

पीएम मोदी ने भी अवॉर्ड पाने वाले शिक्षकों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने एक महिला शिक्षक से पूछा कि अगर उन्हें अच्छा पब्लिक स्पीकर बनना हो तो क्या करना चाहिए। शिक्षक ने जवाब दिया कि इसके लिए सबसे पहले आत्मविश्वास जरूरी है। पूरी खबर पढ़ें…

1958 में शुरू हुआ था नेशनल टीचर अवॉर्ड

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार की शुरुआत 1958 में हुई थी। इसका उद्देश्य बेहतरीन और समर्पित शिक्षकों के योगदान को सार्वजनिक रूप से सम्मान देना है।

इस पुरस्कार के लिए ऐसे शिक्षकों को चुना जाता है, जिन्होंने:

  • शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में उल्लेखनीय काम किया हो।
  • छात्रों के सीखने और विकास में योगदान दिया हो।
  • पढ़ाई के नए और प्रभावी तरीके अपनाए हों।
  • अपने काम से दूसरे शिक्षकों के लिए उदाहरण पेश किया हो।



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