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देश में बना सबसे तेज ड्रोन, 500Kmph रफ्तार: मिसाइलों को मार गिराएगा, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज

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3 घंटे पहले

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देश का सबसे तेज रफ्तार इंटरसेप्टर ड्रोन बनकर तैयार हो गया है, जो दुश्मन मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है। हैदराबाद के स्टार्टअप अपोलियन डायनेमिक्स ने गुरुवार को बताया कि उनकी कंपनी ने आहुति Mk-II बनाया है, इसकी स्पीड करीब 500 किलोमीटर प्रति घंटा है। ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ ने इसकी रफ्तार 498 किमी./ घंटा दर्ज की है।

स्टार्टअप के फाउंडर जयंत खत्री ने बताया कि इस ड्रोन ने अपने प्रोटोटाइप मॉडल की 325 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड का पुराना रिकॉर्ड तोड़ा है। आहुति Mk-II को दुश्मन ड्रोन या मिसाइल को तुरंत मार गिराने के लिए बनाया गया है।

ईरानी शाहेद ड्रोन को टक्कर देगा आहुति Mk-II

आहुति Mk-II का मुकाबला अमेरिका के साथ जंग के दौरान ईरान की ओर इस्तेमाल किए गए शाहेद-136 ड्रोन से होगा। शाहेद ड्रोन की कीमत करीब 32 लाख रुपए है और इसने जंग के दौरान अमेरिका को भारी नुकसान पहुंचाया था।

एडवांस ड्रोन से निपटने की प्लानिंग

कंपनी का कहना है कि युद्ध के बदलते तरीकों को देखते हुए ड्रोन की स्पीड बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है। हालिया वैश्विक संघर्षों में शाहेद-16 जैसे सस्ते और खतरनाक ड्रोन्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। ‘आहूति Mk II’ का मुख्य काम दुश्मन के ऐसे ही ड्रोन्स के करीब पहुंचकर उन्हें तुरंत हवा में ही नष्ट करना है।

10 बार बदला डिजाइन, 400 एम्पीयर करंट से मिली स्पीड

आहूति Mk-II ड्रोन को 498kmph की रफ्तार देने के लिए इसके इंजन, मोटर और बॉडी में बड़े बदलाव किए गए, जिसके लिए 10 अलग-अलग मॉडल बनाए गए।

यह ड्रोन एक बार में 400 एम्पीयर बिजली की पावर खींचता है, जिससे इसे जबरदस्त स्पीड मिलती है।

इससे पहले कंपनी ने सेना को 300kmph स्पीड वाले ड्रोन दिए थे, जिसे 8 महीने की मेहनत के बाद और ज्यादा तेज बनाया गया है। हालांकि ड्रोन की कीमत का खुलासा नहीं किया गया है।

आर्मी रेंज में टेस्ट और कम लागत में ज्यादा ताकत

कंपनी ने इस ड्रोन का परीक्षण भारतीय सेना की मदद से बबीना और गोपालपुर फायरिंग रेंज में किया है। इनका मुख्य मकसद कम खर्च में ज्यादा मारक क्षमता वाले हथियार बनाना है, ताकि सेना का बजट बढ़ाए बिना देश को एडवांस तकनीक मिल सके।

2032 तक भारी मिसाइल प्लेटफॉर्म बनाने का लक्ष्य

कंपनी सिर्फ ड्रोन तक सीमित नहीं रहना चाहती। इसका टारगेट 2032 तक एक बड़ा क्रूज मिसाइल प्लेटफॉर्म बनाना है, जो हजारों किलो विस्फोटक ले जा सके। इस काम में अग्नि मिसाइल प्रोग्राम के पूर्व डायरेक्टर प्रोफेसर एम रामा मनोहरा बाबू कंपनी को गाइड कर रहे हैं।

नॉलेज पार्ट: नॉर्मल ड्रोन और इंटरसेप्टर ड्रोन में अंदर

  • सामान्य ड्रोन: इनका काम फोटो-वीडियो खींचना, निगरानी करना या सामान ढोना होता है। यह हवा में एक जगह टिककर टिक-टॉक उड़ने और बैलेंस बनाने के लिए डिजाइन किए जाते हैं।
  • इंटरसेप्टर ड्रोन: यह हवा में उड़ती हुई मिसाइल की तरह काम करता है। इसका इकलौता काम हवा में आ रहे दुश्मन के ड्रोन या मिसाइल का पीछा करके उसे रास्ते में ही फोड़ देना है। इसीलिए इसमें सबसे ज्यादा जरूरत भारी स्पीड और फुर्ती की होती है।

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ईरान के सस्ते ड्रोन अमेरिका के लिए बने बड़ा सिरदर्द: ₹32 लाख के ड्रोन को रोकने लाखों-करोड़ों खर्च, अमेरिका की ऑपरेशनल कॉस्ट तेजी से बढ़ी

ईरान के सस्ते और कम तकनीक वाले ड्रोन अमेरिका के लिए बड़ा सिरदर्द बन गए हैं। करीब 35,000 डॉलर (लगभग ₹32 लाख) में बनने वाला शाहेद-136 ड्रोन गिराने के लिए अमेरिका को कई बार लाखों से लेकर करोड़ों रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं। इससे अमेरिका के लिए युद्ध की लागत तेजी से बढ़ी है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध के पहले छह दिनों में ही अमेरिका ने 11.3 बिलियन डॉलर (करीब ₹1.04 लाख करोड़) खर्च कर दिए। अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के अनुसार अप्रैल की शुरुआत तक यह खर्च 25 से 35 बिलियन डॉलर (करीब ₹2.31 लाख करोड़ से ₹3.24 लाख करोड़) के बीच पहुंच गया। पूरी खबर पढ़ें…

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