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पिथौरागढ़ जिले की प्रसिद्ध पाताल भुवनेश्वर गुफा 11 अक्टूबर से श्रद्धालुओं के लिए खोल दी जाएगी। शारदीय नवरात्र के पहले दिन से यहां दर्शन शुरू होंगे। मानसून के दौरान भारी बारिश और गुफा के भीतर ऑक्सीजन का स्तर कम होने के कारण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने प्रवेश पर रोक लगाई थी। हालांकि, गुफा खुलने के बावजूद यहां ऑक्सीजन का स्तर अभी सामान्य नहीं हुआ है। मंदिर के पुजारी नीलम भंडारी ने हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर और अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों के साथ अधिक उम्र के श्रद्धालुओं से फिलहाल गुफा की यात्रा टालने की अपील की है। पुजारी के मुताबिक, श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मशीन और छोटे पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था की गई है। उन्हें उम्मीद है कि 17 अक्टूबर के बाद गुफा के भीतर ऑक्सीजन का स्तर पूरी तरह सामान्य हो सकता है। मंदिर और गुफा को नवरात्र के लिए सजाया जा रहा है। गंगोलीहाट से 14 किलोमीटर दूर है गुफा पाताल भुवनेश्वर गुफा मंदिर पिथौरागढ़ जिले में गंगोलीहाट से करीब 14 किलोमीटर दूर स्थित है। यह प्राकृतिक चूना पत्थर से बनी भूमिगत गुफा है। इसके भीतर पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को संकरे रास्ते से नीचे उतरना पड़ता है। गुफा में चूना पत्थर से बनी प्राकृतिक आकृतियां, संकरे गलियारे और भूमिगत कक्ष हैं। इन आकृतियों को श्रद्धालु देवी-देवताओं और पौराणिक पात्रों के स्वरूप के रूप में देखते हैं। 33 कोटि देवी-देवताओं के वास की मान्यता धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पाताल भुवनेश्वर भगवान शिव से जुड़ा पवित्र स्थल है। स्कंद पुराण के मानसखंड में भी इस स्थान का उल्लेख बताया जाता है। स्थानीय मान्यता है कि गुफा के भीतर 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। इसी मान्यता के कारण यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। यहां दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए देश ही नहीं, विदेश से भी पर्यटक पहुंचते हैं। नवरात्र में बढ़ सकती है श्रद्धालुओं की आवाजाही शारदीय नवरात्र के पहले दिन गुफा खुलने से श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर मिलेगा। इस मौके के लिए मंदिर और गुफा को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है। नवरात्र के दौरान धार्मिक स्थलों पर पूजा-अर्चना का विशेष महत्व रहता है, इसलिए यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है। पाताल भुवनेश्वर धार्मिक महत्व के साथ अपनी प्राकृतिक संरचना के लिए भी जाना जाता है। भूमिगत कक्षों, चूना पत्थर की आकृतियों और संकरे रास्तों को देखने के लिए पर्यटक यहां पहुंचते हैं। हालांकि, ऑक्सीजन का स्तर सामान्य होने तक बीमार और अधिक उम्र के श्रद्धालुओं को यात्रा टालने की पुजारी की सलाह को ध्यान में रखना जरूरी है।
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