धोखे से नाराज होकर बफेट ने खरीदी थी बर्कशायर:  इसी कंपनी ने ₹98 लाख करोड़ का मालिक बनाया; 95 साल के बफे आज 60 साल बाद रिटायर
ऑटो-ट्रांसपोर्ट

धोखे से नाराज होकर बफेट ने खरीदी थी बर्कशायर: इसी कंपनी ने ₹98 लाख करोड़ का मालिक बनाया; 95 साल के बफे आज 60 साल बाद रिटायर

Spread the love


  • Hindi News
  • Business
  • Warren Buffett Last Day As CEO 95 Year Legacy Ends 1 Trillion Dollar Empire To Greg Abel

नई दिल्ली14 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

दुनिया के सबसे महान निवेशक वॉरेन बफेट आज (31 दिसंबर) बर्कशायर हैथवे के CEO पद से इस्तीफा दे रहे हैं। 95 साल के बफेट के छह दशक लंबे इस सफर के अंत की कहानी बड़ी दिलचस्प है। जिस कंपनी के दम पर वे दुनिया के 9वें सबसे अमीर इंसान बने, उसे खरीदना वे अपनी जिंदगी की ‘सबसे बड़ी गलती’ मानते हैं।

बफेट ने यह कंपनी किसी बिजनेस डील के लिए नहीं, बल्कि गुस्से में आकर खरीदी थी। रिटायरमेंट पर बफेट ने कहा रिटायरमेंट के बारे में सोचना भी नामुमकिन है। मेरे लिए यह मौत से भी बदतर होगा।” वे आज भी हफ्ते में पांच दिन ओमाहा स्थित हेडक्वार्टर जाते हैं।

बफेट बोले- घर बैठकर सोप ओपेरा देखने का कोई इरादा नहीं

बफेट ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल से बातचीत में मजाकिया लहजे में कहा, “मैं घर बैठकर सोप ओपेरा (टीवी सीरियल) नहीं देखने वाला। मेरी दिलचस्पी अब भी वही है जो पहले थी। मैं चेयरमैन के तौर पर आसपास ही रहूंगा और ग्रेग के लिए उपयोगी साबित हो सकता हूं।

60 साल का सफर: डूबती कपड़ा मिल से बनाया 1 ट्रिलियन डॉलर का साम्राज्य

1965 में जब वॉरेन बफेट ने बर्कशायर हैथवे का कंट्रोल हाथ में लिया था, तब यह एक संघर्ष कर रही टेक्सटाइल (कपड़ा) कंपनी थी। बफेट ने इसे दुनिया के सबसे बड़ी कंपनियों में से एक में बदल दिया।

आज बर्कशायर हैथवे 1 ट्रिलियन डॉलर यानी, करीब 90 लाख करोड़ रुपए की वैल्यू वाली कंपनी है। इसके पास कोका-कोला, क्राफ्ट हेंज और एप्पल जैसे बड़े ब्रांड्स की हिस्सेदारी है, साथ ही जीको (Geico) और नेटजेट्स जैसी कंपनियां भी इसके पोर्टफोलियो में शामिल हैं।

बफेट ने कहा था- ‘बर्कशायर खरीदना मेरा सबसे डंब फैसला था’

हैरानी की बात यह है कि जिस कंपनी के दम पर बफेट दुनिया के टॉप-10 अमीरों में शामिल हुए, उसे ही वे अपनी सबसे बड़ी गलती मानते हैं। बफेट के मुताबिक, उन्होंने 1962 में सिर्फ इसलिए इस कंपनी को खरीदा था क्योंकि इसके मैनेजमेंट ने उन्हें धोखा दिया था।

बफेट बताते हैं- 1964 में बर्कशायर के मालिक मिस्टर स्टैंटन ने वादा किया था कि उनके पास बर्कशायर के जितने भी स्टॉक है उसे वो 11.50 डॉलर के भाव पर खरीद लेंगे।

कुछ दिनों बाद जब लेटर आया तो कीमत 11.375 डॉलर थी। इस धोखाधड़ी से बफेट को इतना गुस्सा आया कि उन्होंने स्टॉक बेचने के बजाय पूरी कंपनी ही खरीद ली और स्टैंटन को नौकरी से निकाल दिया।

बफेट इसे अपनी ‘सबसे डंब’ (बेवकूफी भरी) डील मानते हैं, क्योंकि उन्होंने एक डूबते हुए टेक्सटाइल बिजनेस में सालों तक अपना पैसा फंसाए रखा। बफेट कहते हैं, “अगर मैं वह पैसा सीधे इंश्योरेंस बिजनेस में लगाता, तो आज बर्कशायर की वैल्यू दोगुनी होती।”

बफेट के वो सबक, जिसने दुनिया के CEOs ने अपनाया

वॉरेन बफेट सिर्फ एक निवेशक नहीं, बल्कि एक महान शिक्षक भी रहे हैं। बफेट ने अपनी सलाह से भरे ‘इन्वेस्टर लेटर्स’, घंटों चलने वाली मीटिंग्स और अपने काम व निजी जीवन के फैसलों के जरिए दुनिया भर के CEO’s को सिखाया है कि बिजनेस और जिंदगी कैसे चलाई जाती है।

  • सीईओ के बीच बफेट के जिस गुण की सबसे ज्यादा चर्चा हुई, वो है उनका धैर्य। बफेट बर्कशायर में कैश का ढेर लगाकर बैठ जाते थे और निवेश के सही मौके का इंतजार करते थे। उन्होंने 1989 में शेयरधारकों को लिखा था, “हमारा पसंदीदा होल्डिंग पीरियड हमेशा के लिए है।”
  • कायाक के CEO स्टीव हाफनर कहते हैं, “मैं वॉरेन बफेट की इस बात का कायल रहा हूं कि वे मुश्किल बातों को समझाने के लिए कितनी आसान भाषा का इस्तेमाल करते हैं। किसी जटिल मुद्दे को बिल्कुल बेसिक लेवल पर ले जाना बहुत बड़े हुनर का काम है।”
  • वेल्थ मैनेजमेंट फर्म हाइटावर के CEO लैरी रेस्टिएरी ने कहा– “बफेट से मैंने सीखा कि एक्सीलेंस सच में एक डिसिप्लिन है। साफ दिशा तय करें और धैर्य से अमल करें।”

99% संपत्ति दान करेंगे वॉरेट बफेट

वॉरेट बफेट ने अपनी 99% संपत्ति दान करने का वादा किया है। हाल ही में उन्होंने अपने बच्चों के फाउंडेशन को 1.3 बिलियन डॉलर के शेयर दान किए हैं। उनका मानना है कि, “बच्चों को इतना पैसा दें कि वे कुछ भी कर सकें, लेकिन इतना नहीं कि वे कुछ न करें।”

फोर्ब्स की रियल टाइम बिलियनेयर्स लिस्ट के अनुसार वॉर्ट बफेट की नेटवर्थ 13.36 लाख करोड़ रुपए हैं। दुनिया के टॉप टेन अमीरों में वो नौवें नेबर पर आते हैं।

अब ग्रेग एबेल संभालेंगे कमान, क्या बदलाव आएंगे

अब बाजार की नजरें ग्रेग एबेल पर हैं। उनके पास सबसे बड़ी चुनौती बर्कशायर के पास मौजूद 380 बिलियन डॉलर यानी 34 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के भारी-भरकम कैश का सही इस्तेमाल करना है। एबेल स्टॉक पिकर नहीं हैं, बल्कि वे ऑपरेशंस और एनर्जी बिजनेस के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं।

उनके सामने बड़ी चुनौती यह भी होगी कि क्या वे बफेट की ‘हैंड्स-ऑफ’ अप्रोच (सब्सिडियरी कंपनियों के काम में दखल न देना) को जारी रखेंगे या कुछ बदलाव करेंगे।

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *