नीरजा चौधरी का कॉलम:  नीतीश के खराब स्वास्थ्य से बिहार में नए समीकरण उभरे
टिपण्णी

नीरजा चौधरी का कॉलम: नीतीश के खराब स्वास्थ्य से बिहार में नए समीकरण उभरे

Spread the love


  • Hindi News
  • Opinion
  • Neerja Chaudhary’s Column Nitish’s Poor Health Has Given Rise To New Equations In Bihar

3 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक
नीरजा चौधरी वरिष्ठ राजनीतिक टिप्पणीकार - Dainik Bhaskar

नीरजा चौधरी वरिष्ठ राजनीतिक टिप्पणीकार

दिल्ली फतह करने के बाद अब भाजपा का ध्यान बिहार की ओर मुड़ गया है। प्रधानमंत्री ने वक्फ विधेयक पर मुस्लिम समुदाय के बढ़ते प्रतिरोध को कम करने के लिए ईद पर 32 लाख मुस्लिम परिवारों के लिए सौगात-ए-मोदी पैकेज की घोषणा की।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार में मुस्लिम समुदाय के एक वर्ग के बीच लोकप्रिय हैं। पिछले दिनों विपक्षी दलों- जो बिहार में किसी सूरत में कमजोर नहीं हैं- ने नीतीश कुमार के स्वास्थ्य के मुद्दे को उछाला। कुछ दिनों पहले एक वीडियो क्लिप वायरल हुई थी, जिसमें नीतीश को राष्ट्रगान बजते समय हंसते और इशारे करते देखा गया था। विपक्ष ने नीतीश कुमार पर राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाते हुए इस्तीफे की मांग की है।

बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी नीतीश के इस्तीफे की मांग को लेकर धरने पर बैठ गईं। उनके बेटे और राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी नीतीश के इस्तीफे की मांग की। लालू यादव ने भी ऐसा ही किया। कांग्रेस भी इस मांग का समर्थन कर रही है।

चुनाव रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर- जिन्होंने कभी नीतीश के साथ मिलकर काम किया था- ने कहा कि सीएम शारीरिक रूप से थके हुए और मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। नीतीश पर दबाव बढ़ाया जा रहा है कि वे सीएम की कुर्सी को किसी और के लिए छोड़ दें।

यह पहली बार नहीं है, जब नीतीश कुमार ने सार्वजनिक रूप से अजीब व्यवहार किया हो। उनके मानसिक स्वास्थ्य के बारे में पहला सार्वजनिक बयान भाजपा नेता सुशील मोदी ने 2023 में दिया था। उन्होंने कहा था, मुझे लगता है नीतीश किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। सुशील कई सालों तक नीतीश के डिप्टी सीएम रहे थे। उनके बीच एक दुर्लभ तालमेल था और वे एक टीम के रूप में अच्छा काम करते थे।

लेकिन आज बिहार में एक विचित्र स्थिति बनी हुई है। नीतीश पटना में सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। उन पर 13 करोड़ बिहारियों के हितों के संरक्षण की जिम्मेदारी है और इसके लिए ही उन्हें जनादेश दिया गया था। ऐसे में विपक्ष ने सही सवाल उठाया है कि क्या उन्हें राज्य पर शासन करना जारी रखना चाहिए? इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या उनकी उचित स्वास्थ्य देखभाल नहीं की जानी चाहिए? इस बारे में एक मेडिकल-ओपिनियन भी लिया जा सकता है कि क्या वे एक संवैधानिक पद सम्भालने के लिए फिट हैं?

नीतीश कुमार की अपनी खामियां रही हैं और वे भाजपा और राजद के बीच झूलते रहे हैं। लेकिन भाजपा और राजद के साथ गठबंधनों में जूनियर पार्टनर होने के बावजूद वे मुख्यमंत्री की कुर्सी अपने पास रखने में कामयाब रहे थे।

भले ही उनका जनाधार कम हुआ है, लेकिन नीतीश की प्रासंगिकता बनी हुई है। उनकी अपनी जाति कुर्मी, कोइरी समुदाय का समर्थन और अत्यंत पिछड़ी जातियों, महादलितों और पसमांदा मुसलमानों का समर्थन भी उनके पास है।

इंडिया गठबंधन में कई लोगों को लगता है कि अगर नीतीश को 2023 में गठबंधन का नेता बनाया गया होता, तो वे 2024 के लोकसभा चुनावों में जीत सकते थे। लेकिन नीतीश के नाम को ममता बनर्जी ने खारिज कर दिया था और कांग्रेस दुविधा में थी। अब जब यही विपक्ष नीतीश के इस्तीफे के लिए दबाव बना रहा है, तो भाजपा के लिए नीतीश को सत्ता में बने रहने देना सुविधाजनक होगा।

इस समय कोई भी अदला-बदली एनडीए को कमजोर कर सकती है और वह भी चुनावों से पहले। भाजपा चुनावों के बाद स्थिति की समीक्षा कर सकती है और अगर एनडीए जीतता है तो वह सीएम पद के लिए अपना दांव पेश कर सकती है।

वर्तमान में बिहार में नीतीश सरकार गिरने पर राष्ट्रपति शासन भी लग सकता है। इससे भी भाजपा को ही फायदा होगा। फिलहाल, भाजपा आलाकमान लल्लन सिंह और संजय झा के साथ मिलकर जदयू के साथ अनिश्चित स्थिति का प्रबंधन कर रहा है। ये दोनों ही नीतीश कुमार के करीबी रहे हैं।

नीतीश बिहार में सबसे लंबे समय तक राज करने वाले सीएम रहे हैं और उन्होंने वहां जंगल-राज के बजाय सुशासन-राज कायम करने के प्रयास किए हैं। आज उन्हें जिस तरह का अपमान झेलना पड़ रहा है, वे उससे बेहतर के हकदार हैं।

(ये लेखिका के अपने विचार हैं)

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *