पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  ऐसी सफलता अर्जित करो, जो कुसंग से मुक्त हो
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: ऐसी सफलता अर्जित करो, जो कुसंग से मुक्त हो

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3 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

जश्न और भीड़ का पुराना नाता है। फिर भीड़ बेकाबू हो जाती है। दरअसल, भीड़ बेकाबू हो नहीं जाती, भीड़ बेकाबू ही होती है। इससे दुर्घटनाएं होती हैं। पिछले दिनों हमारे देश ने ऐसी ही एक दुर्घटना में युवा वर्ग को बड़ी संख्या में खो दिया। जैसे विचारों की भीड़ एकाग्रता की शक्ति को खत्म करती है, ऐसे ही लोगों की भीड़ जीवन की शांति को भंग करती है।

अगर हम अपने बच्चों की बात करें तो उन्हें स्वतंत्रता तो दें, पर भीड़ का हिस्सा न बनाएं। उन्हें मानसिक स्वास्थ्य के लिए जागरूक करें, क्योंकि वो अकेलेपन और कुसंग के शिकार हैं। देश के 70% युवा सोशल मीडिया पर समय बिता रहे हैं। जो समय बचता है, उसमें वो या तो कुसंग करते हैं, या भीड़ का हिस्सा बन जाते हैं।

हमें बच्चों को बताना पड़ेगा कि भीड़ अब सुरक्षित नहीं रही। लोगों की वृत्ति में आक्रामकता आ गई है। धक्का देकर, रौंदकर आगे बढ़ने की तासीर हो गई है लोगों की। ऐसे में ऐसी दुर्घटनाएं होंगी। तो हम अपने बच्चों की रुचि से ज्यादा उनकी योग्यता पर काम करें। उनको आभास कराएं कि जीवन में ऐसी सफलता अर्जित करो, जो कुसंग से मुक्त हो।

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