पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  शिव और पार्वती से सीखें वार्तालाप की मधुरता
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: शिव और पार्वती से सीखें वार्तालाप की मधुरता

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2 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

पति-पत्नी एक-दूसरे से बातचीत में कैसा व्यवहार करें, इसका असर परिवार और समाज पर पड़ता है। रामकथा में जब काकभुशुण्डि का प्रसंग आया- पार्वती जी प्रश्न पूछ रही थीं, शिव जी उत्तर दे रहे थे और यही रामकथा है- तो उस प्रसंग में पार्वती जी के प्रश्न पूछने का ढंग ऐसा था कि शिव जी प्रभावित हुए।

तुलसीदास जी ने लिखा- गौरि गिरा सुनि सरल सुहाई। बोले सिव सादर सुख पाई।। पार्वती जी की सरल-सुंदर वाणी सुनकर शिव जी सुख पाकर आदर के साथ बोले। अब इसमें जितने शब्द तुलसीदास जी ने प्रयोग किए हैं, वो पति-पत्नी के वार्तालाप के सम्बंधों पर बहुत अच्छा संकेत हैं।

पिछले दिनों ऑस्ट्रेलिया की यात्रा पर कुछ लोगों ने चिंता व्यक्त की कि इस देश में पति-पत्नी अपने सम्बंधों में आपस में बहुत आक्रामक हो गए हैं। तो मैं सोच रहा था ऐसा तो भारत में भी है। कुछ पति-पत्नी के रिश्ते कभी-कभी उग्र हो जाते हैं। वार्तालाप कितना मधुर रखना है, यह शिव-पार्वती से सीख सकते हैं।

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