पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  कर्मयोग के देश में क्यों पसर गई है अकर्मण्यता?
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: कर्मयोग के देश में क्यों पसर गई है अकर्मण्यता?

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5 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

जिस देश में श्रीकृष्ण ने कर्मयोग पर गीता बोली हो, वहां अकर्मण्यता के दृश्य जब देखने को मिलते हैं तो लगता है एक नई महाभारत शुरू हो रही है। पहले बाजार के विज्ञापन लोभ में डालते थे, और अब राजनेताओं के विज्ञापन लोभ और मोह दोनों में पटक देते हैं।

गांव की चाय की दुकान पर भी यही समस्या है कि काम करने वाले लोग मिलते नहीं, और बड़े से बड़े ढाबे में भी यही दिक्कत है कि कहां गए वो लोग जो काम किया करते थे। बेरोजगारी से ज्यादा झटका तो राजनीतिक रेवड़ियों ने दे दिया। हमारे देश में कर्मयोग को पूजा माना गया। लेकिन आज अकर्मण्यता ऐसी पसर गई कि समझ नहीं आता, आने वाले समय में हम अकर्मण्य, निकम्मे लोगों का बोझ कैसे सहेंगे।

अपने देश में 80 करोड़ लोगों के पास इतना भी साधन नहीं कि वे ठीक से पेट भर सकें। तो उन्हें भीख, दान, सहयोग, सहायता, ये देने के ढंग और भी हो सकते हैं। पर उन्हें अकर्मण्य न बनाया जाए। कुछ लोग परिश्रम की अति कर रहे हैं, और कुछ निकम्मेपन की चरम सीमा पर हैं। ऐसा असंतुलन भारत जैसे धार्मिक देश के लिए ठीक नहीं।

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