पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  लोगों को सिखाते हुए काम करें, महारत हासिल होगी
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: लोगों को सिखाते हुए काम करें, महारत हासिल होगी

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4 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

एक होता है ज्ञान। शास्त्रों में परम ज्ञान भी बताया गया है। श्रीकृष्ण ने अर्जुन से गीता में परम ज्ञान पर बात की है। परम ज्ञान की सीधी समझ ये है कि अनदेखे के अर्थ को जान लेना। हमारे जीवन में परम ज्ञान की स्थिति कैसे बने? योग्यता और दक्षता जब मिल जाती हैं तो उसे महारत कहते हैं।

हमारे आसपास कई लोग हैं, जो अपने काम में महारत रखते हैं। महारत लंबे समय तक बची रहे इसलिए दूसरों को सिखाते रहें। जब भी कोई काम करें और आपके आसपास अधिक लोग हों, तो काम ऐसे ​करिए जैसे उन्हें सिखा रहे हैं। जब आप दूसरों को सिखाते हैं तो जितना वो सीखे उससे अधिक आप सीखते हैं। इसे रिवीजन कहते हैं।

अच्छी बात की पुनरावृत्ति हमारे भीतर जितनी बार होगी, हम उतने ही परम ज्ञान को उपलब्ध हो जाएंगे। फिर संसार में काम करते हुए हममें दक्षता आ जाएगी। किसी भी दृश्य और व्यक्ति के पीछे जो अनदेखा है वो दिखने लगेगा। अगर अज्ञात का थोड़ा भी आभास होने लगे तो हम जो भी काम करेंगे पूरी महारत से करेंगे।

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