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- Pt. Vijayshankar Mehta’s Column Focus On Existence, Not On Personality, You Will Find Peace
4 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
यदि किसी घटना पर हम अशांत और भयभीत होने लगे तो एक प्रयोग करिएगा। हमारे भीतर हम ही व्यक्ति हैं और हम ही मनुष्य भी हैं। व्यक्ति और मनुष्य में क्या अंतर है? व्यक्ति विचारों पर टिका है और मनुष्य चेतना पर।
व्यक्ति से व्यक्तित्व बनता है। व्यक्तित्व पर टिकेंगे तो अशांत होंगे। मनुष्य अस्तित्व से बनता है। अस्तित्व का संचालन चेतना से होता है। व्यक्तित्व पर टिककर आप परिश्रम करेंगे, अस्तित्व पर टिककर पुरुषार्थ भी करेंगे। व्यक्तित्व पर टिककर काम करेंगे तो केवल क्रिया होगी।
चेतना से काम करेंगे तो क्रिया में प्रभाव आएगा। जब कोई दिक्कत आए, उदासी घेरे तो प्रयोग करिए कि अपने भीतर के व्यक्तित्व से अस्तित्व पर जाएं। केवल शरीर पर टिकेंगे तो व्यक्तित्व समझ में आएगा। ये सोचेंगे कि हम एक आत्मा हैं और अभी इस शरीर में हैं तो अस्तित्व समझ में आएगा। यहीं से शांति उतरेगी। आत्मा ना तो अशांत होती है और ना भयभीत रहती है।








