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- Column By Pt. Vijayshankar Mehta The Bride And Groom Are The Form Of Lakshmi And Narayan
1 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
इन दिनों विवाह समारोहों में एक अलग ही दृश्य देखने को मिल रहा है। यदि आप समारोह में जाएं तो प्रश्न खड़ा होता है किसे दें आशीर्वाद। रिसेप्शन में जो समय लिखा है, उस पर वर और वधू के पते ही नहीं होते। घंटों प्रतीक्षा करनी पड़ती है उनको आशीर्वाद देने के लिए।
जिनके परिवारों में विवाह हो रहा है, और खासतौर पर नई पीढ़ी इस पर विचार करे कि जल्दी सोने-उठने वाली पीढ़ी का यह लास्ट बैच है। समारोह में जो अधिकांश लोग आते हैं वे या तो वृद्ध हैं या प्रौढ़ हैं, जिन्हें समय पर जाकर सोना है।
परिवार के लोग कहते हैं इसके पहले का कार्यक्रम विलंब से हुआ, इसलिए रिसेप्शन में दूल्हा-दुल्हन देर से आएंगे। यह तर्क भी दिया जाता है कि नई पीढ़ी के बच्चे कह रहे हैं बरात में समय लगेगा। शृंगार में भी जितना समय लेना है लेंगे। मेहमानों से हमें क्या लेना-देना? इस पीढ़ी को कौन समझाएगा कि हमारी संस्कृति में वर और वधू, लक्ष्मी और नारायण का रूप होते हैं।
जो आपको आशीर्वाद देने आए हैं, वो आपके देवतुल्य दर्शन भी करने आए हैं। समय का बड़ा मूल्य है। वरना दाम्पत्य जीवन में यह समय अपनी कीमत वसूलेगा।








