19 दिसंबर को पौष मास की अमावस्या:  पवित्र नदियों में स्नान और पितरों के लिए धूप-ध्यान करने की परंपरा, जानिए इस तिथि कौन-कौन से शुभ काम करें
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19 दिसंबर को पौष मास की अमावस्या: पवित्र नदियों में स्नान और पितरों के लिए धूप-ध्यान करने की परंपरा, जानिए इस तिथि कौन-कौन से शुभ काम करें

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5 घंटे पहले

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अभी पौष मास चल रहा है और इस मास की अमावस्या 19 दिसंबर की सुबह करीब 5 बजे शुरू होगी और अगले दिन 20 दिसंबर की सुबह करीब 7.10 बजे तक रहेगी। 19 दिसंबर को पूरे दिन ये तिथि रहेगी, इसलिए अमावस्या से जुड़े धर्म-कर्म इसी दिन करना ज्यादा श्रेष्ठ है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, अमावस्या तिथि पर भगवान शिव का अभिषेक खासतौर पर करना चाहिए। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और पितरों के लिए धूप-ध्यान करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा, कावेरी, गोदावरी, सरस्वती जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से जाने-अनजाने में किए गए सभी पाप कर्मों का फल नष्ट होता है। स्नान के बाद जरूरतमंद लोगों को खाना, अनाज, जूते-चप्पल, धन का दान करें।

जानिए पौष अमावस्या पर कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं…

जो लोग इस तिथि पर नदी स्नान नहीं कर पा रहे हैं, वे घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। स्नान करते समय तीर्थों का और पवित्र नदियों का ध्यान करना चाहिए। गंगाजल न हो तो सामान्य पानी को ही गंगाजल का स्वरूप मानकर स्नान कर सकते हैं।

अमावस्या के स्वामी पितर देव माने गए हैं, इसलिए इस तिथि पर पितरों के लिए धूप-ध्यान करते हैं। धूप-ध्यान के लिए सबसे अच्छा समय दोपहर का रहता है। दोपहर में गाय के गोबर से बने कंडे (उपले) जलाएं और कंडों के अंगारों पर पितरों का ध्यान करते हुए गुड़-घी डालें। ऊँ पितृदेवेभ्यो नम: मंत्र का जप करें। हथेली में जल लेकर अंगूठे की ओर से पितरों को अर्पित करें।

पौष अमावस्या पर पितरों के नाम पर तिल-गुड़, धन, कपड़े, जूते-चप्पल और खाना भी दान करना चाहिए।

अमावस्या पर सुबह जल्दी उठना चाहिए और ठीक सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए। उगते सूर्य की ओर मुंह करके तांबे के लोटे में भरा जल सूर्य देव को अर्पित करें। इस दौरान ऊँ सूर्याय नम: मंत्र जप करना चाहिए। आप चाहें तो गायत्री मंत्र का जप भी कर सकते हैं।

स्नान के बाद घर के मंदिर में या किसी अन्य मंदिर में भगवान शिव का अभिषेक करें। विधिवत पूजा नहीं कर पा रहे हैं तो शिवलिंग पर जल, दूध चढ़ाएं। चंदन का लेप लगाएं। बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूलों से शिवलिंग का श्रृंगार करें। धूप-दीप जलाकर आरती करें। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।

इस दिन पूजा कर करते समय गणेश मंत्र, गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, कृष्ण मंत्र, भगवान विष्णु, हनुमान मंत्र और नामों का जप कर सकते हैं।

  • गणेश मंत्र – श्री गणेशाय नम:
  • गायत्री मंत्र – ॐ भूर्भुवः स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।।
  • महामृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात।।
  • कृष्ण मंत्र – कृं कृष्णाय नम:
  • विष्णु मंत्र – ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय
  • राम मंत्र – रां रामाय नम:
  • हनुमान मंत्र – श्रीरामदूताय नम:

इस तिथि पर व्रत रखने की भी परंपरा है। भक्त दिनभर निराहार रहते हैं। शिव जी के साथ ही चंद्र देव की प्रतिमा की भी पूजा की जाती है। चंद्र देव की प्रतिमा न हो तो शिवलिंग पर स्थापित चंद्र की पूजा कर सकते हैं। चंद्र देव का दूध से अभिषेक करना चाहिए। चंद्र मंत्र ऊँ सों सोमाय नम: मंत्र का जप करना चाहिए।

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