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- Pt. Vijayshankar Mehta’s Column Every Performance Of People From Good Families Should Be Part Of Sanskar
2 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
अब सरेआम अमर्यादित आचरण करना एक फैशन जैसा हो गया है। कुछ युवक और युवतियां अनेक शहरों में सरेआम, सड़कों पर, बगीचों में, सार्वजनिक स्थलों पर अमर्यादित हुड़दंग करते पाए जा रहे हैं। इनमें से कुछ प्रतिष्ठित परिवारों के हैं, कुछ राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता हैं, कुछ सूचीबद्ध अपराधी हैं, जो बाद में अपने-अपने ढंग से इस अपराध से मुक्त भी हो रहे हैं।
कीमत समाज चुका रहा है। ये लोग स्वभाव से, परवरिश से ही आवारा होते जा रहे हैं। आजकल तो भिखारी भी भूखे नहीं मरता, लेकिन इसको समृद्धि नहीं कह सकते। यह भीख और भूख का नया रूप है। मानसिक गरीबी का नाम ही आवारागर्दी है।
फिल्मों में एक शब्द चलता है- स्टंट। यानी नाटकीय, शारीरिक करतब। इसको आपराधिक कौशल भी कह सकते हैं। यह मार्शल आर्ट का विकृत रूप है। और हमारे पढ़े-लिखे युवक-युवतियां आजकल सरेआम स्टंट दिखा रहे हैं। कुछ लोग कार में स्टंट दिखा रहे हैं, कुछ बेकार में स्टंट दिखा रहे हैं, कुछ सरकार में स्टंट दिखा रहे हैं। जबकि पढ़े-लिखे अच्छे घर के लोगों का हर प्रदर्शन संस्कार में होना चाहिए।








