पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  आज देश भी प्रसन्न है और सेना में तेज विराजा हुआ है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: आज देश भी प्रसन्न है और सेना में तेज विराजा हुआ है

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2 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

पहले मुकाबला योग्य लोगों से ही होता था। लेकिन इस दौर में अयोग्य लोगों से भी मुकाबला करना पड़ता है और तब चुनौती का स्वरूप बदल जाता है। पिछले दिनों जो गौरव हमारे देश को उपलब्ध हुआ, उसमें हनुमान जी को भी याद किया गया।

‘सिंदूर’ और हनुमान जी का बड़ा पुराना संबंध है। माता सीता को मांग में सिंदूर भरते देख हनुमान जी ने पूछा तो सीता जी ने उत्तर दिया- राम जी की आयु के लिए। बस, हनुमान जी ने तुरंत अपने शरीर पर सिंदूर पोत लिया। सिंदूर और हनुमान जी पर्याय हो गए। आज भी लोग हनुमान जी की प्रतिमाओं के सिंदूर को अपनी छाती, मस्तक पर लगाते हैं और उनको मनोबल प्राप्त होता है।

जब हनुमान जी लंका से लौटे तो वानरों ने उनको देखा और प्रसन्न हो गए। तब तुलसीदास जी ने एक पंक्ति लिखी- मुख प्रसन्न तन तेज बिराजा। हनुमान जी के चेहरे पर प्रसन्नता थी और तन में तेज था। इतना बड़ा काम करने के बाद भी थकावट के लक्षण नहीं थे। हमारे साथ भी ऐसा ही हुआ है। देश प्रसन्न है और सेना में तेज विराजा है।

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