पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  भोजन और नींद जैसी ही गम्भीरता श्रवण में भी रखें
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: भोजन और नींद जैसी ही गम्भीरता श्रवण में भी रखें

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3 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

संगीत सुनना भी एक प्रशिक्षण है, जो हमें शरीर से आगे बढ़कर आत्मा से जोड़ने के काम आता है। हमारे ऋषि-मुनियों ने नवधा भक्ति में श्रवण को भी एक भक्ति बताया है। क्योंकि वो जानते हैं सुनने से बहुत कुछ बदल सकता है।

अब सवाल यह कि क्या सुना जाए और कैसे सुना जाए। भजन, गीत, गजल, केवल इन्स्ट्रूमेंटल भी सुना जा सकता है। भोजन, नींद जैसी ही गम्भीरता श्रवण को लेकर की जाए। यदि आप ऊटपटांग सुन रहे हैं तो मानकर चलिए इसका असर सेहत पर पड़ेगा।

सुनने की भी समय-सीमा रखिए। लगातार किसी बात को सुनना अच्छे लक्षण नहीं हैं। थोड़ी-थोड़ी देर रुककर खुद से पूछें कि जो सुन रहे हैं, कैसा लग रहा है। इसलिए जिन्हें शांति की तलाश हो, वो अपने श्रवण समय पर भी ध्यान दें। कुछ न कुछ अच्छा सुनें। इसका अभ्यास बनाएं।

सुनने का एक और फायदा है। जब आप कुछ अच्छा सुनते हैं तो अच्छा बोलने भी लगते हैं। और किसी के भी अच्छे बोल किसी को अच्छे क्यों ना लगेंगे? इसलिए श्रवण को लेकर अत्यधिक गंभीर रहें और कुछ ना कुछ अच्छा सदैव सुनते रहें।

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