पीटर कर्षलैगर का कॉलम:  सोशल मीडिया के बाद एआई भी युवा पीढ़ी के लिए खतरा
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पीटर कर्षलैगर का कॉलम: सोशल मीडिया के बाद एआई भी युवा पीढ़ी के लिए खतरा

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11 घंटे पहले

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पीटर कर्षलैगर फेडरल इंस्टिटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी, ज्यूरिख में विजिटिंग प्रोफेसर - Dainik Bhaskar

पीटर कर्षलैगर फेडरल इंस्टिटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी, ज्यूरिख में विजिटिंग प्रोफेसर

28 फरवरी 2024 को फ्लोरिडा के एक 14 साल के किशोर सीवेल सेट्जर ने एक लाइफलाइक एआई कैरेक्टर के उकसावे पर आत्महत्या कर ली। यह एआई ​किरदार कैरेक्टर.एआई द्वारा निर्मित था। यही कंपनी कथित तौर पर प्रो-एनोरेिक्सया एआई चैटबॉट को भी होस्ट करती है, जो युवाओं में अव्यवस्थित खानपान की आदत को बढ़ावा देता है। मतलब साफ है, युवाओं और बच्चों को एआई से बचाने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता अब आन पहुंची है।

यह सच है कि एआई में मानव स्वास्थ्य और उसकी गरिमा को प्रोत्साहित करने से लेकर वंचित वर्ग में शिक्षा और स्थायित्व की बेहतरी के लिए जबरदस्त संभावना है। लेकिन इन लाभों की कीमत पर खतरों को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

मानवाधिकारों के हर उल्लंघन को नैतिक तौर पर अस्वीकार्य माना जाना चाहिए। यदि कोई एआई चैटबॉट किसी किशोर को आत्महत्या के लिए उकसाता है तो इसकी क्षतिपूर्ति यह कह कर नहीं की जा सकती कि दूसरी तरफ एआई मेडिकल रिसर्च को अत्याधुनिक करने में भी तो भूमिका निभा रहा है।

सेट्जर की आत्महत्या ही इस तरह का इकलौता मामला नहीं है। पिछले दिसंबर में भी अमेरिका के टेक्सास में दो परिवारों ने एक एआई कैरेक्टर और उसका वित्तपोषण करने वाले गूगल के खिलाफ मुकदमा किया था कि यह चैटबॉट उनके स्कूल जाने वाले बच्चों का मानसिक शोषण कर रहा है।

इसके चलते बच्चे हिंसक होकर खुद को नुकसान भी पहुंचाने लगे हैं। ऐसा ही हम अतीत में भी देख चुके हैं, जब सोशल मीडिया कंपनियों ने अपने लाभ के लिए अपने एडिक्टिव प्लेटफॉर्मों के जरिए किशोरों और बच्चों की पूरी एक पीढ़ी को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। धीरे-धीरे हम इसके प्रति जागरूक हो सके हैं। अब जाकर कई देशों ने इन पर पाबंदियां लगानी शुरू की हैं और खुद युवा अब कड़े नियामकों की मांग कर रहे हैं।

लेकिन हम एआई पर लगाम के लिए ज्यादा समय तक इंतजार नहीं कर सकते। टेक कंपनियों ने हमसे भारी मात्रा में पर्सनल डेटा हासिल कर लिया है। उनकी मदद से कैरेक्टर.एआई जैसे प्लेटफॉर्म ऐसे एल्गोरिदम तैयार कर सकते हैं, जो हमें स्वयं से भी अधिक जानने लगेंगे। इसके दुरुपयोग की गंुजाइश बहुत अधिक है।

वस्तुत: एआई अच्छी तरह से जानता है कि हमारी इच्छाओं को उभारने और हमसे कोई खास प्रकार का व्यवहार कराने के लिए कौन-सा बटन दबाना है। कैरेक्टर.एआई पर प्रो-एनोरेक्सिया जैसे चैटबॉट इसके ताजा और क्रूरतम उदाहरण है। कोई कारण नजर नहीं आता कि इनको तत्काल प्रतिबंधित क्यों नहीं किया जाए। जनरेटिव एआई मॉडल हमारी सोच से भी अधिक रफ्तार से विकसित हो रहे हैं और मोटे तौर पर ये गलत दिशा में अधिक जा रहे हैं।

एआई के गॉडफादर कहलाने वाले कॉग्निटिव वैज्ञानिक और नोबेल विजेता जैफ्री हिंटन ने लगातार चेताया है कि एआई मानव की विलुप्ति का कारण बन सकता है। उन्होंने कहा था कि मेरी चिंता यह है कि कोई अदृश्य हाथ हमें बचाने नहीं वाला।

यह काफी नहीं कि लाभ कमाने वाली कंपनियों पर ही यह छोड़ दिया जाए कि वे एआई को सुरक्षित तरीके से विकसित करेंगी। सरकारी नियमन ही उन्हें सुरक्षा मानकों पर अधिक शोध करने के लिए बाध्य कर सकते हैं।

नैतिक मानकों को बनाए रखने में बड़ी टेक कंपनियों की लगातार विफलता के बाद उनसे यह अपेक्षा रखना तो मूर्खता होगी कि वे खुद को नियंत्रित करेंगी। तमाम समस्याओं को जानने के बाद भी गूगल ने 2024 में कैरेक्टर.एआई में 2.7 अरब डॉलर लगाए।

चूंकि एआई एक वैश्विक परिदृश्य है, तो इसका मतलब है कि नियमन भी वैश्विक होने चाहिए। ये नियमन संयुक्त राष्ट्र की इंटरनेशनल डेटा बेस्ड सिस्टम एजेंसी (आईडीए) की भांति नई वैश्विक प्रवर्तन प्रणाली पर आधारित हों।

यह तय करना मनुष्यों की जिम्मेदारी है कि कौन-सी तकनीकें, इनोवेशन और प्रगति के कौन-से रूप साकार किए जाने चाहिए और कैसे उनका विस्तार हो। यह भी हमारी ही जिम्मेदारी है कि हम एआई को ऐसे तरीके से संचालित करें, जो मानवाधिकारों का सम्मान करे और मानवता व हमारे ग्रह के लिए अधिक सस्टेनेबल भविष्य की सुविधा प्रदान करे। (© प्रोजेक्ट सिंडिकेट)

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