पेरेंटिंग- 5 साल की बेटी बिस्तर गीला करती है:  क्या इस उम्र में बेडवेटिंग नॉर्मल है, क्या ये कोई मेडिकल इश्यू है, हम क्या करें
महिला

पेरेंटिंग- 5 साल की बेटी बिस्तर गीला करती है: क्या इस उम्र में बेडवेटिंग नॉर्मल है, क्या ये कोई मेडिकल इश्यू है, हम क्या करें

Spread the love


22 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

  • कॉपी लिंक

सवाल- मैं नागपुर से हूं। मेरी 5 साल की एक बेटी है। दिन के समय वह खुद बाथरूम चली जाती है और किसी तरह की दिक्कत नहीं होती है। लेकिन रात में वह अक्सर बिस्तर गीला कर देती है। यह पैटर्न पिछले कई महीनों से चलता आ रहा है। मैंने इसे मैनेज करने के लिए कई तरीकों को आजमाया। जैसे सोने से पहले उसे टॉयलेट कराना, रात में एक बार उठाकर बाथरूम ले जाना, सोने से कुछ समय पहले पानी कम देना, लेकिन इससे कोई खास सुधार नजर नहीं आया। मुझे पता है कि वह जानबूझकर ऐसा नहीं करती है। वह खुद भी सुबह गीला बिस्तर देखकर कभी-कभी परेशान हो जाती है। मेरा सवाल ये है कि क्या 5 साल की उम्र में नाइट-टाइम बेडवेटिंग सामान्य है या ये किसी मेडिकल कंडीशन की वजह से हो सकता है? इसके साथ ही मैं यह भी जानना चाहती हूं कि एक माता-पिता के रूप में मैं उसे बिना शर्मिंदा किए, बिना डांटे और बिना दबाव के प्यार व धैर्य के साथ कैसे उसकी मदद करूं, ताकि वह धीरे-धीरे इस आदत पर काबू पा सके? कृपया मुझे सही मार्गदर्शन दें।

एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर

डॉ. जितेन्द्र जैन, सीनियर कंसल्टेंट, नियोनेटोलॉजी, कोकून हॉस्पिटल, जयपुर

जवाब- मैं आपकी परेशानी को अच्छी तरह समझ सकती हूं। पेरेंट्स के लिए यह एक कॉमन और प्रैक्टिकल प्रॉब्लम है। हालांकि अच्छी बात यह है कि ज्यादातर बच्चे समय के साथ स्वाभाविक रूप से इस समस्या से बाहर निकल आते हैं। मेडिकल टर्म में रात के समय बिस्तर गीला करने को ‘नॉक्टर्नल एन्यूरिसिस’ या ‘बेडवेटिंग’ कहा जाता है।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP) के मुताबिक, 5 साल की उम्र के लगभग 20% बच्चे बेडवेटिंग की समस्या से प्रभावित होते हैं, जो सामान्य बात है। लेकिन अगर ये हफ्ते में कई बार हो रहा है तो कारणों के बारे में जानना जरूरी है। तो आइए, स्टेप-बाय-स्टेप इस समस्या को समझते हैं कि कारण क्या हैं, कब डॉक्टर से मिलें और क्या बदलाव लाकर आप उसे मदद कर सकती हैं।

बेडवेटिंग के मुख्य कारण

सबसे पहले जानते हैं कि बेडवेटिंग क्यों होती है। दरअसल 5 साल की उम्र में बच्चे का ब्लैडर कंट्रोल अभी डेवलप हो रहा होता है। वे 2-4 साल की उम्र में डे-टाइम कंट्रोल सीखते हैं। ऐसे में नाइट-टाइम कंट्रोल में डिले हो सकता है। इसका मुख्य कारण डीप स्लीप है। बच्चा इतनी गहरी नींद में होता है कि ब्लैडर फुल होने का सिग्नल नहीं जान पाता है। जेनेटिक्स भी इसमें रोल प्ले करता है। अगर पेरेंट्स में हिस्ट्री है तो रिस्क बढ़ जाता है।

इसके अन्य कारणों में कब्ज, एंग्जाइटी, स्ट्रेस, ज्यादा फ्लुइड इनटेक, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) या ब्लैडर इश्यूज शामिल हैं। अगर ये दिन में भी होता है तो सेकेंडरी एन्यूरिसिस हो सकता है, जो कि आंतरिक समस्या का संकेत हो सकता है।

कभी-कभी यह इमोशनल चेंजेस जैसे घर में शिफ्टिंग या स्कूल स्टार्ट होने से ट्रिगर होता है। साइकोलॉजी के अनुसार, बच्चे के ब्रेन और ब्लैडर के बीच कनेक्शन अभी मैच्योर हो रहा होता है, इसलिए यह एक फेज है। ऐसे समय में अगर इसे गलत तरीके यानी डांट-मारकर हैंडल किया जाए तो बच्चे का सेल्फ-एस्टीम कम हो सकता है।

बेडवेटिंग की समस्या से कैसे निपटें?

समाधान की बात करें तो सबसे महत्वपूर्ण है कि बच्ची को शर्मिंदा न करें। इसके बजाय उससे कहें कि “यह सामान्य बात है, हम साथ मिलकर इसे ठीक करेंगे।” इससे बच्ची बिना डर और शर्म के इस समस्या से लड़ सकेगी।

इसके अलावा ड्राई नाइट्स पर तारीफ और छोटे रिवॉर्ड्स दें। ब्लैडर ट्रेनिंग शुरू करें। दिन में हर 2-3 घंटे पर बाथरूम जाने की आदत डालें, भले जरूरत न हो। शाम 6 बजे बाद फ्लुइड की मात्रा कम करें, लेकिन पूरी तरह बंद न करें वरना डिहाइड्रेशन हो सकता है।

अगर समस्या लंबे समय से बनी है तो बेडवेटिंग अलार्म यूज करें। यह गीला होने पर बजता है और बच्चे को ट्रेन करता है। बेडटाइम रूटीन में स्टोरी टाइम या रिलैक्सेशन एक्सरसाइज शामिल करें ताकि स्ट्रेस कम हो। इन बदलावों से 2-3 महीनों में सुधार दिख सकता है। साथ ही कुछ और बातों का भी ख्याल रखें।

हालांकि अगर यह समस्या लगातार बनी रहे, दिन में भी हो या अन्य संकेत (जैसे पेशाब करते समय दर्द-जलन, थकान, वजन कम होना) दिखें तो एक बार पीडियाट्रिशियन या यूरोलॉजिस्ट से सलाह जरूर लें। इसे अनदेखा करने से समस्या बढ़ सकती है।

बच्चों के साथ न करें ये गलतियां

पेरेंट्स अक्सर इस समस्या से निजात पाने के लिए बच्चों को डांटते-मारते हैं, उसे शर्मिंदा करते हैं। ये सबसे बड़ी गलती है क्योंकि इससे समस्या और बढ़ सकती है। इसके अलावा दूसरे बच्चों से तुलना न करें। जैसे “देखो, तुम्हारी कजिन तो नहीं करती।” यह सेल्फ-एस्टीम कम करता है।

पानी बहुत कम कर देना भी गलत है क्योंकि इससे अन्य हेल्थ इश्यूज हो सकते हैं। समस्या को इग्नोर न करें, लेकिन ओवररिएक्ट भी न करें। हमेशा प्यार से हैंडल करें। रात को बच्चे को जगाते हैं तो सावधानी बरतें, वरना नींद डिस्टर्ब होगी। अगर कोई इमोशनल इश्यू लगे, जैसे स्कूल का डर या तनाव तो चाइल्ड काउंसलर से बात करें। साथ ही पेरेंट्स को कुछ और भी गलतियां नहीं करनी चाहिए।

अंत में मैं यही कहना चाहूंगी कि आपकी बेटी अभी बहुत छोटी है और इस उम्र में बेडवेटिंग बिल्कुल आम बात है। यह एक ऐसी स्थिति है, जो अक्सर बच्चे समय, विकास और माता-पिता के सपोर्ट के साथ खुद-ब-खुद ठीक कर लेते हैं। फिर भी एहतियात के तौर पर एक बार डॉक्टर से मिलकर संभावित मेडिकल कारण की जांच करा लेना समझदारी होगी। इससे आपको मन की शांति भी मिलेगी और सही गाइडेंस भी।

साथ ही छोटे-छोटे पॉजिटिव बदलाव (जैसे उसे भरोसा देना, शर्म या डर महसूस न होने देना और हर सुबह बिना किसी कमेंट के स्थिति को सामान्य तरीके से हैंडल करना) उसके आत्मविश्वास को मजबूत करेंगे। याद रखें, पेरेंटिंग में धैर्य और प्यार से हर समस्या सुलझ जाती है। आप पहले से ही एक बहुत जागरूक और संवेदनशील पेरेंट हैं, जो समय रहते समस्या को पहचानकर सही समाधान खोज रही हैं।

………………………

पेरेंटिंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए

पेरेंटिंग- 5 साल का बेटा रात में सोता नहीं: 12 बजे तक जागता रहता है, दिख रही थकान, चिड़चिड़ाहट, उसका स्लीप साइकल कैसे सुधारें

इस उम्र में बच्चे फिजिकली और मेंटली दोनों रूप से बहुत तेजी से ग्रोथ कर रहे होते हैं। पर्याप्त नींद न मिलने से बच्चे के मूड, अटेंशन और इम्यून सिस्टम पर नेगेटिव प्रभाव पड़ता है। इस समस्या के समाधान को जानने से पहले इसके कारणों को आइडेंटिफाई करें। पूरी खबर पढ़िए…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *