![]()
प्राइवेट एविएशन यानी निजी विमानन का क्षेत्र अब डिजिटल क्रांति की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। जो काम पहले घंटों और दिनों की बातचीत के बाद होता था, वह अब स्मार्टफोन के एक क्लिक पर सिमट गया है। फ्लाईहाउस, जेटली और लेवो डॉट एयरो जैसे नए स्टार्टअप के साथ व्हील्स अप और एक्सओ जैसे पुराने खिलाड़ी ऐसे एप लेकर आए हैं, जो महज 30 सेकंड में प्राइवेट जेट बुक करने का वादा करते हैं। एविएशन एक्सपर्ट के मुताबिक पारंपरिक रूप से प्राइवेट जेट बुक करना एक सिरदर्द भरा काम रहा है। इसमें किसी ब्रोकर को कॉल करना, बजट पर चर्चा करना और फिर ब्रोकर द्वारा एयरक्राफ्ट मालिकों से संपर्क करने की लंबी प्रक्रिया होती थी। इसमें कई बार सही विमान ढूंढने में कई दिन तक लग जाते थे और कीमतें भी पारदर्शी नहीं होती थीं। नए एप्स इस पूरी प्रक्रिया से ‘मिडलमैन’ यानी ब्रोकर को हटा रहे हैं। फ्लाईहाउस के फाउंडर सैनफोर्ड मिचेलमैन कहते हैं, ‘अब कोई दूसरा मेरे लिए विमान नहीं चुन रहा है। मेरे पास रियल-टाइम में ढेरों विकल्प हैं और चूंकि ब्रोकर की फीस नहीं है, इसलिए कीमतें भी कम हैं।’ कंपनी ने एक ‘रिवर्स ऑक्शन’ मॉडल पेश किया है, जहां विमान मालिक बिजनेस पाने के लिए अपनी कीमतें कम करते हैं, जिसे यूजर लाइव देख सकते हैं। डिजिटल क्रांति के बावजूद, कुछ विशेषज्ञ अब भी पुराने तरीके को बेहतर मानते हैं।’ प्राइवेट जेट कार्ड कंपैरिजन के संपादक डग गोलन का कहना है कि एक अनुभवी ब्रोकर विमान की बारीकियों के बारे में एप से बेहतर जानकारी दे सकता है। बड़ी सुविधा, पूरी फ्लाइट नहीं, सिर्फ एक सीट भी बुक करने की आजादी फ्रेंडशेयर- फ्लाई हाउस का नया फीचर यूजर्स को समान रुचि वाले लोगों के साथ मिलकर पूरी फ्लाइट के बजाय सिर्फ पसंद की सीटें बुक करने की सुविधा देता है। एक्सओ का नेटवर्क – विस्टा ग्लोबल की यूनिट 2,000 से अधिक विमानों के डेटा और एल्गोरिदम का उपयोग करती है, जिससे वे 96% सटीक और गारंटीड कीमतें दे पाते हैं। हाइब्रिड मॉडल- व्हील्स अप ने अपने एप में निजी जेट के साथ कमर्शियल उड़ानों को भी जोड़ दिया है, ताकि सदस्य अपनी जरूरत के हिसाब से यात्रा चुन सकें। बुकिंग से पहले एआई अब फ्यूल कैपेसिटी, एयरपोर्ट नियम जांच रहा एलीवेट जेट जैसी कंपनियां बुकिंग प्रक्रिया में एआई का इस्तेमाल कर रही हैं। यह सिस्टम न केवल विमान बुक करता है, बल्कि यह भी जांचता है कि वह विमान उस खास रूट पर उड़ान भर सकता है या नहीं। इसमें ईंधन की क्षमता, क्रू की सीमा और एयरपोर्ट की पाबंदियों का रियल-टाइम डेटा विश्लेषण किया जाता है। कंपनी के सीईओ ग्रेग रैफ के मुताबिक, ‘हम उन पेचीदगियों को पहले ही पकड़ लेते हैं जो अक्सर ब्रोकर छिपा जाते हैं।’
Source link








