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- Cigarette Prices To Rise From Feb 1: Govt Hikes Excise Duty; ITC And Godfrey Phillips Shares Drop Dainik Bhaskar
नई दिल्ली2 दिन पहले
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पूरी दुनिया में हर साल सिगरेट पीने की वजह से 80 लाख से ज्यादा लोगों की प्रीमेच्योर डेथ होती है। वहीं भारत में हर साल स्मोकिंग के कारण 10 लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है।
अगले महीने से सिगरेट की कीमतें 20% तक बढ़ सकती है। इसकी वजह है सरकार की और से लगाई गई एक्साइज ड्यूटी। इसे लेकर 31 दिसंबर को एक नोटिफिकेशन जारी किया है।
इसके मुताबिक 1 फरवरी 2026 से सिगरेट की प्रति 1,000 स्टिक्स पर 2,050 रुपए से लेकर 8,500 रुपए तक की ड्यूटी ली जाएगी। बाजार जानकारों का कहना है कि टैक्स के इस बोझ को कम करने के लिए कंपनियां सिगरेट की कीमतें बढ़ा सकती है।
सरकार ने सेस खत्म किया तो ड्यूटी बढ़ा दी
सिगरेट पर अभी तक 28% GST के साथ ‘कंपनसेशन सेस’ लगता था। इससे कुल टैक्स 50% से ज्यादा हो जाता था। 3 सितंबर को किए गए बदलाव के बाद सिगरेट पर GST को बढ़ाकर 40% कर दिया गया, लेकिन सेस हटा दिया। नई दरें फरवरी 2026 से लागू होंगी।
अगर सरकार एक्साइज को लेकर कुछ नहीं करती तो सिगरेट सस्ती हो जाती। रेवेन्यू बचाने के लिए सरकार ने सेस की जगह अब परमानेंट एक्साइज ड्यूटी लगा दी है। नई दरें ₹2,050 से लेकर ₹8,500 प्रति 1,000 सिगरेट तय की गई हैं, जो पुराने टैक्स के मुकाबले काफी ज्यादा हैं।
इंटरनेशनल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के मुताबिक नए टैक्स स्ट्रक्चर से कुल टैक्स बोझ 20% से 30% तक बढ़ सकता है। ऐसे में कंपनियों को बढ़ोतरी का पूरा बोझ कंज्यूमर्स पर डालने के लिए सिगरेट की कीमतें कम से कम 15% बढ़ानी पड़ सकती हैं। हो सकता है इससे भी ज्यादा बढ़ानी पड़े।
सिगरेट के दाम क्यो बढ़ सकते हैं, 2 कारण
1. ज्यादा एक्साइज ड्यूटी: सरकार ने जो एक्साइज ड्यूटी लगाई है, वह पुराने सेस के मुकाबले ज्यादा है। सरल शब्दों में कहे- अगर सरकार ने ₹5 का सेस खत्म किया है, तो उसकी जगह ₹8 की एक्साइज ड्यूटी लगा दी है। यानी टैक्स का ‘नेट’ बोझ कम होने के बजाय बढ़ गया है।
2. ‘डबल टैक्स’ का असर: एक्साइज ड्यूटी मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट में जुड़ती है। जब सिगरेट फैक्ट्री से निकलती है, तो उस पर एक्साइज लग चुका होता है। इसके बाद जब उस पर GST लगाया जाता है, तो वह ‘बढ़ी हुई कीमत’ (जिसमें एक्साइज शामिल है) पर लगता है। इससे ‘टैक्स पर टैक्स’ की स्थिति बनती है और फाइनल MRP बढ़ जाती है।
इसे एक उदाहरण से समझें
मान लीजिए एक सिगरेट की स्टिक पर पहले कुल टैक्स (GST+Cess) ₹6 था। अब सेस खत्म हुआ (-₹2) लेकिन नई एक्साइज ड्यूटी लग गई (+₹4)। अब कुल टैक्स ₹8 हो गया। यानी टैक्स में ₹2 की बढ़ोतरी हुई, जिसके कारण ₹15 वाली सिगरेट ₹17 या ₹18 की हो जाएगी।
ITC के शेयर 6 साल में सबसे ज्यादा गिरे
टैक्स बढ़ने की खबर का असर शेयर बाजार पर भी दिखा। देश की सबसे बड़ी सिगरेट कंपनी ITC के शेयर आज 10% तक टूट गए। साल 2020 के बाद यह कंपनी के शेयरों में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। वहीं, मार्सबोरो जैसे ब्रांड बेचने वाली कंपनी गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयर भी 17.6% तक लुढ़क गए। निवेशकों को डर है कि कीमतें बढ़ने से सिगरेट की बिक्री घटेगी।

अमेरिकी टैरिफ और घरेलू टैक्स में कटौती की भरपाई की कोशिश
सरकार का यह कदम सरकारी खजाने को भरने की एक कोशिश माना जा रहा है। क्योंकि सितंबर में सरकार ने घरेलू खपत बढ़ाने के लिए कई उत्पादों पर GST में कटौती की थी।
साथ ही, अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50% टैरिफ के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार अब ‘सिन गुड्स’ (तंबाकू और सिगरेट) पर टैक्स का बोझ बढ़ा रही है।
भारत में 25.3 करोड़ स्मोकर्स
दुनिया में सबसे अधिक तंबाकू का सेवन करने वाले देशों की लिस्ट में चीन के बाद भारत दूसरे नंबर पर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, भारत में 15 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 25.3 करोड़ लोग स्मोकिंग करते हैं। इनमें लगभग 20 करोड़ पुरुष हैं और 5.3 करोड़ महिलाएं हैं।
भारत में सिगरेट से हर साल 10 लाख लोगों की मौत
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, पूरी दुनिया में हर साल सिगरेट पीने की वजह से 80 लाख से ज्यादा लोगों की प्रीमेच्योर डेथ होती है। वहीं भारत में हर साल स्मोकिंग के कारण 10 लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है।
इसमें अगर अन्य तंबाकू उत्पादों के सेवन के कारण हुई मौतों के आंकड़े भी जोड़ दिए जाएं तो भारत में हर साल लगभग 13.5 लाख लोगों की मौत तंबाकू के सेवन के कारण होती है।
लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज के मुताबिक सिगरेट पीने से लोगों की लाइफ एक्सपेक्टेंसी तेजी से घट रही है। एक सिगरेट पीने से जिंदगी के 20 मिनट कम हो रहे हैं।
अगर कोई 10 साल तक रोज 10 सिगरेट पी रहा है तो इसका मतलब है कि उसकी जिंदगी के 500 दिन कम हो गए हैं।
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3 सितंबर से GST में बदलाव के ऐलान के बाद सिगरेट और गुटखा जैसे तंबाकू प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ने वाले हैं, जबकि, बीड़ी के दाम में थोड़ी सी कमी आएगी। बीड़ी पर जीएसटी पहले 28% था जिसे घटाकर 18% कर दिया गया है। बीड़ी बनाने में इस्तेमाल होने वाले तेंदू पत्तों पर GST 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है।
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