फिजिकल हेल्थ- गर्मियों में हाइपरनेट्रेमिया का रिस्क:  इन 5 कारणों से बढ़ता ब्लड में सोडियम, 9 संकेत इग्नोर न करें, जानें कैसे बचें
महिला

फिजिकल हेल्थ- गर्मियों में हाइपरनेट्रेमिया का रिस्क: इन 5 कारणों से बढ़ता ब्लड में सोडियम, 9 संकेत इग्नोर न करें, जानें कैसे बचें

Spread the love


  • Hindi News
  • Lifestyle
  • Hypernatremia Reason; Symptoms Causes Treatment Tips | Serum Sodium Imbalance

58 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

  • कॉपी लिंक

गर्मियों की तेज धूप के कारण शरीर के अंदर कई बदलाव होते हैं। इनमें से एक है ‘हाइपरनेट्रेमिया’ यानी ब्लड में सोडियम का बढ़ना। यह कंडीशन अक्सर नजरअंदाज हो जाती है, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर गंभीर समस्या बन सकती है।

हाइपरनेट्रेमिया में शरीर में पानी की कमी हो जाती है और ब्लड में सोडियम का लेवल बढ़ने पर कई दिक्कतें होती हैं। इससे बहुत प्यास लगती है, कमजोरी होती है और चक्कर आते हैं। हीटवेव के दौरान इसका रिस्क कई गुना बढ़ जाता है।

इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज हाइपरनेट्रेमिया की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • हाइपरनेट्रेमिया क्यों होता है?
  • इसके लक्षण क्या हैं?
  • इससे कैसे बचा जा सकता है?

सवाल- हाइपरनेट्रेमिया क्या है?

जवाब- हाइपरनेट्रेमिया एक मेडिकल कंडीशन है, जिसमें ब्लड में सोडियम का लेवल सामान्य से ज्यादा हो जाता है।

  • ब्लड में सोडियम का नॉर्मल लेवल 135–145 mEq/L (ब्लड में मौजूद आयन मापने की यूनिट) होता है।
  • जब यह 145 mEq/L से ज्यादा हो जाए, तो उसे हाइपरनेट्रेमिया कहते हैं।

सवाल- हाइपरनेट्रेमिया क्यों होता है?

जवाब- शरीर में पानी की कमी या ब्लड में सोडियम की मात्रा बढ़ने पर हाइपरनेट्रेमिया होता है। इसके मुख्य कारण ग्राफिक में देखिए-

सवाल- गर्मियों में हाइपरनेट्रेमिया का रिस्क क्यों बढ़ जाता है?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • गर्मियों में ज्यादा पसीना आने से बॉडी डिहाइड्रेट हो जाती है।
  • इससे ब्लड में सोडियम का कॉन्संट्रेशन बढ़ जाता है।
  • गर्मियों में डायरिया, उल्टी या डायबिटीज इंसिपिडस (एक मेडिकल कंडीशन है, जिसमें बार-बार बहुत ज्यादा पेशाब आती है और लगातार प्यास लगती रहती है।) जैसी कंडीशंस ज्यादा हाेती हैं। इसलिए यह समस्या ज्यादा होती है।
  • धूप में काम या एक्सरसाइज करने से भी इसका रिस्क बढ़ जाता है।

सवाल- हाइपरनेट्रेमिया के संकेत क्या हैं?

जवाब- हाइपरनेट्रेमिया में शरीर में पानी की कमी और ब्रेन पर असर से कुछ लक्षण दिखाई देते हैं। सभी संकेत ग्राफिक में देखिए-

सवाल- हाइपरनेट्रेमिया होने पर व्यक्ति को कब तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए?

जवाब- हाइपरनेट्रेमिया में हर केस इमरजेंसी नहीं होता, लेकिन कुछ कंडीशंस में तुरंत हॉस्पिटल ले जाना जरूरी है। जैसेकि-

  • जब व्यक्ति को बेहोशी या बहुत ज्यादा सुस्ती लगे।
  • बार-बार दौरे पड़ें।
  • भ्रम की स्थिति बने या अजीब व्यवहार दिखे।
  • बहुत ज्यादा प्यास लगे, लेकिन पानी न पी पाए ।
  • तेज बुखार और ज्यादा कमजोरी महसूस हो।
  • दिल की धड़कन तेज हाे या सांस लेने में दिक्कत हो।
  • यूरिन बहुत कम आए या बंद हो जाए।
  • बुजुर्ग, बच्चे या पहले से बीमार व्यक्ति काे तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

सवाल- किन लोगों को हाइपरनेट्रेमिया का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- कुछ लोगों को इसका रिस्क ज्यादा होता है, ग्राफिक में देखिए-

सवाल- हाइपरनेट्रेमिया का इलाज क्या है?

जवाब- इसके इलाज में पानी और सोडियम के बीच बैलेंस बनाया जाता है। इसके लिए-

  • धीरे-धीरे पानी की कमी पूरी की जाती है।
  • पेशेंट्स को ओरल (पानी/ORS) या IV फ्लूइड्स फ्लूइड्स दिए जाते हैं।
  • सोडियम को बहुत तेजी से कम करना खतरनाक हो सकता है, इसलिए इलाज धीरे-धीरे किया जाता है।
  • हल्के मामलों में पर्याप्त पानी पीना ही काफी होता है।

इसके साथ हाइपरनेट्रेमिया की वजह का भी ट्रीटमेंट किया जाता है-

  • डायरिया/उल्टी हो तो उसका इलाज।
  • डायबिटीज इंसिपिडस का मैनेजमेंट।
  • बुखार या संक्रमण का ट्रीटमेंट।
  • इलेक्ट्रोलाइट्स की निगरानी।
  • खून में सोडियम और अन्य इलेक्ट्रोलाइट्स का रेगुलर टेस्ट।

सवाल- क्या हाइपरनेट्रेमिया लाइफ थ्रेटनिंग भी हो सकता है?

जवाब- हां, यह लाइफ थ्रेटनिंग हो सकता है, खासकर जब इसका लेवल (सोडियम) बहुत ज्यादा बढ़ जाए या इलाज में बहुत देर हो जाए।

  • जब ब्लड में सोडियम बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो यह ब्रेन की सेल्स को प्रभावित करता है।
  • इससे कन्फ्यूजन, चक्कर, और बेहोशी हो सकती है।
  • गंभीर स्थिति में दौरे पड़ सकते हैं।
  • यह ब्रेन शिंक और न्यूरोलॉजिकल डैमेज का कारण बन सकता है।
  • समय पर इलाज न मिले तो पेशेंट कोमा तक जा सकता है।
  • गंभीर मामलों में मौत भी हो सकती है।

सवाल- क्या हीटवेव के दौरान इसके केस बढ़ते हैं?

जवाब- हां, हीटवेव के दौरान इसके केस बढ़ जाते हैं। पॉइंट्स में समझें-

  • हीटवेव में ज्यादा पसीना आता है, जिससे शरीर से पानी तेजी से निकलता है।
  • पर्याप्त पानी न पीने पर डिहाइड्रेशन हो जाता है, जो इसका मुख्य कारण है।
  • गर्मी में लंबे समय तक रहने या धूप में काम करने से फ्लूइड लॉस बढ़ जाता है।
  • बुजुर्ग, बच्चे और बीमार लोग हीटवेव में जल्दी डिहाइड्रेट हो जाते हैं।
  • हीटवेव के दौरान प्यास लगने के बावजूद पानी कम पीना भी एक आम समस्या है।
  • कुछ मामलों में हीटवेव के साथ हीट स्ट्रोक भी हो सकता है, जो स्थिति को और गंभीर बना देता है।

सवाल- क्या सिर्फ पानी कम पीने से यह समस्या हो सकती है?

जवाब- हां, सिर्फ पानी कम पीने से भी हाइपरनेट्रेमिया हो सकता है, खासकर कुछ कंडीशंस में। पॉइंट्स में समझें-

  • जब व्यक्ति पर्याप्त पानी नहीं पीता, तो शरीर में पानी की कमी हो जाती है।
  • पानी कम होने से ब्लड में सोडियम की मात्रा बहुत बढ़ जाती है।
  • यह समस्या खासकर गर्मियों या हीटवेव में ज्यादा होती है।
  • बुजुर्ग, छोटे बच्चे या जो खुद से पानी नहीं पी पाते, उन्हें रिस्क ज्यादा होता है।
  • अगर इसके साथ पसीना, बुखार भी हो तो स्थिति जल्दी बिगड़ सकती है।
  • हालांकि कई मामलों में सिर्फ पानी की कमी के अलावा अन्य कारण जैसे डायरिया, उल्टी भी हो सकते हैं।

सवाल- हाइपरनेट्रेमिया से बचाव के लिए क्या करें?

जवाब- हाइपरनेट्रेमिया से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है शरीर में पानी और सोडियम का बैलेंस बनाए रखना। बचाव के सभी उपाय ग्राफिक में देखिए-

कुछ पॉइंट्स विस्तार से समझें-

1. शरीर को हाइड्रेट रखें

  • दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीते रहें।
  • प्यास लगने का इंतजार न करें।
  • बाहर निकलने से पहले और लौटने के बाद पानी जरूर पिएं।

2. इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखें

  • ORS, नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी को डाइट में शामिल करें।
  • ज्यादा पसीना आने पर सिर्फ पानी नहीं, इलेक्ट्रोलाइट्स भी जरूर लें।

3. गर्मी और धूप से बचाव करें

  • दोपहर (12-4 बजे) की तेज धूप में बाहर निकलने से बचें।
  • बाहर जाना हो तो छाता, टोपी या गमछा इस्तेमाल करें।
  • ढीले, हल्के और कॉटन कपड़े पहनें।

4. संतुलित और हल्की डाइट लें

  • बहुत ज्यादा नमक और प्रोसेस्ड फूड न खाएं।
  • पानी से भरपूर फल-सब्जियां (जैसे तरबूज, खीरा, संतरा) ज्यादा खाएं।
  • कैफीन और बहुत मीठे ड्रिंक्स सीमित रखें।

5. डायरिया या उल्टी को नजरअंदाज न करें

  • तुरंत ORS लेना शुरू करें।
  • लंबे समय तक लक्षण बने रहें तो डॉक्टर से संपर्क करें।
  • बच्चों और बुजुर्गों के साथ खास सतर्कता रखें।

6. रिस्क ग्रुप का विशेष ध्यान रखें

  • छोटे बच्चों और बुजुर्गों को समय-समय पर पानी पिलाते रहें।
  • जो लोग खुद से पानी नहीं पी पाते, उनकी निगरानी करें।
  • बीमार या बेडरिडन मरीजों का फ्लूइड इनटेक ट्रैक करें।

7. पहले से मौजूद बीमारियों को कंट्रोल में रखें

  • किडनी डिजीज, हॉर्मोनल प्रॉब्लम्स का इलाज कराएं।
  • डॉक्टर की सलाह से दवाएं समय पर लें।
  • डाइयूरेटिक (पेशाब बढ़ाने वाली) दवाएं ले रहे हों तो डॉक्टर से पानी की मात्रा पर सलाह लें।

8. शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें

  • ज्यादा प्यास, मुंह सूखना, कमजोरी जैसे संकेत दिखें तो तुरंत पानी/फ्लूइड लें।
  • कन्फ्यूजन, चक्कर या सुस्ती बढ़े तो तुरंत मेडिकल मदद लें।

……………………..

फिजिकल हेल्थ से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए

फिजिकल हेल्थ- हर रात सिर्फ 11 मिनट ज्यादा सोएं: 10% घटेगा हार्ट अटैक का रिस्क, स्टडी में खुलासा, हेल्दी हार्ट के गोल्डन रूल्स

मार्च 2026 में ‘यूरोपियन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी’ में एक स्टडी पब्लिश हुई। इसके मुताबिक, रोज 11 मिनट ज्यादा नींद और 5 मिनट एक्स्ट्रा एक्सरसाइज से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम 10% तक कम हो सकता है। पूरी खबर पढ़िए…

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *