13 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी
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जीवन का सृजन खूबसूरत एहसास है। दुनिया का लगभग हर कपल चाहता है कि उनका बच्चा हो। हालांकि कई बार महीनों या सालों तक कोशिश करने के बाद भी कंसीविंग नहीं हो पाती है। यह इनफर्टिलिटी के कारण हो सकता है।
इनफर्टिलिटी का मतलब है, एक साल तक बिना किसी गर्भनिरोधक के नियमित कोशिश के बाद भी कंसीव न होना। यह समस्या महिलाओं, पुरुषों दोनों में से किसी को भी या दोनों को हो सकती है।
कभी-कभी इसके छोटे-छोटे लक्षण हमें पहले ही चेतावनी देते हैं, लेकिन हम उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। जैसे महिलाओं में अनियमित पीरियड्स या पुरुषों में सेक्स ड्राइव में कमी इसके मुख्य संकेत हैं।
इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज हम इनफर्टिलिटी के संकेतों की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- इनफर्टिलिटी के क्या कारण हो सकते हैं?
- किन कारणों से जोखिम बढ़ते हैं?
- डॉक्टर से कब कंसल्ट करना चाहिए?
इनफर्टिलिटी क्या है और क्यों होती है?
इनफर्टिलिटी एक कंडीशन है। इसमें कंसीविंग में समस्या होती है। महिलाओं में यह एग्स न बनने, ट्यूब ब्लॉक होने या हॉर्मोन्स के असंतुलन से हो सकता है। पुरुषों में स्पर्म की कमी, स्पर्म की क्वालिटी खराब होने या हॉर्मोनल समस्या वजह हो सकती है।
हालांकि, ज्यादातर मामलों में इलाज संभव है। अगर समय पर कारण पता चल जाए तो दवा, लाइफस्टाइल में बदलाव या IVF जैसे तरीकों से बच्चा हो सकता है।

इनफर्टिलिटी के बारे में ये जानना जरूरी
- महिलाओं में: लगभग 10% महिलाएं प्रभावित।
- पुरुषों में: स्पर्म संबंधी समस्या सबसे कॉमन।
- दोनों में: मोटापा और तनाव बढ़ाते हैं जोखिम।
- उम्र: 35 साल के बाद फर्टिलिटी घटती है।
महिलाओं में इनफर्टिलिटी के संकेत
महिलाओं में इनफर्टिलिटी के लक्षण अक्सर मैन्सुरेशन या हॉर्मोन से जुड़े होते हैं। अगर आप बच्चा प्लान कर रहे हैं तो इन पर ध्यान दें। कभी-कभी ये छोटी समस्या लगती हैं, लेकिन पीछे बड़ी वजह हो सकती है। जैसे PCOS या एंडोमेट्रियोसिस। ग्राफिक में देखिए महिलाओं में इनफर्टिलिटी के 6 मुख्य संकेत-

इन संकेतों को विस्तार से समझिए-
अनियमित पीरियड्स
मेंस्ट्रुअल साइकल आमतौर पर 28 दिनों का होता है, लेकिन कुछ दिन ऊपर-नीचे होना सामान्य है। अगर पीरियड्स इतने अनियमित हैं कि आप अनुमान नहीं लगा सकतीं, तो हॉर्मोन असंतुलन हो सकता है। PCOS जैसी स्थिति में एग्स ठीक से नहीं बनते, जिससे गर्भधारण मुश्किल होता है। अगर आपका चक्र 35 दिन से ज्यादा या 21 दिन से कम है, तो डॉक्टर से कंसल्ट करें।
पीरियड्स का न आना
अगर प्रेग्नेंसी नहीं है और फिर भी महीनों तक पीरियड्स नहीं आते तो वजह तनाव, वजन में अचानक बदलाव या ज्यादा एक्सरसाइज हो सकता है। यह ओव्यूलेशन न होने का संकेत है, यानी एग्स नहीं बन रहे हैं। ऐसी कंडीशन में फर्टिलिटी प्रभावित होती है।
दर्द भरे पीरियड्स
पीरियड्स में बहुत तेज दर्द या भारी ब्लीडिंग एंड्रोमेट्रियोसिस का लक्षण हो सकता है। इसमें गर्भाशय की लाइनिंग बाहर बढ़ती है, जो कंसीविंग रोक सकती है।
सेक्स के दौरान दर्द
सेक्स में दर्द सामान्य नहीं है। यह एंड्रोमेट्रियोसिस, फाइब्रॉइड्स या इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है। ये स्थितियां स्पर्म को एग्स तक पहुंचने से रोकती हैं। अगर हर बार असहजता हो तो डॉक्टर से मिलें।
हॉर्मोनल बदलाव
हॉर्मोन में उतार-चढ़ाव से त्वचा पर मुंहासे, बालों का झड़ना, वजन बढ़ना या सेक्स की इच्छा कम होने जैसे लक्षण दिखते हैं। कभी हॉट फ्लैशेज या वेजाइनल ड्राइनेस भी होती है। ये ओवरी की समस्या का संकेत हैं।
पुरुषों में इनफर्टिलिटी के संकेत
पुरुषों में बाहरी लक्षण कम नजर आते हैं, लेकिन सेक्शुअल हेल्थ से जुड़े बदलाव चेतावनी हो सकते हैं। स्पर्म क्वालिटी या स्पर्म काउंट होने से समस्या होती है। ग्राफिक में देखिए पुरुषों में इनफर्टिलिटी के 5 मुख्य संकेत-

इन संकेतों को विस्तार से समझिए-
हॉर्मोनल बदलाव
टेस्टोस्टेरॉन कम होने से सेक्स की इच्छा घटती है। अचानक बाल झड़ना भी इसका संकेत हो सकता है। अगर अचानक थकान या मूड स्विंग्स हों तो जांच कराएं।
इरेक्टाइल डिसफंक्शन
इरेक्शन न होना या देर तक इरेक्शन बने रहने में समस्या है तो यह हॉर्मोनल असंतुलन, तनाव या कुछ बीमारियों के कारण हो सकती है।
इजेकुलेशन की समस्या
इजेकुलेशन में समस्या या कम स्पर्म का मात्रा कम होना की समस्या का इशारा हो सकता है। कुछ मामलों में रेट्रोग्रेड इजेकुलेशन होता है, इसमें स्पर्म ब्लैडर में चला जाता है।
टेस्टिकल में बदलाव
टेस्टिकल्स में दर्द, सूजन या गांठ इंफेक्शन या वैरिकोसील का संकेत हो सकता है। टेस्टिकल्स के आकार में बदलाव भी इनफर्टिलिटी का संकेत हो सकता है।
मोटापा
ज्यादा वजन हॉर्मोन असंतुलन पैदा करता है। इससे स्पर्म काउंट घटाता है। महिलाओं की तरह पुरुषों में भी मोटापा फर्टिलिटी कम करता है।
इनफर्टिलिटी के कारण और रिस्क फैक्टर्स क्या हैं
महिलाओं में इनफर्टिलिटी आमतौर पर तब होती है, जब एग्स सही समय पर रिलीज नहीं होते या फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक होती है। एंड्रोमेट्रियोसिस और फाइब्रॉइड्स जैसी समस्या भी वजह बन सकती है। पुरुषों में लो स्पर्म काउंट या कमजोर स्पर्म वजह हो सकते हैं। टेस्टिकल्स के आकार में बदलाव भी बड़ी वजह है।
दोनों में अधिक उम्र, धूम्रपान, शराब, तनाव, खराब खानपान और संक्रमण जैसी वजहें भी जोखिम बढ़ाती हैं। सभी रिस्क फैक्टर्स ग्राफिक में देखिए-

इनफर्टिलिटी से जुड़े कुछ कॉमन सवाल और जवाब
सवाल: इनफर्टिलिटी क्यों होती है?
जवाब: इसकी कई वजहें हैं। महिलाओं में हॉर्मोन असंतुलन, पुरुषों में स्पर्म से जुड़ी समस्या है। उम्र, लाइफस्टाइल और इन्फेक्शन मुख्य कारक। कभी अनुवांशिक कारण भी होता है।
सवाल: अगर संकेत दिखें तो क्या करें?
जवाब: अगर इनफर्टिलिटी के संकेत दिख रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें। महिलाएं गायनेकोलॉजिस्ट से मिलें, पुरुष यूरोलॉजिस्ट से कंसल्ट करें। स्पर्म एनालिसिस, अल्ट्रासाउंड या हॉर्मोन चेक कराएं।
सवाल: डॉक्टर से कब कंसल्ट करना चाहिए?
जवाब: एक साल की कोशिश के बाद भी अगर कंसीविंग नहीं हो रही है। उम्र 35 साल से ज्यादा है तो 6 महीने बाद ही टेस्ट करवा लें। अगर दर्द या अनियमित पीरियड्स के लक्षण दिख रहे हैं तो जल्दी कंसल्ट करें।
सवाल: हेल्दी फर्टिलिटी के लिए क्या करें?
जवाब: हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं। संतुलित खाना खाएं। भोजन में फल-सब्जियां ज्यादा शामिल करें। नियमित एक्सरसाइज करें, लेकिन बहुत ज्यादा भी न करें। तनाव कम करने के लिए योग या मेडिटेशन करें। धूम्रपान-शराब छोड़ें। वजन कंट्रोल में रखें। पर्याप्त नींद लें। अगर STI (सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज यानी संक्रमण से होने वाला यौन रोग) का शक हो तो जरूरी टेस्ट कराएं। ये याद रखें कि जल्दी डायग्नोसिस से इलाज आसान हो जाता है। अगर आप भी ऐसी कंडीशन में हैं तो डॉक्टर से कंसल्ट जरूर करें।
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