फ्लाइट्स कैंसिल होने से इंडिगो का मुनाफा 78% घटा:  अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में ₹550 करोड़ रहा, दिसंबर में 2,507 फ्लाइट्स कैंसिल हुई थीं
ऑटो-ट्रांसपोर्ट

फ्लाइट्स कैंसिल होने से इंडिगो का मुनाफा 78% घटा: अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में ₹550 करोड़ रहा, दिसंबर में 2,507 फ्लाइट्स कैंसिल हुई थीं

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मुंबई2 घंटे पहले

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दिसंबर में पायलटों की कमी और 2500 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल होने से इंडिगो का मुनाफा 78% कम हो गया है। इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन को वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में सिर्फ 550 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा (नेट प्रॉफिट) हुआ है। पिछले साल की समान तिमाही में यह 2,448 करोड़ रुपए रहा था।

अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में इंडिगो का ऑपरेशन से रेवेन्यू सालाना आधार पर 6.2% बढ़कर 23,471 करोड़ रुपए रहा। एक साल पहले की समान तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 22,110 करोड़ रुपए रहा था। इंडिगो ने आज गुरुवार (22 जनवरी) को अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के नतीजे जारी किए हैं।

कंपनी ने बताया कि फ्लाइट्स कैंसिल होने और नए लेबर कोड्स से उसे ₹1,546.5 करोड़ का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। अगर इसे अलग कर दिया जाए तो कंपनी का मुनाफा करीब ₹2,096.3 करोड़ रहता। हालांकि, यह तब भी पिछले साल के मुकाबले 14% कम होता।

मुनाफे में कमी की दो बड़ी वजहें

दिसंबर के क्राइसिस से हुआ ₹577 करोड़ का नुकसान : दिसंबर 2025 की शुरुआत में इंडिगो को बड़े पैमाने पर फ्लाइट्स कैंसिल करनी पड़ी थीं। इसकी मुख्य वजह ‘फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन’ (FDTL) के नए नियम थे, जो 1 नवंबर से लागू हुए थे।

इन नियमों के तहत पायलटों को ज्यादा आराम देना अनिवार्य था, लेकिन इंडिगो के पास उस हिसाब से पर्याप्त पायलट नहीं थे। 3 से 5 दिसंबर के बीच कंपनी ने 2,507 फ्लाइट्स कैंसिल कीं और 1,852 फ्लाइट्स लेट हुईं।

इस संकट से करीब 3 लाख यात्री प्रभावित हुए थे। इसी अफरातफरी, रिफंड और अन्य खर्चों की वजह से कंपनी को ₹577.2 करोड़ की चपत लगी। हाल ही में DGCA ने इस मामले में कंपनी पर ₹22 करोड़ का जुर्माना भी लगाया था।

नए लेबर कोड ने कंपनी की लागत बढ़ाई: भारत में 21 नवंबर से चार नए लेबर कोड (वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा) लागू हुए हैं। इन नियमों के आने से ‘वेतन’की परिभाषा बदल गई है। अब किसी भी कर्मचारी की बेसिक सैलरी (मूल वेतन) उसके कुल सीटीसी (CTC) का कम से कम 50% होना जरूरी है।

कंपनियां अब अलाउंस (भत्तों) का हिस्सा ज्यादा रखकर पीएफ (PF) और ग्रेच्युटी के पैसे नहीं बचा सकतीं। इंडिगो को इसी बदलाव के कारण अपने कर्मचारियों के वेतन ढांचे को रिवाइज करना पड़ा, जिससे उस पर करीब ₹970 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा।

इंडिगो के दिसंबर तिमाही नतीजों की 5 बड़ी बातें

  • यात्रियों की संख्या और क्षमता में बढ़ोतरी: इंडिगो ने अपनी क्षमता (Capacity) में 11.2% का इजाफा किया है। इस तिमाही में यात्रियों की संख्या 2.8% बढ़कर 3.19 करोड़ (31.9 मिलियन) पर पहुंच गई है।
  • मुनाफे (EBITDAR) में हल्की गिरावट: कंपनी का EBITDAR (कामकाजी मुनाफा) पिछले साल के मुकाबले 0.8% घटकर ₹6,008.4 करोड़ रहा। अगर विदेशी मुद्रा (Forex) के असर को हटा दें, तो मुनाफे में 5.5% की कमी देखी गई है।
  • ईंधन खर्च घटा, पर ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ी: एयरलाइन के लिए अच्छी खबर यह रही कि ईंधन (Fuel) पर होने वाला खर्च 2.8% कम हुआ है। हालांकि, ईंधन और विदेशी मुद्रा को छोड़कर बाकी ऑपरेशनल खर्चे 2.2% बढ़ गए हैं।
  • ₹51,600 करोड़ से ज्यादा का कैश: कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है। 31 दिसंबर 2025 तक इंडिगो के पास कुल ₹51,606.9 करोड़ का कैश बैलेंस था। वहीं, कंपनी पर कुल कर्ज ₹76,858.3 करोड़ है।
  • विमानों के बेड़े का विस्तार: इंडिगो के पास अब कुल 440 विमान हैं। खास बात यह है कि केवल दिसंबर तिमाही के दौरान कंपनी ने अपने बेड़े में 23 नए विमान शामिल किए हैं।

भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन है इंडिगो

मार्केट शेयर के लिहाज से इंडिगो देश की सबसे बड़ी एयरलाइन है। भारतीय एयरलाइन मार्केट में कंपनी का मार्केट शेयर करीब 60% है। इसकी स्थापना 2006 में राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल ने की थी। एयरलाइन की 400 से ज्यादा एयरक्राफ्ट की फ्लीट है। इसके 50 करोड़ से ज्यादा कस्टमर हैं।

6 महीने में 17.13% गिरा इंडिगो का शेयर

अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के नतीजों के पहले इंटरग्लोब एविएशन का शेयर आज 1.47% चढ़कर 4,929 रुपए के स्तर पर बंद हुआ। कंपनी का शेयर 5 दिन में 4.20% चढ़ा और एक महीने में 4.21% गिरा है।

वहीं शेयर 6 महीने में 17.13% गिरा है। एक साल में 22.87% का पॉजिटिव रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 1.90 लाख करोड़ रुपए है।

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ये खबर भी पढ़ें 61% यात्री बोले- इंडिगो पर ₹22.2 करोड़ जुर्माना काफी नहीं:ये परेशानी के मुकाबले कुछ भी नहीं; दिसंबर में 3 लाख यात्री प्रभावित हुए थे

भारत के 61% हवाई यात्रियों का मानना है कि इंडिगो एयरलाइन पर लगाया गया ₹22.20 करोड़ का जुर्माना और उसके खिलाफ की गई कार्रवाई काफी नहीं है। लोकलसर्कल्स के एक सर्वे के मुताबिक यात्रियों का मानना है कि यह सजा उस मानसिक और आर्थिक परेशानी के मुकाबले कुछ भी नहीं है जो उन्होंने झेली थी। पूरी खबर पढ़ें

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