बारिश के मौसम में बढ़ते एलर्जी के मामले:  इन लोगों को ज्यादा रिस्क, डॉक्टर से जानें लक्षण और बचाव के 10 उपाय
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बारिश के मौसम में बढ़ते एलर्जी के मामले: इन लोगों को ज्यादा रिस्क, डॉक्टर से जानें लक्षण और बचाव के 10 उपाय

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19 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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बारिश का मौसम अपने साथ कई तरह की एलर्जी लेकर आता है। जो लोग पहले से किसी एलर्जी से पीड़ित हैं, उनके लिए समस्या और भी बढ़ जाती है। इस मौसम में बढ़ी हुई नमी और गर्मी के कारण फंगस और बैक्टीरिया पनपते हैं, जो एलर्जी को ट्रिगर कर सकते हैं।

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एकेडमिक मेडिसिन एंड फार्मेसी में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, भारत की लगभग 20-30% आबादी हमेशा किसी-न-किसी एलर्जी संबंधी बीमारी से पीड़ित रहती है। इनमें अस्थमा, एलर्जिक राइनाइटिस, एटोपिक डर्मेटाइटिस, फूड एलर्जी और ड्रग एलर्जी शामिल हैं।

हालांकि अगर हम एलर्जी के कारण और लक्षणों को समझ लें, साथ ही कुछ सावधानियां बरतें तो बिना किसी परेशानी के मानसून का आनंद लिया जा सकता है।

तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम बात करेंगे कि मानसून के समय एलर्जी होने के क्या कारण हैं। साथ ही जानेंगे कि-

  • मानसून एलर्जी के क्या लक्षण हैं?
  • इससे बचने के क्या करना चाहिए?

एक्सपर्ट: डॉ. एस. जेड. जाफरी, पल्मोनोलॉजिस्ट और एलर्जिस्ट, इंदौर

सवाल- मानसून में एलर्जी क्यों बढ़ जाती है?

जवाब- बारिश के मौसम में नमी (Humidity) बहुत ज्यादा हो जाती है। ये नमी बैक्टीरिया और फंगस के लिए अनुकूल माहौल बना देती है। हवा में इनकी मात्रा बढ़ने से सांस, स्किन और आंखों से जुड़ी एलर्जी के मामले बढ़ जाते हैं। इसके कारण अस्थमा से पीड़ित लोगों को सांस लेने में और भी परेशानी हो सकती है। नीचे दिए ग्राफिक समझिए कि मानसून के दौरान किस तरह की एलर्जी का खतरा बढ़ जाता है।

सवाल- मानसून में किन चीजों से एलर्जी का खतरा होता है?

जवाब- हवा में बढ़ी हुई नमी, गंदगी और बंद जगहों में मौजूद बैक्टीरिया, फंगस और कीड़े-मकोड़े एलर्जी के खतरे काे बढ़ा देते हैं। घर और आसपास की गंदगी व नमी एलर्जेन्स को बढ़ावा देती है, जिससे सांस लेने में परेशानी, स्किन रैशेज और इन्फेक्शन जैसे लक्षण उभर सकते हैं। इसके अलावा कुछ खास चीजें एलर्जी का खतरा और बढ़ा देती हैं, जिन्हें जानना और उनसे बचाव करना जरूरी है। जैसेकि-

  • गीले कपड़े, नमी वाली दीवारें और पुराने फर्नीचर पर फफूंदी पनप सकती है, जो सांस की एलर्जी का बड़ा कारण बनती है।
  • धूल और सीलन वाली जगहों में बैक्टीरिया अस्थमा, साइनस और स्किन से जुड़ी एलर्जी को ट्रिगर कर सकते हैं।
  • भीगे हुए जूते-मोजे और चप्पल से पैरों और नाखूनों में फंगल इन्फेक्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
  • दूषित या खुला रखा भोजन पेट से जुड़ी एलर्जी, दस्त और फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है।
  • मच्छरों या कीड़ों के काटने से स्किन एलर्जी, सूजन और खुजली जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

सवाल- मानसून में एलर्जी का खतरा सबसे ज्यादा किसे होता है?

जवाब- वैसे तो मानसून में एलर्जी किसी को भी हो सकती है। लेकिन कुछ लोगों को इसका खतरा ज्यादा रहता है। जैसेकि-

  • बच्चे, बुजुर्ग या प्रेग्नेंट वुमन।
  • पहले से बीमार लोग।
  • अस्थमा या साइनस से पीड़ित लोग।
  • एलर्जिक हिस्ट्री वाले लोग।
  • जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है।
  • जिन लोगों की स्किन ज्यादा सेंसिटिव होती है।

सवाल- मानसून में होने वाली एलर्जी के क्या लक्षण हैं?

जवाब- मानसून एलर्जी के लक्षण मामूली लग सकते हैं। लेकिन समय रहते इलाज न हो तो ये गंभीर रूप ले सकते हैं। इसलिए शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज न करें। नीचे दिए ग्राफिक से इसके लक्षण समझिए-

सवाल- मानसून में स्किन एलर्जी और खुजली क्यों होती हैं?

जवाब- मानसून में स्किन से जुड़ी समस्याएं आम हो जाती हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह लगातार गीला रहना, साफ-सफाई में लापरवाही और बारिश के पानी में मौजूद गंदगी होती है। नमी के कारण स्किन पर बैक्टीरिया और फंगस आसानी से पनपते हैं। इससे एलर्जी की समस्या बढ़ जाती है।

इसके अलावा गीले कपड़े देर तक पहनने से अंडर-आर्म्स, कमर और जांघों के बीच फंगल इन्फेक्शन हो सकता है। बारिश में बाहर निकलने पर लोग भीग जाते हैं और जब बारिश रुकती है तो उमस से पसीना आने लगता है। इन दोनों ही स्थितियों में स्किन पर बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। यही वजह है कि इस मौसम में स्किन से जुड़ी कई अन्य समस्याएं देखने को मिलती हैं।

सवाल- मानसून एलर्जी से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखें?

जवाब- इस मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी एलर्जी का कारण बन सकती है। खासतौर पर जब कपड़े गीले रह जाते हैं, घर में सीलन होती है या स्किन को सही तरीके से साफ नहीं किया जाता है। हालांकि अगर कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखा जाए तो इससे काफी हद तक बचा जा सकता है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- मानसून में एलर्जी होने पर क्या करना चाहिए?

जवाब- इसके लिए सबसे पहले लक्षणों को पहचानें। अगर लगातार छींक आ रही हैं, नाक बह रही है, आंखों में खुजली है या स्किन पर दाने हैं तो समझिए यह कोई एलर्जी हो सकती है।

अगर लक्षण हल्के हैं तो घर में साफ-सफाई पर खास ध्यान दें। फफूंद से बचें और घर को सूखा रखें। बाहर से आने पर तुरंत कपड़े बदलें और नहा लें।

अगर ये उपाय काम नहीं आ रहे हैं या लक्षण गंभीर हो रहे हैं तो तुरंत किसी डॉक्टर से सलाह लें। वे आपको सही दवा और बचाव के तरीके बता पाएंगे। याद रखें सही समय पर इलाज और बचाव से एलर्जी को बढ़ने से रोका जा सकता है।

सवाल- क्या खाने-पीने से एलर्जी के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है?

जवाब- पल्मोनोलॉजिस्ट और एलर्जिस्ट डॉ. एस. जेड. जाफरी बताते हैं कि हां, आंवला, संतरा, नींबू, कीवी और अमरूद जैसे विटामिन C रिच फ्रूट्स एलर्जी से लड़ने में मदद करते हैं। दही, छाछ और लस्सी जैसे प्रोबायोटिक फूड्स पाचन ठीक रखते हैं और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं।

हल्दी और अदरक में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण एलर्जी के लक्षणों को कम कर सकते हैं। वहीं गुनगुना पानी शरीर से टॉक्सिन निकालने और स्किन को हाइड्रेट रखने में मदद करता है।

इसके अलावा एलर्जी से बचने के लिए ज्यादा तेल-मसाले वाला खाना, बासी खाना, बाहर की खुली चीजें, प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड बिल्कुल न खाएं। ये चीजें एलर्जी को ट्रिगर कर सकती हैं।

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