बुक रिव्यू- अपने शब्दों और बातों से रिझाने की कला:  जानें कॉन्फिडेंस के साथ अपनी बात कैसे रखें, प्रभावी कम्युनिकेशन के 7 टिप्स
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बुक रिव्यू- अपने शब्दों और बातों से रिझाने की कला: जानें कॉन्फिडेंस के साथ अपनी बात कैसे रखें, प्रभावी कम्युनिकेशन के 7 टिप्स

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6 घंटे पहले

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किताब- सार्थक बातचीत (बहस कम, बातें ज्यादा)

(न्यू यॉर्क टाइम्स बेस्टसेलर किताब ‘द नेक्स्ट कन्वर्सेशन’ का हिन्दी अनुवाद)

लेखक- जेफरसन फिशर

अनुवाद- शैलेंद्र गौतम

प्रकाशक- पेंगुइन प्रकाशन

मूल्य- 399 रुपए

‘सार्थक बातचीत’ अमेरिकी लेखक, स्पीकर और पेशे से वकील जेफरसन फिशर की पहली किताब है। पब्लिश होते ही उनकी यह किताब न्यूयॉर्क टाइम्स बेस्टसेलर बन गई, जो इसकी लोकप्रियता और असर को दिखाता है।

जेफरसन फिशर की यह सेल्फ-हेल्प किताब हमें सिखाती है कि बातचीत को कैसे ज्यादा असरदार और आत्मविश्वास से भरा बनाया जाए। चाहे बात पर्सनल लाइफ की हो या प्रोफेशनल माहौल की, यह किताब हर जगह मददगार साबित होती है।

पुस्तक का उद्देश्य इस किताब का मकसद है पाठकों को बेहतर बातचीत करना सिखाना, ताकि वे अपने निजी और प्रोफेशनल लाइफ में मजबूत रिलेशन बना सकें। इसमें बताया गया है कि मुश्किल बातचीत को कैसे संभालें, झगड़ों से कैसे बचें और अपनी बात आत्मविश्वास से कैसे रखें।

इस किताब के जरूरी सबक किताब में जेफरसन फिशर ने कम्युनिकेशन को बेहतर बनाने के लिए कई व्यावहारिक रणनीतियां प्रस्तुत की हैं। इनमें से कुछ प्रमुख हैं।

लोगों के आंतरिक परेशानियों को समझें फिशर का मानना है कि अधिकतर विवाद लोगों के व्यवहार से नहीं, बल्कि उनके भीतर छिपे दर्द या परेशानी से जन्म लेते हैं।

जब हम किसी से असहमति में उलझते हैं, तो हमें यह सोचने की जरूरत है कि शायद वे किसी आंतरिक संघर्ष से जूझ रहे हों। ऐसे में सहानुभूति और शांत प्रतिक्रिया से रिश्ते सुधर सकते हैं।

अगली बातचीत पर ध्यान दें हर बातचीत एक नया मौका होती है। अगर पिछली बार किसी के साथ बहस या टकराव हुआ हो, तो अगली बार उस अनुभव को दोहराने के बजाय कुछ नया और सकारात्मक शुरू किया जा सकता है। हमें बीती बातों को पकड़ने के बजाय सुधार की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

कम्युनिकेशन के दौरान कंट्रोल बनाएं जब कोई हमें गुस्सा दिलाता है या चुभने वाली बात कहता है, तो हमारा पहला रिएक्शन होता है पलटकर जवाब देना। लेकिन फिशर कहते हैं कि अपना मानसिक संतुलन खोने का सबसे तेज तरीका है, किसी को अपना गुस्सा दिखा देना।

बातचीत में जुड़ाव बनाए रखें सिर्फ बोलना ही नहीं, सामने वाले से समझ और संबंध बनाना भी जरूरी है। बातचीत में यह दिखना चाहिए कि आप केवल अपनी नहीं, उनकी बात को भी महत्व दे रहे हैं। इससे सामने वाला व्यक्ति अधिक सहज और खुले मन से संवाद करता है।

मुश्किल लोगों से शांति से निपटें जब कोई आपको अपमानित करता है या नीचा दिखाने की कोशिश करता है, तो सबसे असरदार जवाब है. एक लंबी चुप्पी।

“जब कोई आपको तुच्छ या छोटा समझे, एक लंबा पॉज आपकी सबसे बड़ी ताकत है।”

इस दौरान आप उनकी बात को समझें, इरादों को पहचानें और विनम्र लेकिन दृढ़ होकर जवाब दें। गुस्से से नहीं, सम्मान के साथ सीमाएं तय करना ज्यादा असरदार होता है।

हेल्थी बाउंड्रीज बनाएं और बरकरार रखें अगर कोई आपकी तय की हुई सीमा से असहज होता है, तो इसका मतलब है कि वह सीमा काम कर रही है। इसलिए जब आपको किसी चीज में असहजता महसूस हो, तो बिना झिझक ‘ना’ बोलें, जरूरत हो तो धन्यवाद कहें।

सेंसिटिव बातचीत को सोच-समझकर संभालें जब किसी भावनात्मक मुद्दे पर बात करनी हो, तो उसे जल्दबाजी में न करें। पहले समय तय करें, छोटी बातों को छोड़कर मुद्दे की जड़ पर आएं, सामने वाले को अपनी बात कहने का मौका दें और खुले, समझदारी से भरे सवाल करें।

बातचीत दौरान भावनाओं के कंट्रोल करना सीखें फिशर कहते हैं कि बातचीत में पहले अपनी भावनाओं पर काबू पाना जरूरी है। अगर आप तनाव महसूस कर रहे हैं, तो सांस लेने की खास तकनीक अपनाएं। उदाहरण के लिए, 2 सेकेंड में सांस लें, 1 सेकेंड रोकें और 6 सेकेंड में धीरे-धीरे छोड़ें। इससे दिमाग शांत रहता है।

कनेक्शन बनाते हुए बातचीत आगे बढ़ाएं ​​​​​​​बातचीत सिर्फ अपनी बात कहने के लिए नहीं होती, बल्कि दूसरों के साथ संबंध बनाने के लिए भी होती है। फिशर कहते हैं कि ध्यान से सुनना और सहानुभूति दिखाना दूसरों को समझने में मदद करता है।

लोगों से सहज तरीके से बात करना कई बार ​​​​​​​सख्त व्यवहार वाले लोगों से बातचीत चुनौतीपूर्ण हो सकती है। फिशर का सुझाव है कि बातचीत में थोड़ा विराम लें, ताकि सामने वाला अपनी बात पर सोच सके और माहौल शांत रहे।

साथ ही, उनके इरादों के बारे में सीधे पूछें, जैसे ‘आप ऐसा क्यों कह रहे हैं?’ इससे स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

सीमाएं तय करना और इसे बनाए रखना स्वस्थ संबंधों के लिए अपनी सीमाएं तय करना जरूरी है। फिशर कहते हैं कि ‘ना’ कहते समय साफ-साफ बोलें, सामने वाले को धन्यवाद दें और बातचीत को विनम्रतापूर्वक खत्म करें।

किताब की शैली जेफरसन फिशर की लेखन शैली सरल, व्यावहारिक और सभी वर्ग के पाठकों के लिए है। किताब में वास्तविक जीवन की कहानियों, जैसे कि उनके वकालत का अनुभव शामिल है। किताब की भाषा सरल और मोटिवेशनल है, जो इसे हर एज ग्रुप के लिए बेहतर किताब बनाती है।

किताब के बारे में मेरी राय ‘सार्थक बातचीत’ किताब कम्युनिकेशन स्किल्स को बेहतर बनाने के लिए कई सारे आसान तरीके सुझाती है। किताब में जेफरसन फिशर ने अपने पर्सनल एक्सपीरियंस शेयर किए हैं।

इसमें दिए गए उदाहरण जिंदगी और असली परिस्थितियों पर आधारित हैं, जिन्हें आप आसानी से अपने जीवन में अपना सकते हैं।

यह किताब किसे पढ़नी चाहिए ​​​​​​​अगर आप अपनी बातचीत को बेहतर बनाना चाहते हैं तो यह किताब आपके लिए मददगार साबित हो सकती है। यह किताब आपको पर्सनल और प्रोफेशनल रिलेशन मजबूत बनाने में मदद कर सकती है।

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