बुक रिव्यू: सुबह के पहले घंटे में छिपा है चमत्कार:  सुबह की ये 6 आदतें बदल देंगी आपका जीवन, जल्दी उठना सिखाएगी ये जादुई किताब
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बुक रिव्यू: सुबह के पहले घंटे में छिपा है चमत्कार: सुबह की ये 6 आदतें बदल देंगी आपका जीवन, जल्दी उठना सिखाएगी ये जादुई किताब

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1 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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किताब का नाम: ‘द मिरेकल मॉर्निंग’

(‘द मिरेकल मॉर्निंग’ का हिंदी अनुवाद)

लेखक: हैल एलरॉड

प्रकाशक: मंजुल

अनुवाद: मनीष शर्मा

मूल्य: 299 रुपए

आजकल की तेजी से बदलती लाइफस्टाइल में सुबह उठना किसी चैलेंज से कम नहीं है। इसके कारण अक्सर लोग सुबह अलार्म बजने पर स्नूज बटन दबाते हैं। सुबह अलर्टनेस के लिए कॉफी पर निर्भर रहते हैं। पूरे दिन थकान महसूस करते हैं। लेकिन क्या हो, अगर हम सुबह के पहले घंटे को एक ‘मिरेकल’ यानी चमत्कार बना लें?

मशहूर अमेरिकी लेखक, स्पीकर और सक्सेस कोच हैल एलरॉड की किताब ‘द मिरेकल मॉर्निंग’ हमें यही सिखाती है। ये किताब बताती है कि कैसे सुबह जल्दी उठकर कुछ सरल आदतें अपनाने से हमारा पूरा दिन बदल सकता है।

उनकी ये किताब न्यूयॉर्क टाइम्स बेस्टसेलर रही है और लाखों लोगों ने इसे पढ़कर अपनी जिंदगी में बदलाव देखा है। किताब में हैल कहते हैं, “सुबह का पहला घंटा ही वह पतवार है, जो ये तय करता है कि आपका जहाज कहां जाएगा।”

किताब का मकसद

हैल एलरॉड कहते हैं कि असली समस्या नींद की नहीं, बल्कि सुबह उठने में एक्साइटमेंट की कमी है। किताब में उन्होंने ‘S.A.V.E.R.S.’ नामक एक सरल रूटीन दिया है, जो पूरे दिन को ‘मिरेकल’ बनाता है। ये रूटीन रोजमर्रा की जिंदगी के लिए डिजाइन किया गया है। ये न सिर्फ एनर्जी, बल्कि सेल्फ-कॉन्फिडेंस, फोकस और प्रोडक्टिविटी भी बढ़ाता है। नीचे दिए ग्राफिक से इसे समझिए-

आइए, अब इन पॉइंट्स को समझते हैं…

साइलेंस

हैल बताते हैं कि सुबह उठने के बाद 10 मिनट मेडिटेशन करें या गहरी सांसें लें। शोर-शराबे से दूर रहें। यह आदत ब्रेन को रीसेट करती है, तनाव कम करती है। साथ ही दिन को पॉजिटिव टोन देती है। अगर रात कम सोए हों तो भी ये स्टेप तनाव कम करता है।

अफर्मेशंस

अफर्मेशंस यानी अपने ब्रेन को सही दिशा देने वाले वाक्य। जैसे ‘मैं अपनी लाइफ बदलने में सक्षम हूं।’ ऐसे पॉजिटिव वाक्य रोज बोलने से आत्मविश्वास बढ़ता है और नेगेटिव सोच कम होती है। यह माइंड को सफलता की तरफ सेट करता है।

विजुअलाइजेशन

अपनी इच्छाओं और लक्ष्यों को ऐसे इमेजिन करें, जैसे वे अभी पूरे हो रहे हों। जैसेकि इंटरव्यू में सफल होना या कोई बड़ा लक्ष्य हासिल करना। हैल के अनुसार, जो आप बोलते हैं, विजुअलाइजेशन उसे और भी पावरफुल बना देता है।

एक्सरसाइज

सुबह की हल्की स्ट्रेचिंग, योग या छोटी वॉक भी काफी होती है। इससे एंडोर्फिन हॉर्मोन (हैप्पी हॉर्मोन) रिलीज होता है। ये ब्रेन को फोकस्ड बनाता है। एक छोटा सा वर्कआउट पूरे दिन की प्रोडक्टिविटी बढ़ा देता है।

रीडिंग

रोज 10–20 मिनट किताब पढ़ने से नए आइडियाज मिलते हैं, पॉजिटिव सोच डेवलप होती है। हैल कहते हैं कि रीडिंग ब्रेन के लिए एक्सरसाइज की तरह है।

स्क्राइबिंग

रोज सुबह एक डायरी में अपनी प्लानिंग, विचार, अनुभव और ग्रेटिट्यूड लिखें। कम-से-कम तीन चीजें नोट करें, जिनके लिए आप शुक्रगुजार हैं। यह अभ्यास नेगेटिविटी कम करता है और कॉन्फिडेंस बढ़ाता है।

किताब के मुख्य सबक

हैल एलरॉड बताते हैं कि सुबह की शुरुआत हमारी एनर्जी लेवल को सीधे प्रभावित करती है। जब हम दिन की शुरुआत थकान और डर से करते हैं तो थोड़ी नींद भी बोझ लगती है। अगर हम इसे ग्रेटिट्यूड के रूप में देखें तो ब्रेन खुद को फ्रेश मोड में स्विच कर लेता है।

हैल कम नींद को प्रमोट नहीं कर रहे हैं। वह ये बताते हैं कि हमारी एनर्जी का बड़ा हिस्सा मानसिक रवैये से तय होता है, नींद के घंटों से नहीं। नीचे दिए ग्राफिक से किताब के मुख्य सबक समझिए-

‘द मिरेकल इवनिंग’ और ‘द मिरेकल लाइफ’

किताब में ‘द मिरेकल इवनिंग’ और ‘द मिरेकल लाइफ’ इन दो अध्यायों को भी जोड़ा गया है।

‘द मिरेकल इवनिंग’ में बताया गया है कि नींद को इस तरह अनुकूल बनाएं कि हर सुबह एनर्जेटिक और ताजगी के साथ उठें। वहीं ‘द मिरेकल लाइफ’ में जीवन में बदलाव के बारे में बताया गया है।

मिरेकल इवनिंग सोने से कुछ देर पहले शुरू होती है। किताब में इसके बारे में कुछ आसान टिप्स बताए गए हैं। जैसेकि-

  • सोने से तीन-चार घंटे पहले भोजन करें।
  • सोने से कुछ घंटे पहले स्मार्टफोन से दूरी बनाएं।
  • अपने अगले दिन की योजना बनाएं।
  • कमरे में ब्लू लाइट का इस्तेमाल न करें।
  • सोने से पहले अपनी पसंदीदा पुस्तक पढें।

यह किताब किसे पढ़नी चाहिए?

अगर आप स्नूजर हैं, थकान से परेशान हैं या दिन की शुरुआत अच्छी चाहते हैं तो ये किताब आपके लिए है। ये किताब नए रीडर्स से लेकर सेल्फ-हेल्प एक्सपर्ट्स तक सबके लिए है।

किताब के बारे में मेरी राय

मुझे ये किताब इसलिए पसंद आई क्योंकि ये थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल है। किताब में कुछ जगह रिपीटेशन है, लेकिन मैसेज इतना स्ट्रॉन्ग है कि वो बोरिंग नहीं लगता है।

अगर आप सेल्फ-हेल्प की किताबें पढ़ चुके हैं तो ये नेक्स्ट लेवल है। हैल याद दिलाते हैं कि चेंज हमेशा पॉसिबल है, बस इसे सुबह से शुरू करें। ये किताब सिखाती है कि आपके अंदर ही पावर है, बस सुबह उठकर उसे एक्टिवेट करने की जरूरत होती है।

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