बुद्ध पूर्णिमा आज:  भगवान विष्णु, सत्यनारायण, चंद्र देव और यमराज की पूजा का पर्व, पितरों के लिए करें धूप-ध्यान
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बुद्ध पूर्णिमा आज: भगवान विष्णु, सत्यनारायण, चंद्र देव और यमराज की पूजा का पर्व, पितरों के लिए करें धूप-ध्यान

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2 दिन पहले

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आज (1 मई) वैशाख महीने की पूर्णिमा है। इस तिथि को बुद्ध पूर्णिमा भी कहते हैं। आज वैशाख महीना खत्म होगा और कल (2 मई) से ज्येष्ठ मास शुरू हो जाएगा। वैशाख पूर्णिमा पर भगवान विष्णु का विधि-विधान से पूजन करना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से भक्त को सुख-समृद्धि मिलती है और सभी कष्ट दूर होते हैं।

वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा कहते हैं, क्योंकि इसी दिन गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। खास बात यह है कि इसी तिथि पर उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और इसी तिथि पर उनका महापरिनिर्वाण भी हुआ था। इस वजह से वैशाख पूर्णिमा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व काफी अधिक है।

चंद्र देव और यमराज की पूजा का पर्व

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, पूर्णिमा की शाम चंद्र उदय के बाद चंद्रदेव की पूजा करनी चाहिए। माना जाता है कि चंद्र की पूजा से कुंडली के चंद्र दोष दूर होता है और मानसिक शांति मिलती है। इस दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा करने का महत्व है। वैशाख पूर्णिमा पर व्रत और पूजा करने से यमराज प्रसन्न होते हैं। इस दिन जल से भरा पात्र, पंखा, चप्पल, छाता, घी, फल, चीनी, चावल और नमक का दान करना शुभ माना जाता है।

पूर्णिमा पर करें ये शुभ काम

  • वैशाख पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान करना शुभ माना गया है। स्नान के बाद दान-पुण्य करना चाहिए। जल से भरा कलश, मिठाई और पकवान यमराज को अर्पित किए जाते हैं। तिल और शक्कर का दान खासतौर पर करते हैं। अगर नदी में स्नान करना संभव न हो, तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। स्नान करते समय तीर्थों का नदियों का ध्यान करना चाहिए। स्नान के बाद घर के आसपास ही दान-पुण्य कर सकते हैं। पूर्णिमा पर किए गए धर्म-कर्म से देवता और पितर सभी तृप्त होते हैं।
  • वैशाख पूर्णिमा पर सत्यनारायण व्रत करने की परंपरा है। इस दिन भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की पूजा की जाती है और उनकी कथा सुनी-पढ़ी जाती है।
  • इस दिन पितरों के लिए धूप-ध्यान और तर्पण करना चाहिए। दोपहर में गाय के कंडों के अंगारों पर गुड़-घी अर्पित करके पितरों का ध्यान करना चाहिए। इसके बाद हथेली में जल लेकर अंगूठे की ओर से पितरों को चढ़ाना चाहिए।
  • इस दिन भक्त हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाते हैं और सुंदरकांड, हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, राम नाम का जप करें।
  • किसी गोशाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें। गायों को हरी घास खिलाएं। किसी तालाब में मछलियों के लिए आटे की गोलियां बनाकर डालें।
  • अभी गर्मी का समय है, इसलिए सार्वजनिक जगहों पर जल दान करना चाहिए। प्याऊ लगवा सकते हैं। किसी प्याऊ में मटके और दान का दान कर सकते हैं। इसके साथ ही जरूरतमंद लोगों को छाते, जूते-चप्पल का दान भी कर सकते हैं।
  • शिवलिंग, बाल गोपाल, भगवान विष्णु को चंदन का लेप लगाएं। चंदन का इत्र लगाएं। दही, माखन-मिश्री चढ़ाएं। शिवलिंग पर बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल चढ़ाएं। बाल गोपाल और भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते चढ़ाएं। सूर्यास्त के बाद घर के आंगन में तुलसी के पास दीपक जलाएं।

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