भारत की GDP ग्रोथ 7.4% रहने का अनुमान:  वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पहले एडवांस एस्टीमेट जारी; मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में तेजी से अर्थव्यवस्था बढ़ी
ऑटो-ट्रांसपोर्ट

भारत की GDP ग्रोथ 7.4% रहने का अनुमान: वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पहले एडवांस एस्टीमेट जारी; मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में तेजी से अर्थव्यवस्था बढ़ी

Spread the love


नई दिल्ली12 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन (MoSPI) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए देश की इकोनॉमिक ग्रोथ के पहले एडवांस एस्टीमेट जारी किए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल यानी वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की रियल GDP ग्रोथ 7.4% रहने की उम्मीद है। इससे पहले सरकार के अनुमान 6.3%–6.8% रहे थे।

वहीं पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में यह विकास दर 6.5% रही थी। मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन और सर्विस सेक्टर में आए उछाल को इस बढ़त की मुख्य वजह माना जा रहा है। वहीं सरकार ने नॉमिनल GDP (महंगाई के साथ) की ग्रोथ 8% रहने की उम्मीद जताई है।

क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्ट धर्मकीर्ति जोशी का कहना है कि इस साल नॉमिनल और रियल GDP के बीच केवल 60 बेसिस पॉइंट (0.6%) का अंतर है। यह 2011-12 के बाद सबसे कम अंतर है। इसका सीधा मतलब यह है कि देश में महंगाई काबू में है, जिसकी वजह से नॉमिनल और रियल ग्रोथ के आंकड़े एक-दूसरे के बेहद करीब नजर आ रहे हैं।

दिसंबर में RBI ने अपना GDP अनुमान 6.8% बढ़ाकर 7.3% किया था

ग्लोबल एजेंसियों ने भारत का ग्रोथ अनुमान बढ़ाया

दुनिया की तमाम बड़ी रेटिंग एजेंसियों ने भी भारत के ग्रोथ अनुमान को बढ़ाया है।

  • फिच : वित्त वर्ष 2026 के लिए 7.4% ग्रोथ का अनुमान।
  • एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB): 2025 के लिए 7.2% का अनुमान।
  • IMF: 2025 के लिए 6.6% ग्रोथ का दावा।
  • मूडीज : भारत को G20 देशों में सबसे तेज बढ़ने वाली इकोनॉमी बताया।

GDP क्या है?

इकोनॉमी की हेल्थ को ट्रैक करने के लिए GDP का इस्तेमाल होता है। ये देश के भीतर एक तय समय में बनाए गए सभी गुड्स और सर्विस की वैल्यू को दिखाती है। इसमें देश की सीमा के अंदर रहकर जो विदेशी कंपनियां प्रोडक्शन करती हैं उन्हें भी शामिल किया जाता है।

दो तरह की होती है GDP

GDP दो तरह की होती है। रियल GDP और नॉमिनल GDP। रियल GDP में गुड्स और सर्विस की वैल्यू का कैलकुलेशन बेस ईयर की वैल्यू या स्टेबल प्राइस पर किया जाता है। फिलहाल GDP को कैलकुलेट करने के लिए बेस ईयर 2011-12 है। वहीं नॉमिनल GDP का कैलकुलेशन करंट प्राइस पर किया जाता है।

कैसे कैलकुलेट की जाती है GDP?

GDP को कैलकुलेट करने के लिए एक फॉर्मूले का इस्तेमाल किया जाता है। GDP=C+G+I+NX, यहां C का मतलब है प्राइवेट कंजम्प्शन, G का मतलब गवर्नमेंट स्पेंडिंग, I का मतलब इन्वेस्टमेंट और NX का मतलब नेट एक्सपोर्ट है।

GDP की घट-बढ़ के लिए जिम्मेदार कौन है?

GDP को घटाने या बढ़ाने के लिए चार इम्पॉर्टेंट इंजन होते हैं। पहला है, आप और हम। आप जितना खर्च करते हैं, वो हमारी इकोनॉमी में योगदान देता है। दूसरा है, प्राइवेट सेक्टर की बिजनेस ग्रोथ। ये GDP में 32% योगदान देती है। तीसरा है, सरकारी खर्च।

इसका मतलब है गुड्स और सर्विसेस प्रोड्यूस करने में सरकार कितना खर्च कर रही है। इसका GDP में 11% योगदान है। और चौथा है, नेट डिमांड। इसके लिए भारत के कुल एक्सपोर्ट को कुल इम्पोर्ट से घटाया जाता है, क्योंकि भारत में एक्सपोर्ट के मुकाबले इम्पोर्ट ज्यादा है, इसलिए इसका इम्पैक्ट GPD पर नेगेटिव ही पड़ता है।

ये खबर भी पढ़ें…

2025 में भारत जापान को पीछे छोड़ चौथी अर्थव्यवस्था बना: दूसरी तिमाही में महंगाई घटकर 0.71% पर आई, बेरोजगारी भी कम हुई; 4 बड़ी उपलब्धियां

साल 2025 भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक साबित हुआ। इस साल हम जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बने। दूसरी तिमाही (Q2) में जीडीपी ग्रोथ बढ़कर 8.2% रही।

नवंबर में खुदरा महंगाई दर गिरकर 0.71% पर आ गई। वहीं, नवंबर में बेरोजगारी दर कम होकर 4.7% रह गई है, जो अप्रैल 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है। देश में ग्रोथ रेट ऊंची है और महंगाई बेहद कम, इसे ‘गोल्डिलॉक्स पीरियड’ कहा जाता है। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *