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- Navratri 2025, Beliefs: Offer 10 Things To Goddess Durga During Worship; Offering Coconut And Chunri Removes Obstacles.
12 घंटे पहले
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अभी देवी पूजा का उत्सव नवरात्रि चल रहा है। इन दिनों में देवी दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है। देवी पूजा में चुनरी, नारियल, सिंदूर खासतौर पर चढ़ाया जाता है। इन चीजों को चढ़ाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। ऐसी मान्यता है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा से जानिए 10 ऐसी चीजें जो देवी दुर्गा को चढ़ा सकते हैं…
नारियल को शुभ और पवित्र माना जाता है। इसे ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का प्रतीक माना जाता है। नारियल चढ़ाने से भक्तों को इच्छाओं की पूर्ति, सफलता, और परिवार में सुख-शांति प्राप्त होती है। नारियल चढ़ाना बलिदान और समर्पण का प्रतीक है।
देवी को लाल वस्त्र अर्पित करना उनका श्रृंगार करने जैसा है। चुनरी को देवी की आराधना में अत्यंत पवित्र माना जाता है। चुनरी चढ़ाने से कन्याओं के विवाह में बाधाएं दूर होती हैं और घर में मां की कृपा बनी रहती है। लाल, पीला या चमकीला रंग चुनरी के लिए उपयुक्त होता है।
चूड़ियां सौभाग्य और स्त्रीत्व का प्रतीक होती हैं। देवी को चूड़ियां अर्पित करने से महिलाओं को सौभाग्य, वैवाहिक सुख, और संतान सुख की प्राप्ति होती है। नवदुर्गा पूजा में कन्या पूजन के समय कन्याओं को चूड़ियां भेंट करना शुभ माना जाता है।
फूल देवी को प्रिय हैं, विशेषकर लाल गुलाब, गुड़हल (हिबिस्कस) और कमल। फूल चढ़ाने से विचारों में पॉजिटिविटी आती है, मानसिक शांति मिलती है और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
सिंदूर शक्ति और सौभाग्य का प्रतीक है। यह देवी को विशेष रूप से प्रिय होता है। सिंदूर चढ़ाने से विशेष रूप से विवाहित स्त्रियों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। देवी के मस्तक पर सिंदूर अर्पित करने से कष्टों का नाश होता है।
दीपक अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का प्रतीक है। दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और वातावरण शुद्ध होता है। दीपक में घी या सरसों के तेल का प्रयोग करना चाहिए और दीपक मिट्टी का होगा तो बहुत शुभ रहेगा।
- चावल – बिना टूटे हुए
अक्षत (चावल) का अर्थ है जो कभी खंडित न हो, यह संपूर्णता का प्रतीक है। देवी को अक्षत चढ़ाने से जीवन में पूर्णता और समृद्धि आती है।
- फल और मिठाई
प्रसाद के रूप में फल और मिठाई अर्पित करें। फल और मिठाई चढ़ाने से धन, सेहत और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
कुमकुम देवी के श्रृंगार का प्रमुख अंग है और शक्ति का प्रतीक है। कुमकुम चढ़ाने से स्त्रियों को सौभाग्य और पति की दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। इसे देवी के मस्तक पर तिलक रूप में लगाएं, और खुद भी इसका तिलक लगाएं।
शहद को पंचामृत का एक अंग माना जाता है और यह शुद्धता तथा मधुरता का प्रतीक है। शहद अर्पित करने से वाणी में मिठास आती है, संबंधों में प्रेम बढ़ता है और रोग-निवारण में भी सहायता मिलती है। यह देवी को विशेष रूप से प्रसन्न करता है। इसे दूध, दही, घी, शहद और शक्कर मिलाकर पंचामृत में उपयोग करें या सीधे देवी को अर्पित करें।








