मां सबकी मरती है, ड्रामा मत करो ऑफिस आओ:  बेटी बीमार पड़ी तो मैनेजर बोला- तुम डॉक्टर नहीं हो, सैलरी काट लूंगा
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मां सबकी मरती है, ड्रामा मत करो ऑफिस आओ: बेटी बीमार पड़ी तो मैनेजर बोला- तुम डॉक्टर नहीं हो, सैलरी काट लूंगा

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नई दिल्ली1 घंटे पहले

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UCO बैंक में काम करने वाले कर्मचारी ने अपने जोनल हेड पर गंभीर आरोप लगाते हुए एक इंटरनल ईमेल लिखा है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। कर्मचारी ने बैंक के चेन्नई जोनल हेड RS अजीत पर तानाशाही, अपमानजनक और असंवेदनशील वर्क प्लेस कल्चर को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।

ईमेल में दावा किया गया है कि कर्मचारियों को क्राइसिस के समय छुट्टी तक नहीं दी जाती है और उनके प्रॉब्लम का मजाक उड़ाया जाता है। एक ब्रांच हेड ने मां की निधन पर छुट्टी मांगी, तो मैनेजर ने कहा ‘ज्यादा ड्रामा मत करो ऑफिस आओ नहीं तो लीव विदाउट पे (LWP) लगा दूंगा’।

कर्मचारी ने ईमेल के जरिए इसकी शिकायत बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) से की है। कर्मचारी ने अपने शिकायत में कहा है कि जोनल मैनेजर RS अजीत गुलामों जैसा बर्ताव कर रहे हैं।

इमेल में ZM पर और भी आरोप लगाए गए…

  • एक ब्रांच हेड की मां ICU में थी। छुट्टी मांगने पर ZM ने कहा- पहले बताओ कब वापस आओगे, तभी छुट्टी दूँगा।
  • एक अन्य ब्रांच हेड की मां का निधन हो गया। ZM ने कहा- सबकी मां तो मरती है। ड्रामा मत करो, प्रैक्टिकल बनो। तुरंत जॉइन करो वरना LWP मार्क करूँगा। बाद में ब्रंच हेड के खिलाफ ऑफिशियल लेटर जारी किया गया।
  • एक ब्रांच हेड की एक साल की बेटी अस्पताल में भर्ती थी। ZM ने कहा- क्या तुम डॉक्टर हो? अस्पताल में क्यों हो? तुरंत ऑफिस जाओ वरना LWP मार्क करूँगा।
  • एक ब्रांच हेड की पत्नी को गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराने के लिए छुट्टी मागी। ZM ने कहा- तुम बेकार हो।

यूजर्स ने लिखा- इंसानियत के बिना अनुशासन सड़न

वायरल ईमेल के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इस तरह के घटना को बर्बरता और तानाशाही कहा और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और फाइनेंस मिनिस्ट्री जैसी संस्थाओं को टैग कर मामले में इंटरफेयर करने की मांग की। एक यूजर ने लिख, इंसानियत के बिना अनुशासन सड़न है।

विकास अरोड़ा नाम के एक यूजर ने लिखा, ‘ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि ये सारे बैंक पहले आलसी हुआ करते थे और अब सबको काम करना पड़ रहा है। ये क्रूरता गलत है, लेकिन अब जब सोए हुए लोगों को जगाना पड़ता है, तो उन्हें अपनी पुरानी आलसी और सुस्ती की आदतें याद आ जाती हैं। ये क्रूरता भी गलत है और इसका कोई परमानेंट सॉल्यूशन जरूर ढूंढना चाहिए।

सत्यम यादव ने लिखा, ‘मेरे साथ ऐसा हुआ है, मेरे पिताजी अस्पताल में भर्ती थे। मैंने बीएम से छुट्टी मांगी, लेकिन उन्होंने नहीं दी। कहा कि मैं ड्रामा कर रहा हूं, बहाने बना रहा हूं। कुछ दिन बाद मेरे पिताजी का निधन हो गया। मैंने कहा, ‘सर, पिताजी का निधन हो गया है, मैं गांव जा रहा हूँ।’ उन्होंने कहा, ‘जा, तेरी दिहाड़ी तो लग ही गई है।’

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