4 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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बारिश का मौसम भीषण गर्मी से राहत जरूर दिलाता है। लेकिन यह कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी साथ लाता है। नमी और जगह-जगह पानी भरने से बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं। इससे इन्फेक्शन फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
अगर समय पर इन बीमारियों को पहचाना नहीं जाए तो कई बार ये गंभीर रूप ले सकती हैं। हालांकि कुछ जरूरी सावधानियों और साफ-सफाई की आदतों से इस मौसम में खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है।
तो चलिए, आज जरूरत की खबर में मानसून के दौरान होने वाली 11 कॉमन बीमारियों के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- इन बीमारियों के क्या लक्षण हैं?
- इससे कैसे बचा जा सकता है?
एक्सपर्ट: डॉ. अतुल कक्कड़, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट, सर गंगा राम अस्पताल, नई दिल्ली
सवाल- मानसून में किन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है?
जवाब- बारिश के मौसम में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, लेप्टोस्पायरोसिस, टाइफाइड, हैजा, डायरिया, पेट का फ्लू, कंजंक्टिवाइटिस और वायरल बुखार जैसी बीमारियां आम हो जाती हैं। नीचे दिए ग्राफिक से इनके लक्षणों को समझिए-

आइए, अब इन बीमारियों के कारण, बचाव और इलाज के बारे में विस्तार से बात करते हैं।
1. डेंगू
कारण: यह एक वायरल बुखार है, जो संक्रमित एडीस एजिप्टी (Aedes aegypti) मच्छरों के काटने से होता है। यह मच्छर स्थिर पानी में पनपता है। मानसून में यह ज्यादा फैलता है क्योंकि इस मौसम में जगह-जगह पानी जमा होते हैं।
इलाज: इसका कोई सीधा इलाज नहीं है। इसमें बुखार, दर्द और अन्य लक्षणों को कम करने वाली दवाएं दी जाती हैं। साथ ही खूब पानी पीने और आराम करने की सलाह दी जाती है।
बचाव: मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। घर के आसपास पानी न जमा होने दें। खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगवाएं।
2. चिकनगुनिया
कारण: ये वायरल बुखार एडीस अल्बोपिक्टस (Aedes albopictus) नामक मच्छरों के काटने से फैलता है, जो कूलर, पौधों के गमलों, बर्तनों और पानी की पाइपों में ठहरे हुए पानी में पैदा होते हैं।
इलाज: इसका भी कोई खास इलाज नहीं है। इसमें दर्द और बुखार कम करने वाली दवाएं दी जाती हैं। साथ ही पर्याप्त आराम और खूब पानी पीने की सलाह दी जाती है।
बचाव: स्थिर पानी के जमाव को साफ करें, मच्छरों से बचें। इसके लिए मच्छरदानी और मच्छरों से बचाने वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें।
3. मलेरिया
कारण: मलेरिया मादा एनोफिलीज (Anopheles) मच्छर के काटने से होता है, जो पानी जमा होने वाली जगहों पर प्रजनन करता है। इसलिए मानसून के मौसम में मलेरिया ज्यादा होता है।
इलाज: इसका इलाज एंटीमलेरियल दवाओं से होता है। इसमें खूब पानी पीना और आराम करना जरूरी है।
बचाव: मच्छरों से बचें। अपने आसपास सफाई रखें और कहीं भी पानी न जमा होने दें।
4. कॉलरा (हैजा)
कारण: यह एक बैक्टीरियल इन्फेक्शन है, जो दूषित पानी या भोजन से फैलता है। मानसून में यह ज्यादा फैलता है क्योंकि इस समय पानी जल्दी दूषित हो जाता है।
इलाज: इसमें सबसे पहले मरीज को ORS (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) दिया जाता है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। जरूरत पड़ने पर ड्रिप और एंटीबायोटिक दी जाती है।
बचाव: हमेशा उबला हुआ या फिल्टर्ड पानी पिएं। बाहर का खुला खाना न खाएं। साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
5. टाइफाइड
कारण: यह बीमारी साल्मोनेला टाइफी नाम के बैक्टीरिया से होती है, जो दूषित पानी और खाना खाने से शरीर में पहुंचता है।
इलाज: इसमें एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं। इसमें पूरा कोर्स करना बहुत जरूरी होता है, वरना ये दोबारा हो सकता है।
बचाव: उबला हुआ या फिल्टर्ड पानी पिएं। खाने से पहले और टॉयलेट के बाद हाथ धोएं। बाहर का खाना खाने से बचें। टाइफाइड का टीका भी लगवा सकते हैं।

6. वायरल बुखार
कारण: मानसून में वायरस ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं। ऐसे में यह किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से हो सकता है।
इलाज: इसका कोई खास इलाज नहीं है। इसमें बुखार और शरीर दर्द कम करने वाली दवाएं दी जाती हैं। आराम करना और खूब पानी पीना जरूरी है।
बचाव: बीमार लोगों से दूरी बनाए रखें। खांसते और छींकते समय मुंह और नाक ढकें। अपने हाथ बार-बार धोएं। भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें।
7. डायरिया (दस्त)
कारण: इसमें गंदे पानी या दूषित भोजन से पेट में इन्फेक्शन हो जाता है। यह बच्चों में ज्यादा होता है।
इलाज: इसका मुख्य इलाज शरीर में पानी की कमी को पूरा करना है। इसके लिए ORS के साथ खूब पानी पिएं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लें।
बचाव: हमेशा साफ पानी पिएं। खाने से पहले और शौच के बाद हाथ जरूर धोएं। साफ-सफाई का ध्यान रखें।
8. लेप्टोस्पायरोसिस
कारण: यह लेप्टोस्पिरा नाम के बैक्टीरिया से होता है, जो जानवरों के यूरिन, दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से फैलता है। मानसून में बाढ़ के कारण इसका खतरा बढ़ जाता है।
इलाज: इसका इलाज एंटीबायोटिक दवाओं से किया जाता है। डॉक्टर की सलाह पर तुरंत इलाज शुरू कराएं।
बचाव: बाढ़ ग्रस्त इलाकों न रहें। अगर गीली मिट्टी में काम करना पड़े तो जूते और दस्ताने पहनें। खुले घावों को ढककर रखें।
9. पेट का फ्लू
कारण: यह एक वायरल इन्फेक्शन है, जो दूषित भोजन और पानी से फैलता है।
इलाज: इसका इलाज शरीर में पानी की कमी को पूरा करके किया जाता है। आसानी से पचने वाला खाना खाएं।
बचाव: हमेशा साफ पानी पिएं। ताजा और अच्छे से पका हुआ खाना खाएं। खाने से पहले और शौच के बाद हाथ धोएं।
10. इन्फ्लुएंजा (फ्लू)
कारण: यह एक संक्रामक वायरल बुखार है, जो खांसी-जुकाम वाले मरीजों से संपर्क में आने से फैलता है। मानसून में इसका असर बढ़ जाता है।
इलाज: इसका इलाज आराम करके, खूब पानी पीकर और बुखार व दर्द कम करने वाली दवाओं से किया जाता है।
बचाव: फ्लू का टीका लगवाएं। बीमार लोगों से दूरी बनाए रखें। खांसते और छींकते समय मुंह और नाक ढकें। हाथों को बार-बार धोएं।
11. कंजंक्टिवाइटिस
कारण: यह आंखों में होने वाला वायरल या बैक्टीरियल इन्फेक्शन है। मानसून में नमी ज्यादा होने से यह तेजी से फैलता है।
इलाज: डॉक्टर इसके लिए आई ड्रॉप्स लिखते हैं।
बचाव: आंखों को बार-बार न छुएं। अपने तौलिए और रूमाल किसी और के साथ शेयर न करें।
सवाल- मानसून के समय में इन्फेक्शियस डिजीज के मामले क्यों बढ़ जाते हैं?
जवाब- मानसून में नमी और जगह-जगह जमा पानी वायरस और बैक्टीरिया के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बनाते हैं। इससे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। नीचे दिए ग्राफिक से भारत में पिछले 5 सालों में होने वाले कॉमन इन्फेक्शियस डिजीज के मामलों को जानिए-

सवाल- किन लोगों को मानसून डिजीज का खतरा अधिक होता है?
जवाब- छोटे बच्चे, बुजुर्ग, कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग और गंदगी वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मानसून की बीमारियों का खतरा अधिक होता है। इसके अलावा प्रेग्नेंट व ब्रेस्टफीड कराने वाली महिलाओें को भी इसमें अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
सवाल- मानसून में होने वाली बीमारियों से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
जवाब- इसके लिए कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखना जरूरी है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- क्या मानसून की बीमारियों के लिए कोई खास टीकाकरण भी होता है?
जवाब- हां, टाइफाइड और हेपेटाइटिस A जैसी कुछ बीमारियों के लिए टीके उपलब्ध हैं। इसके अलावा फ्लू का टीका मानसून के दौरान होने वाले रेस्पिरेटरी प्रॉब्लम्स से बचाने में मदद कर सकता है। हमेशा किसी डॉक्टर की सलाह से ही टीकाकरण कराएं।
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