दिल्ली विधानसभा का तीन दिवसीय मानसून सत्र सफल रहा। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सत्र की उपलब्धियों और विधायी कामकाज की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष की नेता की लगातार अनुपस्थिति के बावजूद सदन में 13 घंटे 19 मिनट कार्यवाही चली। इस दौरान 19 कैग रिपोर्ट पेश की गई और चार महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुए। अध्यक्ष ने बताया कि नियम 280 के तहत सदस्यों ने कुल 52 जनहित के मुद्दे उठाए। सामान्य तौर पर प्रतिदिन 10 सदस्यों के लिए निर्धारित सीमा के बावजूद एक दिन में 23 सदस्यों को जनहित के विषय उठाने का अवसर दिया गया। 48 में से 44-45 सत्तापक्ष के सदस्य रहे मौजूद
गुप्ता ने कहा कि विधानसभा में 22 विपक्षी सदस्य हैं, जिनमें करीब 20 सदन में उपस्थित रहे। वहीं सत्तापक्ष के 48 में से करीब 44-45 सदस्य सदन में मौजूद रहे। उन्होंने 7वीं और 8वीं विधानसभा के कामकाज की तुलना करते हुए कहा कि 7वीं विधानसभा ने पांच साल में पांच सत्र आयोजित किए थे, जबकि 8वीं विधानसभा ने डेढ़ साल से भी कम समय में छह सत्र आयोजित कर लिए हैं। नागरिक समस्याओं से लेकर दंगों पर चर्चा
सत्र में कूड़ा निस्तारण, जलभराव, आवारा पशु, पीडब्ल्यूडी की सड़कों और बिजली बिलों से जुड़े मुद्दे उठे। उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में राजनीतिक नेताओं की भूमिका और सजा के मुद्दे पर दो दिवसीय अल्पकालिक चर्चा भी हुई। दिल्ली लक्ष्मी योजना पर सदन ने सर्वसम्मति से बधाई प्रस्ताव पारित किया। श्री गुरु नानक साहिब जी के प्रकाश उत्सव पर शुभकामनाएं दी गईं। पूर्व विधायकों और दिल्ली में आग की घटनाओं के पीड़ितों को श्रद्धांजलि भी दी गई। चार विधेयक हुए पारित
सत्र में दिल्ली बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठान (निरसन) विधेयक, 2026, नागरिकों को समयबद्ध और सुगम सेवाओं के अधिकार से संबंधित विधेयक, 2026, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (संशोधन) विधेयक, 2026 और दिल्ली अग्निशमन सेवा (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किए गए। अध्यक्ष ने कहा कि इनसे जनसेवाओं, शहरी आश्रय व्यवस्था और अग्निशमन सेवाओं में सुधार होगा।
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