मिन्हाज मर्चेंट का कॉलम:  अमेरिका में बढ़ता नस्लवाद भारतवंशी नेताओं के लिए चुनौती है
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मिन्हाज मर्चेंट का कॉलम: अमेरिका में बढ़ता नस्लवाद भारतवंशी नेताओं के लिए चुनौती है

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भारतीय-अमेरिकी मूल के सॉफ्टवेयर आंत्रप्रेन्योर विवेक रामास्वामी अपनी हिंदू पहचान को छिपाने की कोशिश नहीं करते। पिछले हफ्ते उन्होंने ओहायो के गवर्नर पद के लिए रिपब्लिकन पार्टी का नामांकन जीत लिया। ओहायो में राज्य विधानसभा के दोनों सदनों, गवर्नर कार्यालय और सभी प्रमुख सरकारी संस्थानों पर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण है। अमेरिकी राजनीति में गवर्नर का कद भारत के किसी मुख्यमंत्री जैसा होता है। ऐसा नहीं ​है कि रामास्वामी किसी अमेरिकी राज्य के पहले भारतीय मूल के गवर्नर होंगे। इससे पहले बॉबी जिंदल लुइसियाना के और निक्की हेली साउथ कैरोलाइना की गवर्नर रह चुकी हैं। लेकिन रामास्वामी उन दोनों से अलग हैं। जिंदल ने श्वेत ईसाई अमेरिकी समुदाय में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए ईसाइयत अपनाकर खुद का नाम पीयूष की जगह बॉबी रख लिया था। वहीं साउथ कैरोलाइना में एक सिख माता-पिता के घर निमरत रंधावा के रूप में जन्मीं हेली ने भी सिख धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपना लिया था। इनके विपरीत रामास्वामी को अपनी हिंदू पृष्ठभूमि पर गर्व है। वे शान से अपनी पत्नी अपूर्वा और बेटों कार्तिक व अर्जुन का नाम लेते हैं। जिंदल और हेली की तरह रामास्वामी भी अमेरिका में जन्मे हैं, लेकिन उन्होंने अपने बच्चों के नामों का अमेरिकीकरण करने या उनकी हिंदू धारणाओं को बदलने की कोशिश नहीं की। ईसाई धर्म अपनाने के बावजूद जिंदल और हेली अमेरिकी राजनीति में ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाए। क्या रामास्वामी इसमें सफल होंगे? जिंदल और हेली की तुलना में आज रामास्वामी के सामने सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियां कहीं अधिक हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने नस्लवाद और वाइट सुप्रीमेसी को मुख्यधारा में ला दिया है। ट्रम्प का ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ यानी ‘मागा’ समर्थक आधार ऐसे कम पढ़े-लिखे और बेरोजगार अमेरिकियों से बना है, जिन्हें डर है कि भारतीय और चीनी आप्रवासी उनकी नौकरियां खा रहे हैं। ओहायो में प्रचार के दौरान रामास्वामी को इतनी ऑनलाइन नस्लवादी नफरत का सामना करना पड़ा कि उन्होंने अपने इंस्टाग्राम और ‘एक्स’ अकाउंट का इस्तेमाल ही बंद कर दिया। ये अकाउंट अब उनकी टीम अपडेट करती है। ट्रम्प प्रशासन की आप्रवासियों के ​खिलाफ इस्तेमाल की जाने वाली भाषा ने अमेरिका में इस विषैले माहौल को और हवा दे दी है। अपने दूसरे कार्यकाल में ट्रम्प ने रामास्वामी को इलॉन मस्क के साथ ‘डीओजीई’ (डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट इफिशिएंसी) का सह-प्रमुख बनाया था। लेकिन जल्द ही दोनों के बीच टकराव हो गया। रंगभेद नीति के जमाने में दक्षिण अफ्रीका में जन्मे और पले-बढ़े मस्क खुद को नस्लवादी नहीं मानते, लेकिन उनके खुद के ‘एक्स’ हैंडल पर वाइट सुप्रीमेसी और पश्चिमी सभ्यता को बचाने संबंधी पोस्ट भरे पड़े हैं। अमेरिका में नफरती और नस्लभेदी बयानबाजी पर “द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में लिखे एक ​लेख में रामास्वामी ने कहा कि अमेरिकी दक्षिणपंथ में अब दो दृष्टिकोण उभर रहे हैं और दोनों ही परस्पर विरोधी हैं। एक नजरिए के मुताबि​क अमेरिकी पहचान वंश, खून और मिट्टी पर आधारित है, जहां विरासत में मिली पहचान ही सर्वाधिक मायने रखती है। इस सोच के अनुसार सबसे शुद्ध अमेरिकी वही हैं, जिनके वंश की जड़ें अमेरिका की स्थापना या उससे भी पहले की हैं। उन्होंने कहा कि श्वेत-केंद्रित पहचान को गढ़ना कुछ ऐसा था, जिसका अंदाजा पहले से था। 2022 की अपनी किताब ‘नेशन ऑफ विक्टिम्स’ में उन्होंने इसका अनुमान लगाया था। लेकिन बीते पांच सालों में गैर-श्वेतों से भेदभाव के चलते अब यह चंद लोगों की विचारधारा मात्र नहीं रह गई। इसके बावजूद रामास्वामी कहते हैं, आज आप अमेरिकी तब हैं, जब कानून के शासन, अंतरात्मा की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी, रंगभेद से रहित व्यवस्था और संविधान में विश्वास रखते हैं। ऐसे नस्लीय तनाव से भरे माहौल में ओहायो का गवर्नर चुनाव जीतना रामास्वामी के लिए बड़ी चुनौती होगा। उनका मुकाबला डेमोक्रेटिक पार्टी उम्मीदवार एमी एक्टन से है। ताजा जनमत सर्वेक्षण बताते हैं कि दोनों के बीच कांटे की टक्कर है। रामास्वामी को 48% और एक्टन को 47% समर्थन मिल रहा है। ट्रम्प ने भी रामास्वामी को अगला गवर्नर बनाने को लेकर समर्थन दे दिया है। एक साल पहले तक यह समर्थन रामास्वामी के पक्ष में माहौल बना सकता था, लेकिन अब शायद नहीं। क्योंकि खुद ट्रम्प की लोकप्रियता ऐतिहासिक रूप से नीचे पहुंच चुकी है। महज 30% लोगों ने ही उनका समर्थन किया है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)



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