7 मिनट पहले
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फाइल फोटो
नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी यानी NBFC मुथूट फिनकॉर्प लिमिटेड अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लाने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने ₹3,000 करोड़ का IPO लाने के लिए कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP दाखिल कर दिया है।
इस पूंजी का उपयोग भविष्य की पूंजी जरूरतें पूरी करने, आगे कर्ज देने और कारोबार की ग्रोथ व विस्तार में मदद के लिए किया जाएगा।
कंपनी द्वारा बुधवार को जमा कराए गए ड्राफ्ट पेपर्स के मुताबिक, यह पूरा आईपीओ पूरी तरह से फ्रेश इश्यू यानी इसमें नए शेयर जारी किए जाएंगे। इसमें कोई भी ऑफर फॉर सेल यानी OFS शामिल नहीं है और पूरी राशि कंपनी के खाते में जाएगी।
जुटाए गए पैसों का कहां इस्तेमाल होगा?
कंपनी आईपीओ से मिलने वाले ₹3,000 करोड़ के फंड का इस्तेमाल अपने टियर-1 कैपिटल बेस को मजबूत करने के लिए करेगी। इससे कंपनी की आगे लोन बांटने की क्षमता बढ़ेगी और बिजनेस के विस्तार तथा भविष्य की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
139 साल पुराना ग्रुप का इतिहास, गोल्ड लोन मुख्य बिजनेस
मुथूट फिनकॉर्प, मुथूट पप्पाचन ग्रुप का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत 1887 में हुई थी। कंपनी मुख्य रूप से गोल्ड लोन सेगमेंट में काम करती है और पिछले दो दशकों से ज्यादा समय से इस बिजनेस में है।
गोल्ड लोन के अलावा यह कंपनी बिजनेस लोन, लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी, सप्लाई चेन फाइनेंसिंग, डिजिटल लोन, माइक्रोफाइनेंस और हाउसिंग लोन जैसी सुविधाएं भी देती है।
देशभर में 5,610 शाखाएं और 42 लाख से ज्यादा ऐप यूजर्स
31 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, मुथूट फिनकॉर्प का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹73,444.72 करोड़ तक पहुंच गया है। कंपनी का नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ है और इसके 5,610 ब्रान्चेज काम कर रहे हैं। इसके साथ ही, कंपनी के डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘Muthoot FinCorp ONE’ के 42.6 लाख रजिस्टर्ड यूजर्स हैं।

कंपनी का मुनाफा 3 गुना बढ़कर ₹1,847 करोड़ हुआ
फाइनेंशियल फ्रंट की बात करें तो वित्त वर्ष 2026 (FY26) में कंपनी के प्रदर्शन में जबर्दस्त सुधार देखने को मिला है:
- कंसोलिडेटेड प्रॉफिट: FY26 में कंपनी का शुद्ध मुनाफा तीन गुना बढ़कर ₹1,847.62 करोड़ रहा, जो इससे पिछले वित्त वर्ष (FY25) में ₹607.90 करोड़ था।
- रेवेन्यू (कमाई): ऑपरेशंस से मिलने वाला कंसोलिडेटेड रेवेन्यू बढ़कर ₹11,203.81 करोड़ हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹8,497.69 करोड़ था।
नॉलेज बॉक्स: फ्रेश इश्यू और OFS में क्या अंतर होता है?
फ्रेश इश्यू: कंपनी नए शेयर जारी करती है। इससे मिलने वाला पूरा पैसा कंपनी के पास जाता है, जिसका इस्तेमाल कर्ज चुकाने या बिजनेस बढ़ाने में होता है।
ऑफर फॉर सेल (OFS): पुराने प्रमोटर्स या इन्वेस्टर्स अपने शेयर बेचते हैं। इसका पैसा कंपनी को न मिल कर सीधे शेयर बेचने वाले इन्वेस्टर्स के पास जाता है।








