मोबाइल में एक्टिव सिम से ही चलेंगे वॉट्सएप-टेलीग्राम-स्नैपचैट:  सिम हटाई तो एप बंद, कम्प्यूटर पर भी हर 6 घंटे में लॉगआउट; दावा- साइबर फ्रॉड घटेगा
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मोबाइल में एक्टिव सिम से ही चलेंगे वॉट्सएप-टेलीग्राम-स्नैपचैट: सिम हटाई तो एप बंद, कम्प्यूटर पर भी हर 6 घंटे में लॉगआउट; दावा- साइबर फ्रॉड घटेगा

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नई दिल्ली23 मिनट पहले

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वॉट्सएप का वेब वर्जन अभी कई दिन तक लॉगइन रहता था, अब ऐसा नहीं हो सकेगा- फोटो AI जनरेटेड है। - Dainik Bhaskar

वॉट्सएप का वेब वर्जन अभी कई दिन तक लॉगइन रहता था, अब ऐसा नहीं हो सकेगा- फोटो AI जनरेटेड है।

केंद्र सरकार ने शनिवार को मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को लेकर नया आदेश जारी किया है। वॉट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल, स्नैपचैट, शेयरचैट, जियोचैट, अराटाई और जोश जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स मोबाइल में एक्टिव सिम कार्ड के बिना नहीं चल पाएंगे। सरकार का दावा है कि इससे साइबर धोखेबाजों का पता लगाने में मदद मिलेगी।

दूरसंचार विभाग के आदेश में कहा गया है कि मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स यह तय करें कि एप तभी चलेगा, जब यूजर की रजिस्टर्ड सिम उस मोबाइल में एक्टिव होगी। इतना ही नहीं ‘सिम बाइंडिंग’ के तहत अगर मोबाइल से सिम निकाल ली जाती है तो वॉट्सएप और बाकी दूसरे मैसेजिंग एप बंद हो जाएंगे।

वेब ब्राउजर यानी लैपटॉप या डेस्कटॉप के जरिए लॉगिन करने वाले यूजर के लिए भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को हर छह घंटे में यूजर को लॉगआउट करना होगा। इसके बाद क्यूआर कोड के जरिए ही लॉगिन हो सकेगा।

मैसेजिंग एप के लिए नियम से जुड़े सवाल-जवाब

सवाल- नियम में बदलाव क्यों किया गया है?

जवाब- बंद/इनएक्टिव नंबर का गलत इस्तेमाल न हो। धोखाधड़ी, फर्जी अकाउंट और स्पैम रुक सकें। साइबर सुरक्षा मिल सके। यूजर्स की पहचान (KYC) से जुड़ी ट्रांसपैरेंसी बढ़े। बंद नंबर किसी और को दोबारा जारी होने पर सुरक्षा खतरा न बने।

सवाल- अभी मोबाइल में ये एप कैसे चलाए जाते हैं?

जवाब- अभी किसी भी मोबाइल नंबर को OTP से वैरिफाई करके एप चला लेते हैं। एक बार लॉगिन के बाद, भले ही नंबर बंद हो जाए, एप चलता रहता है। मैसेजिंग एप पुराने या इनएक्टिव नंबर पर भी चलता रहता है, जब तक यूजर फोन बदल नहीं देता, या फिर रीसेट नहीं करता।

सवाल- लैपटॉप-डेस्कटॉप पर कैसे चलाए जाते हैं?

जवाब- डेस्कटॉप पर एप चलाने के लिए सिर्फ मोबाइल में एप का एक्टिव होना जरूरी है। लैपटॉप/डेस्कटॉप लगातार मोबाइल पर निर्भर नहीं रहता। एक बार लिंक हो जाए तो खुद भी काम करता रहता है।

सवाल- नए बदलाव के बाद मोबाइल में इन एप के इस्तेमाल पर क्या फर्क पड़ेगा?

जवाब- अगर आपका मोबाइल नंबर इनएक्टिव/बंद हो जाता है, तो मैसेजिंग एप अपने आप बंद हो जाएंगे। लॉगिन नंबर एक्टिवेट होने पर ही हो सकेगा। यानी SIM बंद तो एप भी बंद। नंबर दोबारा जारी होने पर पुराना यूजर एप नहीं चला सकेगा। यूजर को एप चलाने के लिए अपना नंबर चालू रखना जरूरी होगा।

सवाल- अभी पुरानी इनएक्टिव सिम वाले नंबर का इस्तेमाल भी वॉट्सएप नंबर के तौर पर हो जाता है। क्या ऐसा अब भी कर सकते हैं?

जवाब- नहीं, नए नियम के बाद यह सुविधा खत्म हो जाएगी। पुराना बंद नंबर लेकर मैसेजिंग एप पर अकाउंट बनाना भी असंभव होगा। वह नंबर सिस्टम में इनवैलिड-इनएक्टिव दिखेगा।

सवाल- क्या वॉट्सएप-टेलीग्राम-स्नैपचैट के अलावा किसी दूसरे एप के इस्तेमाल पर भी असर होगा?

जवाब- हां, सभी ओटीपी बेस्ड मैसेजिंग, कॉलिंग और सोशल एप प्रभावित होंगे। इनमें सिगनल, आईमैसेज, ट्रूकॉलर, ओटीपी से लिंक फेसबुक, इंस्टाग्राम, गूगल/एपल आईडी में नंबर बेस्ड रिकवरी और यूपीआई एप जिसमें वैरिफिकेशन जरूरी हो। मतलब, कोई भी एप जो मोबाइल नंबर पर आधारित लॉगिन देता है, वह इस नियम से प्रभावित होगा।

फीचर से बढ़ रहा साइबर फ्रॉड, इसलिए सख्ती की

कई सर्विस प्रोवाइडर यूजर के मोबाइल नंबर को केवल एक बार (इंस्टॉलेशन के समय) वैरिफाई करती हैं। इसके बाद सिम कार्ड हटा देने पर भी मैसेजिंग एप काम करता रहता है। यह फीचर टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी के लिए चुनौती बन रहा है क्योंकि देश के बाहर से साइबर-फ्रॉड करने के लिए इसका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।

केंद्र के नए निर्देश का मतलब है कि ये मैसेजिंग सर्विस तभी काम करेंगी जब यूजर के फोन में SIM मौजूद और एक्टिव होगी। विभाग ने कहा है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

सभी ओवर-द-टॉप (ओटीटी) संचार प्लेटफॉर्म को 90 दिन में सिम-टू-डिवाइस बाइंडिंग नियम मानना होगा। 120 दिनों के भीतर इसकी रिपोर्ट देनी होगी।

नियमों का पालन न करने पर टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023, टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स और दूसरे लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

SIM-बाइंडिंग नियम क्या है

सिम बाइंडिंग का मतलब है कि सिम एक फोन से बाइंड यानी जुड़ जाती है। फोन बदलते ही सिस्टम पहचान लेता है कि यह नया डिवाइस है। सिम बाइंडिंग नियम के मुताबिक सिम कार्ड सिर्फ उसी फोन में पूरी तरह काम करेगा, जिसमें उसे पहली बार इस्तेमाल किया गया था।

अगर सिम को निकालकर दूसरे फोन में डाला जाता है, तो कुछ सर्विस अपने-आप बंद हो जाएंगी। इन सर्विस में UPI, बैंकिंग ऐप, मोबाइल वॉलेट, KYC, OTP बेस्ड लॉगिन शामिल हैं।

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